कंपनियां और ग्राहक, दोनों को भाती है बीमा की ऑनलाइन छतरी

बीमा नियामक, इंश्योरेंस रेगुलेटरी डेवलपमेंट अथॉरिटी (आईआरडीए) की ओर से हाल ही में कई नियमों को सख्त किया गया जिनमें से एक एजेंटों के कमीशन में कमी, भी शामिल था। इरडा के इस कदम के बाद से ऑनलाइन पॉलिसियों की बिक्री में अच्छा-खासा इजाफा देखने को मिला। पिछले कुछ महीनों में ही जहां एगॉन रेलिगियर लाइफ इंश्योरेंस ने आईटर्म के नाम से अपने एक ऑनलाइन प्लान की बिक्री शुरू की वहीं एचडीएफसी लाइफ ने क्लिक२प्रोटेक्ट जबकि भारती एक्सा लाइफ ने आईप्रोटेक्ट के नाम से भी अपने-अपने ऑनलाइन बीमा योजनाओं की शुरुआत की। खास बात यही कि ये सभी लांच योजनाएं टर्म इंश्योरेंस प्लान हंै। इसके अलावा एसबीआई लाइफ ने भी कुछ दिनों पहले से अपनी ऑनलाइन निवेश सेवा को पांच भाषाओं में देना शुरू कर दिया है। आज बीमा क्षेत्र में ऑनलाइन बीमा योजनाओं के नाम पर सभी प्रमुख कंपनियों के दर्जनों प्लान आ चुके हैं। कुल मिलाकर बीमा क्षेत्र में जो तस्वीर बन रही है वो यही बताती है कि भविष्य में ऑनलाइन बीमा का बाजार जोर पकड़ता दिखेगा।

ऑनलाइन बीमा पॉलिसियां ऐसी पॉलिसियां होती है जिन्हें इंटरनेट के माध्यम से सीधे सीधे विक्रेता (बीमा कंपनी) से खरीदा जाता है। यानी इन पॉलिसी की खरीद में एजेंट की भूमिका नहीं रहती है। इन पॉलिसी की खरीद के लिए ग्राहक को इंटरनेट के माध्य से पॉलिसी का चयन कर उसमें सूचनाएं भरनी होती है और फिर संंबंधित दस्तावेजों की प्रति लगानी होती है। इस पॉलिसी का चयन कंपनी वेबसाइट से भी कर सकते हैं और विभिन्न स्वतंत्र वेबसाइटों से भी कर सकते हैं। अगर जरूरी होगा तो कंपनियां आपका मेडिकल एक्जामिनेशन भी करवाएगी।

ग्राहकों को क्यों करते हैं पसंद

ऑनलाइन बीमा योजनाओं की लोकप्रियता कई कारणों से बढ़ी है जिनमें किफायती प्रीमियम, सहजता, एजेंटों की मिससेलिंग से मुक्ति आदि शामिल है। पॉलिसी बाजार डॉट कॉम के सीएमओ अक्षय मेहरोत्रा बताता हैं कि किसी पॉलिसी को ऑनलाइन खरीदना बेहद सस्ता पड़ता है। एक उदाहरण देते हुए वह कहते हैं कि यदि कोई व्यक्ति एक करोड़ रुपये का बीमा एजेंट के जरिए खरीदे तो उसका सालाना प्रीमियम २४००० रुपये सालाना आएगा, जबकि इसी बीमा को यदि ऑनलाइन लिया जाए तो उसका प्रीमियम ६५०० रुपये प्रति वर्ष बैठेगा।

जब भी कोई व्यक्ति एजेंट के जरिए कवर खरीद रहा है तो मुमकिन है कि वो आपको बहला कर कोई ऐसा उत्पाद पकड़ा दे जिसकी आपको जरूरत नहीं या फिर वो ऐसा उत्पाद ही बेच दे जहां से उसे अच्छी कमाई होती हो। पॉलिसी को ऑनलाइन खरीदने से इस तरह की दिक्कतों से बचा जा सकता है। पॉलिसी को ऑनलाइन खरीदकर एक ग्राहक बिना झांसे में आए उत्पादों को खरीदेगा। यहां वह विभिन्न पॉलिसी की विशेषताओं, एक्सक्लूजन, प्रीमियम आदि को खुद परखेगा और अपने लिए योग्य उत्पाद चुनेगा।

कंपनियां क्यों करती है पसंद

नियमों में बदलाव ने बीमा कंपनियों को अपने वितरण तरीके में बदलाव करने पर मजबूर किया और इसी के तहत वह किफायती जरिए तलाशने लगे। लागत कम करने के लिए उन्होंने तकनीकी का सहारा लिया और एक ऐसे मॉडल को विकसित किया जिससे वॉल्यूम बढ़े। चूंकि ऑनलाइन वितरण सबसे किफायती था इसलिए अधिक से अधिक कंपनियां इस क्षेत्र में आने लगी ताकि इंटरनेट के जरिए उनकी पहुंच बढ़े।

ऑनलाइन बिक्री को पसंद करने का कंपनियों का और कारण एक यह भी है कि चूंकि यहां बिचौलिए नहीं होते हैं और खरीदार खुद सूचनाएं भरता है इसलिए इसकी सत्यता अधिक होती है। भारत में ऑनलाइन पॉलिसियों की शुरुआत हुए करीबन तीन साल हो चुके हैं। मेहरोत्रा के मुताबिक भारत में परिचालित २४ जीवन बीमा और इतने ही गैर जीवन बीमा में से करीबन एक दर्जन कंपनियों ने अपनी ऑनलाइन योजनाओं की शुरुआत कर दी है।

मेहरोत्रा की मानें तो ऑनलाइन बीमा क्षेत्र में आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, एगॉन रेलिगेयर लाइफ इंश्योरेंस कंपनी इंडिया, बजाज एलियांज लाइफ इंश्योरेंस, एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस कंपनी सर्वाधिक पसंद की जाने वाली कंपनियां हैं।

किसकी होती है सर्वाधिक खरीद

इंटरनेट पर सबसे ज्यादा टर्म पॉलिसी की ही खरीद होती है। टर्म पॉलिसी ऐसी योजनाएं होती है जिसमें ग्राहक से केवल बीमा कवच उपलब्ध कराए जाने का खर्च लिया जाता है। यह कोई निवेश उत्पाद नहीं है। यदि पॉलिसी अवधि के दौरान धारक जीवित है तो उसे उसके द्वारा अदा किए गए प्रीमियम में कुछ भी वापस नहीं मिलेगा। हां, धारक की मृत्यु पर लाभार्थी को सम एश्योर्ड का फायदा जरूर मिलेगा।

विभिन्न कंपनियों की ऑनलाइन बीमा सेवा उपलब्ध कराने वाली वेबसाइट पॉलिसीबाजारडॉटकॉम का दावा है कि देश की ७० फीसदी ऑनलाइन बीमा की खरीद उनके वेबसाइट से होती है। अब कौन सी ऑनलाइन पॉलिसी किस अनुपात में बिकती है इसका अंदाजा कंपनी के ही बिक्री के आंकड़े से लगाते हैं।

पॉलिसीबाजारडॉटकॉम के मुताबिक वह हर महीने ४००० टर्म पॉलिसी, ३००० यूलिप, २५०० मेडिकल पॉलिसी और करीबन १००० मोटर इंश्योरेंस की बिक्री करती है। इस प्रकार की वेबसाइटों से खरीदने का फायदा यही है कि यहां  प्रतिस्पर्र्धी कंपनियों के भी समान उत्पादों की तुलना आसान हो जाती है।

भिन्नता है संभव

यह मुमकिन है कि एक ही कंपनी का कोई निश्चित प्लान यदि आप एजेंट के जरिए खरीदें और ऑनलाइन खरीदें तो प्रीमियम राशि के साथ-साथ दोनों की शर्तों और फीचर्स में भी भिन्नता हो। इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए कि एक ३० वर्षीय पुरुष यदि ५० लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस १० साल की अवधि के लिए लेता है तो कोटक लाइफ इंश्योरेंस अपने कोटक टर्म प्लान के तहत इसके लिए उससे ४६५ रुपये प्रति माह का प्रीमियम चार्ज करेगी। अगर वह पॉलिसी ऑनलाइन लेता है तो कोटक ई-टर्म के तहत ३८९ रुपये का प्रीमियम चार्ज करेगी। खैर अभी तक तो लग रहा है कि ऑनलाइन सस्ता बैठता है लेकिन फिर यहां एक बात और गौर करनी होगी। कोटक टर्म प्लान के ग्राहक के पास यह विकल्प होगा कि वह इसे कोटक लाइफ इंश्योरेंस के (टर्म प्लान को छोडक़र) किसी भी अन्य प्लान के साथ चाहें तो बदले लें। यदि आप कोटक ई-टर्म पॉलिसी लेते हैं तो आपके पास यह बदलने वाला विकल्प नहीं होगा।

हाल ही में एगॉन रेलिगियर ने एगॉन रेलिगियर लाइफ अपने ऑनलाइन टर्म इंश्योरेंस प्लान, आईटर्म प्लान को लांच किया था। यदि किसी ३० वर्षीय व्यक्ति को ३० साल के लिए ५० लाख रुपये की यह पॉलिसी लेनी होगी तो इसके लिए वह ४१०० रुपये प्रति वर्ष की अदायगी करेगा। यदि वह व्यक्ति कंपनी की ही एक अन्य टर्म प्लान, लेवल टर्म प्लान को ऑफलाइन तरीके से खरीदता है तो उसे १२१५० रुपये का सालाना प्रीमियम भरना होगा। हालांकि लेवल प्लान के तहत सम एश्योर्ड बढ़ाने का विकल्प होगा और लैप्स पॉलिसी को पुन: शुरू कराने जैसा विकल्प मिलता है जो आईटर्म प्लान के साथ नहीं मिलता है।

जब खरीदें ऑनलाइन

सही सूचना उपलब्ध कराएं – चूंकि यहां आप अपने आवेदन फॉर्म में क्या भर रहे हैं क्या नहीं, इसे देखने के लिए एजेंट नहीं होता है इसलिए पॉलिसी खरीदार को सतर्क रहना जरूरी है। खरीदार को सही सूचनाएं भी देना जरूरी होगा। यदि बीमा कंपनी को लगा कि आपने कुछ जरूरी बातों का गलत उल्लेख किया है या फिर कुछ छुपाया है तो वो आपके क्लेम को देने से इनकार कर देगी।

सभी उपलब्ध विकल्पों की तुलना करें – चूंकि ऑनलाइन बीमा में एजेंट की भूमिका नहीं होती है इसलिए जरूरी है कि ग्राहक प्रतिस्पर्धी बीमा कंपनियों की विभिन्न योजनाओं के फीचर्स, एक्सक्लूजन, राईडर, प्रीमियम आदि की तुलना करें और अपने लिए उपयुक्त उत्पाद का चयन करें। स्वतंत्र साइट जैसे पॉलिसीबाजारडॉटकॉम, इंश्योरेंसमॉलडॉटकॉम, अपनालोनडॉटकॉम आदि को तुलना के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

सही कवच का चयन करें – मुमकिन है कि कम कीमत वाला प्रीमियम खरीदार को जरूरत से अधिक राशि का कवर खरीदने का लालच दे। मान लीजिए एक व्यक्ति को एक करोड़ रुपये के कवर की जरूरत है, जिसके लिए वह १२५०० रुपये प्रति वर्ष का प्रीमियम अदा करेगा। लेकिन वहीं महज ५००० रुपये खर्च अतिरिक्त खर्च कर उसे दो करोड़ का कवर मिल रहा हो तो संभव है कि वह इसकी खरीद कर डाले। देखा जाए तो यह ५००० रुपये फिजूल खर्ची ही होगी।

सही अवधि का चयन करें – एक खरीदार गलत अवधि के लिए भी कवर खरीद बैठता है। जैसे वह उस अवधि का कवर खरीद लेता है जिसके बाद वह शायद कमाना बंद कर दे या फिर वो ऐसी पॉलिसी खरीद ले जो उसके ४० वर्ष की उम्र में खत्म हो जा रही हो।  दोनों ही स्थितियां गलत खरीद साबित होंगी क्योंकि यहां खरीदार उस समय बगैर कवच के होगा जब उसके ऊपर सर्वाधिक जोखिम और उत्तरदायित्व होगा।

भविष्य का रखें ध्यान – आज आपको ५० लाख रुपये का जीवन बीमा भले ही उचित लग रहा हो लेकिन छह फीसदी की मुद्रास्फीतिक दर का मतलब होगा कि १० साल बाद आपके इस बीमा की वैल्यू घटकर २८ लाख रुपये के बराबर रह जाएगी। इसलिए जरूरी है कि आप इसे ध्यान में रखते हुए ही उचित राशि का कवर लें।

प्रीमियम के लिए रिमाइंडर सेट करें- चूंकि यहां कोई एजेंट उपस्थित नहीं रहता है इसलिए प्रीमियम भरने की तिथि याद रखने का उत्तरदायित्व खुद धारक का ही होता है। यदि वह ड्यू डेट को पॉलिसी का भुगतान नहीं कर पाता है और ग्रेस अवधि भी बिना भुगतान के निकल जाती है तो पॉलिसी लैप्स कर जाएगी और आपको फिर से इसे खरीदना होगा। इससे बचने का श्रेष्ठ तरीका है कि बीमा कंपनी को ही समय-समय पर इलेक्ट्रॉनिक चैक क्लियरिंग (र्ईसीएस) के जरिए बैंक से ऐसा करने की स्वीकृति दे दें।

 

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