ध्यान है एक अनुभव जहां स्मृति और कल्पना दोनों हो जाएं शून्य

ओशो का एक प्रसिद्ध वचन है-‘क्या तुम ध्यान करना चाहते हो ? तो ध्यान रखना कि ध्यान में न तो

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