अर्थ जगत

आखिर क्या गिफ्ट खरीदूं उनके लिए?

मानुष को उपहार देने का बड़ा शौक था। ऐसा नहीं कि उसके पास संसाधनों का अंबार था, पर शौक तो शौक है। वह किसी भी आयोजन में खाली हाथ नहीं जाता। दोस्त के बच्चे का बर्थडे हो या बॉस की मैरिज एनिवर्सरी, वह जाता जरूर और उपहार भी साथ में होता। पर उसे तकलीफ इस बात की थी कि उसके उपहार को न तो कोई तवज्जो देता था, न ही कोई खुशी जताता था। उस दिन उसके दु:ख का पारावार नहीं रहा जब बॉस की मैरिज एनिवर्सरी पर उसके द्वारा दिए गए उपहार को बॉस ने अपनी सेक्रेटरी की मैरिज एनिवर्सरी पर गिफ्ट कर दिया। वही गिफ्ट और वही रैपर। वह बोला कुछ नहीं किंतु उदास हो गया। ऐसा कौन सा उपहार खरीदे वह, जिसे लोग संजोकर रखें ओर उपहार के रूप में उसकी उपस्थिति वहां हमेशा कायम रहे। आइए, जरा विचार करें मानुष की इस समस्या पर।

नवजात शिशु के लिए कोई ऐसा उपहार सोचिए जो बड़ा होने पर उसके लिए सहारा बनेे। बहुत सारे बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने दादी-नानी द्वारा गिफ्ट किए गए सोने की कनौसी बेचकर कॉलिज की फीस भरी है। उस समय सोना एक पॉपुलर एसेट था, आज गोल्ड ईटीएफ, एनएससी, निफ्टी बीज न जाने क्या क्या उपलब्ध हैं। जब बच्चा कॉलिज जाएगा तो आपको याद करेगा। विद्या में योगदान महादान तो है ही। किसी नव विवाहित युगल को गृहोपयोगी वस्तु उपहार के रूप में देना आम बात है। पर उन्हें यूलिप की सिंगल प्रीमियम पॉलिसी गिफ्ट कर दें तो कैसा रहेगा? यदि किसी की मैरिज एनिवर्सरी में जा रहे हैं तो गिनती के लिहाज से चांदी के उतने मनके ले जाइए। दसवीं एनिवर्सरी है तो चांदी के दस मनके। भई, जितने का लिफाफा पकड़ाएंगे, उतने में ही चांदी के मनके आ जाएंगे। पर ये एसेट हैं, खर्च नहीं होंगे और आपकी उपस्थिति को हमेशा ताजा बनाए रखेंगे। श्रीमतीजी का जन्मदिन तो मनाते ही होंगे। यदि दीवाली में खरीदा जाने वाला सोने का सिक्का उसी दिन खरीद लिया जाए तो? समय से पहले ही दीवाली मन जाएगी। गृहलक्ष्मी खुश तो लक्ष्मी भी खुश। और हां, बुजुर्ग मम्मी पापा के बर्थ-डे में सोने का सिक्का मत दीजिएगा। आप उनके सीनियर सिटिजन एकाउंट में कुछ राशि जमा करा दीजिए। इससे उन्हें तो खुशी मिलेगी ही, उनका आशीर्वाद आपके लिए टैक्स बचत के रूप में फलित होगा। उन्हें उनकी जवानी के दिनों की तस्वीर फ्रेम करा कर जरूर गिफ्ट कीजिए। इससे उन्हें अतिरिक्त खुशी मिलेगी।

अभी तक हमने चर्चा की कि किसे क्या उपहार देना ठीक रहेगा। अब जरा इस पर भी विचार कर लें कि किस प्रकार के गिफ्ट देने से बचना चाहिए। कोई भी ऐसा उपहार जिसमें उपहार प्राप्त करने वाले को अपनी ओर से खर्च करना पड़े, उपयुक्त नहीं माना जाता है। उदाहरण के लिए किसी ऐसी दुकान का १०० रुपए का गिफ्ट वाउचर, जहां २०० रुपए से कम का सामान ही न हो। कोई भी ऐसा फायनेंसियल प्लान जिसमें व्यक्ति फंसा हुआ महसूस करे। उदाहरण के लिए रेकरिंग एकाउंट, जिसमें आपने एक किस्त तो भर दी पर जिसे उपहार दिया वह बेचारा फंस गया। कोई भी ऐसा उपहार न दें, जिसमें व्यक्ति जकड़ जाए और आपको गाली देता फिरे। उदाहरण के लिए क्रेडिट कार्ड का उपहार, जिसके चक्रव्यूह में फंसकर वह हाहाकार कर उठे।

क्रेडिट कार्ड शादी के लड्डू की तरह है, जिसके पास है वह दुखी है और जिसके पास नहीं है वह इसे पाने के लिए लालायित है।

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