अर्थ जगत

ज्वार भाटे के बीच समंदर में तैरने का दुस्साहस

शेयर बाजार में इस समय निवेश किया जाए या नहीं, इसको लेकर पक्के तौर पर कुछ भी कह पाना मुश्किल है। वैश्विक और घरेलू अर्थव्यवस्थाओं से परस्पर विरोधाभासी संकेत मिल रहे हैं। यूरोजोन की हालत पहले की तरह ही डावांडोल है। खबर है कि यूरोजोन के आर्थिक हालात बद से बदतर हो सकते हैं। जिन देशों को दिवालियापन से बचाने के लिए वित्तीय सहायता दी गई थी, उनमें रिकॅवरी के संकेत नहीं दिख रहे हैं। दबी जुबान लोग यह भी कह रहे हैं कि जख्म, जितना बताया जा रहा है, उससे कहीं अधिक गहरा है। दूसरी ओर, विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका भी मंदी के मुंह में समाता जा रहा है। बराक ओबामा के आने के बाद नकदी प्रवाह के तीसरे चरण क्यूई-थ्री के आरंभ किए जाने की बात थी। पर अमेरिका में फिस्कल क्लिफ की चर्चा जोरों पर है। इसका मतलब यह हुआ कि अमेरिका, जिसका वित्तीय घाटा उसके जीडीपी से भी अधिक है, वित्तीय अनुशासन की प्रक्रिया शुरू करेगा। इसके तहत सरकारी खर्चे कम किए जाएंगे और टैक्स की दरें बढ़ाई जाएंगी। यह प्रक्रिया क्यूई-थ्री के विपरीत है। विश्लेषकों का मानना है कि फिस्कल क्लिफ आने के बाद वैश्विक शेयर बाजार को तगड़ा झटका लग सकता है। चीन की अर्थव्यवस्था भी खस्ताहाल है। वहां के वित्तीय सूचक अर्थव्यवस्था की दिशा को लेकर उलझनें पैदा करते हैं।

घरेलू अर्थव्यवस्था में दो धाराएं एक साथ काम कर रही हैं। एक तरफ सरकार ने वित्तीय घाटा कम करने की कवायद शुरू कर दी है। इसके तहत सबसिडी के दवाब को कम करना और नॉन प्लान एक्सपेंडिचर को दस फीसदी तक कम करने की मुहिम शुरू हो चुकी है। सरकार का राजस्व विभाग भी कर संग्रह अभियान चला रहा है। दूसरी ओर चुनावी वर्ष में फूड सेक्योरिटी जैसे प्रावधान सरकार की तिजोरी पर दबाव बना सकते हैं। आरबीआई ब्याज दरें कम करने की कवायद शुरू करेगी या नहीं, इसके बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है। उसकी नजर जितनी महंगाई के स्तर पर है उतनी ही सरकार की वित्तीय अनुशासन प्रणाली पर भी है। जरा सोचिए, ब्याज दरों में कटौती का आकलन करते हुए आपने बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में निवेश करना शुरू कर दिया पर अंतत: ऐसा कुछ नहीं हुआ तो आपका निवेश बुरी तरह प्रभावित होगा। यदि दुनिया भर के बाजारों में गिरावट शुरू हो गई तो आप कहां सर छुपाएंगे। सच पूछिए तो इस समय बाजार में निवेश करना उतना ही जोखिम भरा है जितना कि ज्वार भाटे के बीच समंदर में तैरना।

परस्पर विरोधी संकेतों के मद्देनजर बेहतर तो यह हो कि आप पोर्टफोलियो को दो भागों में बांटें- डिफेंसिव व एग्रेसिव। एग्रेसिव सेक्टर में ब्याज दर संवेदी स्टॉक आएंगे और डिफेंसिव में फार्मा और एफएमसीजी के स्टॉक। पोर्टफोलियो के दोनों हिस्सों में एकबारगी पैसा न लगाएं बल्कि क्रमिक गति से निवेश करें। यदि वैश्विक अर्थव्यवस्था का मूड ठीक रहा तो आपका पोर्टफोलियो दमक उठेगा। यदि नहीं भी रहा तो भी पोर्टफोलियो फार्मा की गोलियां खाकर दुरुस्त बना रहेगा।

मूड की बात चली तो आपको जानकर हैरानी होगी कि व्यक्ति की निवेश पद्धति को उसके वंशानुगत गुण, उसका लालन पालन, उसका मूड, उसके स्वभाव काफी प्रभावित करते हैं। लेकिन इन पर सबसे अधिक प्रभाव डालता है वंशानुगत गुण।

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