अर्थ जगत

ताज्जुब सिंह की मुश्किलें

ताज्जुब सिंह की मुश्किलें समाप्त होने का नाम नहीं ले रही थीं। ऑफिस से लेकर घर तक कोई न कोई उनका पीछा करता रहता था। वह किसी को मना नहीं कर पाते थे। लड़कियों को तो बिलकुल भी नहीं। झूठ बोलना उनकी फितरत में नहीं था। मेहनत के बल पर आगे बढ़े थे, इसलिए विनम्रता उनकी रगों में बस चुका था। एक दिन वह बैंक में पैसा जमा कराने के लिए कतार में खड़े थे। एक भली सी दिखने वाली युवती ने आकर उन्हें नमस्ते किया। उनके चेहरे पर मुस्कान छा गई। उस युवती ने उन्हें समझाया कि वह कतार में खड़ा होकर समय क्यूं बर्बाद कर रहे हैं। कतार में तो वे लोग खड़े होते हैं, जिनके बैंक खाते में मामूली रकम हो। उन्हें तो हाई नेटवर्थ एकाउंट खोलना चाहिए। इस तरह का एकाउंट खोलने के बाद बैंक आने का झंझट ही खत्म। आपको एक मैनेजर दे दिया जाएगा सेवा के लिए। उसे फोन कर दीजिए, घर आकर बैंक के सारे काम कर डालेगा। आप अपना व्यवसाय बढ़ाइए, रिलेशनशिप मैनजर आपकी बैंकिंग जरूरतों का ध्यान रखेगा। इसके लिए एकाउंट में केवल दो लाख रुपए का बैलेंस मेंटेन करना होगा। ताज्जुब सिंह को बड़ा अचरज हुआ। मना करना उनके उसूल के खिलाफ था। इसलिए उन्होंने हाई नेटवर्थ एकाउंट के लिए हामी भर दी।

अगले दिन वही युवती एक एक्जीक्यूटिव के साथ उनके घर आ गई। फार्म भरवाया और एकाउंट खुलवा दिया। ताज्जुब सिंह ने अपने पुराने बैंक के सारे पैसे नए वाले एकाउंट में ट्रांसफर कर दिया। जब कभी बैंकिंग संबंधी कोई भी जरूरत पड़ती, वह रिलेशनशिप मैनेजर को फोन करते और घर बैठे काम हो जाता। कुछ समय बाद वह रिलेशनशिप मैनेजर उनके पास निवेश के लिए तरह-तरह के सुझाव लेकर आने लगा। जब कभी उनके पास आता अपने टार्गेट का रोना रोने लगता। नौकरी चली जाने की बात कहकर उनसे जहां तहां निवेश करवा लेता। ताज्जुब सिंह को निवेश लिखतों की कोई खास समझ नहीं थी। इसलिए वह और भी परेशान हो जाते। कई बार उन्होंने रिलेशनशिप मैनेजर को यह कह कर टालने की सोची कि उनके पास इस समय पैसे नहीं हैं। पर उस मैनेजर के पास तो उनके खाते में जमा रकम की पूरी जानकारी रहती थी। मैनेजर एक नई मुसीबत था उनके लिए। क्या आप भी ताज्जुब सिंह की तरह रिलेशनशिप मैनेजर से परेशान हैं? मेरे पास एक उपाय है इसका।

रिलेशनशिप मैनेजर को टरकाने का सबसे अच्छा तरीका है कि एकाउंट में पैसे ही न रखे जाएं। तो क्या कैश निकालकर घर में रखें? बिलकुल नहीं। आप उस पैसे को दो हिस्से में बांटें। तीन महीने तक यूं ही पड़ी रहने वाली रकम और तत्काल जरूरत की रकम। जो रकम तीन महीने के लिए फ्री हो उसे शार्ट टर्म एफडी में डाल दें और जिस रकम की जरूरत कभी भी पड़ सकती है उसे म्यूचुअल फंड के लिक्विड फंड में डाल दें। शार्ट टर्म एफडी और लिक्विड फंड दोनों ही सेविंग एकाउंट से ज्यादा ब्याज देते हैं। लिक्विड फंड से चौबीस घंटे के भीतर रकम आपके एकाउंट में आ जाता है। कोई एंट्री लोड नहीं। पांच दिन के लॉकइन पीरियड के बाद एक्जिट लोड भी नहीं। अब चाहे आपका रिलेशनशिप मैनेजर आपको फोन करके निवेश के लिए कहे या रिश्तेदार उधार मांगने पहुंचे आप बेधडक़ कह सकते हैं कि एकाउंट में पैसे ही नहीं हैं। न झूठ बोलने का पाप, न बिना सोचे समझे निवेश करने या उधार देने का संकट। कैसा लगा आपको यह विकल्प?

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