अर्थ जगत

निवेश क्षेत्र के नीम हकीम व पूंजी का मातम

जब आपका बच्चा दसवीं में जाता है और उसे साइंस व आट्र्स में से कोई खास स्ट्रीम चुनना होता है तो आप किससे पूछते हैं? आप किसी अनुभवी अघ्यापक से मशविरा करते हैं, उसके क्लास टीचर से सलाह लेते हैं, बच्चे कीरुचि का पता लगाते हैं और बच्चे की पढ़ाई के लिए एक दिशा तय कर देते हैं। यदि आपके घर में कोई बीमार पड़ता है तो आप उसका इलाज नीम हकीम से नहीं बल्कि स्पेशलिस्ट और सुपरस्पेशलिस्ट से करवाते हैं। पर अपनी गाढ़ी कमाई का निवेश करते वक्त आप किसी वित्त विशेषज्ञ से मशविरा करते हैं? हममें से अधिकांश लोग निवेश का निर्णय करते वक्त केवल असाधारण रिटर्न पर नजर रखते हैं और अपनी पूंजी से भी हाथ धो बैठते हैं। कुछ लोग टेलीविजन में आने वाले विशेषज्ञों की राय के आधार पर निवेश करते हैं और पूंजी का मातम मनाते नजर आते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि ये विशेषज्ञ गलत राय देते हैं। आप इनकी राय पर जरूर गौर करें। पर निवेश की योजना व्यक्ति सापेक्ष प्रक्रिया है और समाचार माध्यमों द्वारा प्रसारित निवेश योजनाएं अलग-अलग व्यक्ति की अलग-अलग किस्म की जरूरतों को पूरा नहीं कर सकती हैं।

किसी प्रकार का निवेश करने से पूर्व उसका उद्देश्य तय करना बेहद जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति बैंक निफ्टी सेल कर रहा है तो संभव है उसने निफ्टी खरीद रखा है और अपना पोजीशन हेज कर रहा है। पर आपने टीवी देख कर केवल बैंक निफ्टी बेचने का निर्णय लिया और किसी समाचार के आधार पर बैंक के शेयर भाग चले तो क्या होगा? आप अपनी पूंजी गंवा बैठेंगे। लेकिन यदि आपने किसी फायनेंसियल प्लानर या स्टॉक मार्केट एनालिस्ट की सेवाएं निजी तौर पर ले रखी हैं तो वह व्यक्ति आपको आपकी जरूरत के हिसाब से पूरी प्लानिंग करके देगा। उसे इस बात का अहसास रहेगा कि आपके पोर्टफोलियो में क्या कुछ पड़ा है और उसके साथ कब किस तरह का डिसीजन लेना है।  जिस तरह महारथी डॉक्टर भी अपना ईलाज खुद नहीं करते हैं उसी तरह वित्त जगत की अच्छी खासी जानकारी होने के बावजूद अच्छे निवेशक खुद के लिए निवेश योजना किसी अन्य विशेषज्ञ से तैयार करवाते हैं। आमतौर से स्टॉक मार्केट एनालिस्ट अपनी कंपनी के लिए केवल एनालिसिस का काम करते हैं। निवेश प्रबंधन विभाग में उनकी कोई दखल नहीं हेाती है। साथ ही निवेश प्रबंधन विभाग और डीलिंग रूम को भी एक दूसरे से अलग रखा जाता है। इसके पीछे कई वजहें हैं। हर विभाग अपने काम को लेकर आब्सेस्ड होता है और उसे अपनी गणना सही लगती है। इस तरह निवेश प्रक्रिया में भावुकता का विषाणु प्रवेश कर जाता है। उदाहरण के लिए आप टीवी पर आने वाले विशेषज्ञों की राय के आधार पर शेयर खरीदते तो हैं पर उनके द्वारा बताया गया स्टॉप लॉस व टार्गेट शायद ही कभी फॉलो करते हैं। नतीजतन उनका स्टॉक चयन सही होने के बावजूद आपको नुकसान उठाना पड़ता है। बेहतर तो यह हो कि आप एक बेहतरीन निवेश सलाहकार चुनें और उसके सुझावों पर पूरी तरह अमल करें, वह जिस अनुपात में जहां निवेश करने के लिए कहे, वहां करते चलें। समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो को लेकर उससे जिरह करें। निवेश को उतना ही समय दें जितना कि अपने कैरियर, अपने परिवार और अपने प्रियजनों को देते हैं।

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