अर्थ जगत

मोमेंटम इनवेस्टमेंट के जरिए बनिए मालामाल

मोमेंटम स्टॉक्स के बारे में आपने खूब सुना होगा। आखिर ये हैं क्या बला? वैसे शेयर जो तेज गति से चलते हों, जितनी तेजी से उछलते हों उतनी ही तेजी से गिरते हों,  मोमेंटम स्टॉक्स कहलाते हैं। आम तौर पर मोमेंटम स्टॉक्स मिड कैप और स्मॉल कैप सेगमेंट में पाए जाते हैं। सवाल यह उठता है कि मोमेंटम स्टॉक्स की पहचान कैसे की जाए, उसका फायदा कैसे उठाया जाए। जरा सोचिए, किसी बाजार में आपने बढऩे वाले मोमेंटम स्टॉक्स को खरीदा हुआ है और गिरने वाले मोमेंटम स्टॉक्स को शार्ट सेल किया हुआ है तो कितना फायदा होगा। मोमेंटम स्टॉक्स के जरिए शेयर बाजार में निवेश की पद्धति को मोमेंटम इनवेस्टमेंट कहते हैं।

मोमेंटम इनवेस्टमेंट का आधारभूत सिद्धांत है कि कोई भी स्टॉक यदि तेजी से बढ़ रहा है तो गिरावट से पहले उसकी बढऩे की दर कम हो जाएगी, ठहर जाएगी। इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। यदि कोई कार सवार गाड़ी को मोडऩा चाहता है तो गाड़ी टर्न करने से पूर्व गति धीमी जरूर करेगा। मोमेंटम इनवेस्टर स्टॉक के मोमेंटम पर नजर रखते हैं और उसमें कमी या तेजी को भुनाने की कोशिश करते हैं। पर मोमेंटम में कमी का मतलब यह कतई नहीं है कि स्टॉक की गति का रुख निश्चित रूप से बदल जाएगा। जिस तरह कार सवार गाड़ी को धीमा करने के बाद फिर से एक्सलरेटर दबा कर गाड़ी की दिशा बिना बदले आगे बढ़ सकता है उसी तरह मोमेंटम कम होने के बाद भी स्टॉक का रुझान पूर्ववत बना रहा सकता है।

वस्तुत: मोमेंटम की पहचान के लिए बनाया गया सूचकांक, जिसे मोमेंटम इंडिकेटर कहते हैं, के साथ यदि तकनीकी विश£ेषण के अन्य टूल्स को भी ध्यान में रखें तो बहुत हद तक रुझान का पता लगाया जा सकता है। इस तरह का पहला इंडिकेटर है रेट ऑफ चेंज अर्थात् आरओसी। यदि आरओसी शून्य से ज्यादा है तो स्टॉक का रुझान पोजिटिव है और यदि शून्य से कम है तो स्टॉक का रुझान निगेटिव है। दूसरा संकेतक है ट्रेडिंग वोल्यूम। यदि स्टॉक का ट्रेडिंग वोल्यूम बढ़ रहा है तो समझिए कि मोमेंटम बना हुआ है। मोमेंटम इनवेस्टर हाई वोल्यूम के साथ बढऩे या गिरने वाले स्टॉक में निवेश करना उपयुक्त मानते हैं। तीसरा इंडिकेटर है रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स अर्थात आरएसआई। यह संकेतक बताता है कि स्टॉक में कितना दम-खम बचा है। यह शून्य से १०० के बीच हो सकता है। यदि आरएसआई ७० या उससे अधिक है तो स्टॉक में गिरावट की आशंका बढ़ जाती है और यदि यह ३० या उससे नीचे है तो स्टॉक में उछाल की संभावना बनती है। चौथा इंडिकेटर है मूविंग एवरेज कनवर्जेंस डायवर्जेंस अर्थात एमएसीडी। इसमें दो रेखाएं होती हैं- एमएसीडी लाइन व सिग्रल लाइन। यदि सिग्रल लाइन एमएसीडी लाइन के ऊपर हो तो स्टॉक में बिकवाली का माहौल बन जाता है। उम्मीद है इन संकेतकों को ध्यान में रखते हुए आप भी मोमेंटम इनवेस्टमेंट का लाभ उठा पाएंगे।

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