अर्थ जगत

शेयर बाजार में मशीनी निवेशकों का हडक़ंप

शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले निवेशकों को इन दिनों नई तकनीक से चुनौती मिलने लगी है। तकनीक से लैस विदेशी संस्थागत निवेशक, घरेलू संस्थागत निवेशक और कुछ समृद्ध संस्थागत निवेशक तकनीकी के प्रयोग से बिजली की गति से शेयर बाजार में खरीद फरोख्त के आर्डर प्लेस कर देते हैं। इससे बाजार पलक झपकते छलांग लगाता है और पलक झपकते औंधे मुंह गिर जाता है। चूंकि मशीन सोचता नहीं है बल्कि आर्डर एक्जीक्यूट करता है इसलिए यह सब कुछ त्वरित गति से संपन्न होता है। कुछ मशीन सोचने का काम भी करते हैं, निर्णय भी ख्ुाद लेते हैं और आर्डर भी खुद ही एक्जीक्यूट करते हैं। वहां यह खेल और भी दु्रत गति से संपन्न होता है। मान लीजिए कि किसी मशीन को यह सिखा दिया गया है कि  जब इंडेक्स २०० डीएमए, ५० डीएमए और ५ डीएमए से नीचे आ जाए तो इंडेक्स को बेच दें। यदि आपको मानसिक रूप से यह निर्णय लेना है तो आप सब कुछ तय करने के बाद भी लाभ हानि की बात सोचेंगे, जोखिम का आकलन करेंगे और कुछ देर तक इंतजार करेंगे कि कहीं इंडेक्स ५ डीएमए के ऊपर न आ जाए। पर मशीन इस प्रकार का सोच विचार नहीं करता और ५ डीएमए बेशक महज चंद मिनट के लिए आए, वह आर्डर को एक्जीक्यूट कर देता है। इस तरह की ट्रेडिंग एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग कहलाता है। सवाल यह है कि आम निवेशक इस तरह की ट्रेडिंग की मार से कैसे बचे। पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड सेबी और विभिन्न ब्रोकरेज हाउस इस मसले पर शिद्दत से विचार कर रहे हैं।

मशीन आधारित ट्रेडिंग का मसला इसलिए भी गंभीर है कि सरकार और बाजार नियामक दोनों ही बाजार में आम निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। भारत के अधिकांश ब्रोकरेज हाउस या तो मशीन आधारित ट्रेडिंग कराते नहीं हैं और यदि कराते हैं तो वह अपेक्षाकृत महंगा है। आम निवेशकों के लिए महंगी ट्रेङ्क्षडग अफोर्ड कर पाना संभव नहीं है। वह ब्रोकरेज की महंगी दर और रिसर्च के अभाव से पहले से ही परेशान है। ऐसे में तरीका बचता है परंपरागत तरीकों का। निवेशकों को स्टॉप लॉस लगाने से परहेज नहीं करना चाहिए। स्टॉप लॉस लगाने से लॉस तो होगा पर लॉस की सीमा आप खुद तय कर सकेंगे। आपको पता होगा कि इससे अधिक लॉस नहीं होगा। यदि बाजार में बड़ा पोजीशन ले रखा है तो आप हेज करना नहीं भूलिए। यदि लांग पोजीशन है तो पुट खरीदिए और यदि शार्ट पोजीशन है तो कॉल खरीदकर पोजीशन हेज कीजिए। कई बार पेयरिंग स्ट्रेटजी भी काम करती है। आप कुछ लांग पोजीशन लीजिए तो कुछ शार्ट पोजीशन। यदि आप ऑप्शन सेगमेंट में काम करते हैं तो नेकेड कॉल और पुट लेने से परहेज कीजिए। इसकी जगह आप सिंथेटिक ऑप्शन स्ट्रेटजी पर काम कीजिए। यदि आप नेकेड कॉल या पुट लेकर फंस गए हैं तो उसे फ्यूचर्स से हेज कर लीजिए। यदि आपने ५० पुट ले रखे हैं तो ५० निफ्टी फ्यूचर्स खरीद कर पोजीशन हेज कर सकते हैं। इनमें से हर स्ट्रेटजी अपने आप में तफसील से चर्चा के योग्य है। मैंने तो बस संकेत भर किया है।

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