अर्थ जगत

शॉर्ट टर्म डिपोजिट पर रखें दूर की सोच

समय अवधि की है बड़ी भूमिका

बचत खातों से छोटी अवधि के स्कीम में पैसे को शिफ्ट करने से पहले ग्राहक को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि क्या जिस रिटर्न लक्ष्य के साथ वे इन स्कीमों का चुनाव कर रहे हैं वह संबंधित समय अवधि में उस रिटर्न लक्ष्य को प्राप्त कर पा रहे हैं। यदि आप इस मकसद से पैसे लगा रहे हैं कि आपको 8 से 9 फीसदी का रिटर्न चाहिए तो ये स्कीम (छोटी अवधि) आपके लिए सही नहीं है। आपको लंबी अवधि के फिक्सड डिपोजिट स्कीम में निवेश करना चाहिए। बहुत सारे बैंक 2 से 5 वर्ष की फिक्स्ड डिपोजिट स्कीमों पर 9 से 9.24 फीसदी का ब्याज दे रहे हैं।

चलिए इसे एक गणना के जरिए समझने की कोशिश करते हैं- मान लें आपने एक लाख रुपये लघु अवधि की डिपोजिट स्कीम में लगाया। यहां आपको एक वर्ष की परिपक्वता अवधि में 7.5 फीसदी का ब्याज मिलेगा। इसी रकम को यदि आपने बचत खाते में रहने दिया होता तो आपको सामान्य रूप से 4 फीसदी का ब्याज मिलता। इसका मतलब हुआ कि यदि एक वर्ष की अवधि में बचत खाते से आपको 4 हजार की कमाई हो रही है तो लघु अवधि स्कीमों से 7,500 रुपये की अर्थात 3,500 रुपये की ज्यादा कमाई होगी। अब यह आपको देखना है कि क्या यह 3,500 रुपये आपके लक्ष्यों को पूरा कर रहा है, क्या आप इतनी ही कमाई से खुश हैं?

मनी हनी फायनेंसियल सर्विस के अनूप भैया मानते हैं कि लघु अवधि की डिपोजिट स्कीम कोई निवेश स्कीम नहीं है यह तो एक ऐसा स्कीम है जहां आपके पास यदि अतिरिक्त अमाउंट है तो उसे बचत खाते की बजाय छोटी अवधि की इन डिपोजिट स्कीमों में जमा कर दें। इससे ज्यादा कुछ नहीं तो कम से कम बचत खाते पर मिलने वाले ब्याज से तो ज्यादा ही ब्याज मिल जाएगा। परंतु यदि आप अपने पैसे को एक वर्ष से ज्यादा की अवधि वाले फिक्स्ड डिपोजिट स्कीमों में लगाते हैं तो यह एक तरह से निवेश की तरह होता है जहां आपको अधिक से अधिक रिटर्न मिलेगा।

वहीं बैंकों के लिए लघु अवधि की ये योजनाएं अपने डिपोजिट को बढ़ाने एवं एनआईएम को सुधारने का अच्छा अस्त्र साबित हो रही हैं। आम तौर पर बैंक लघु अवधि की फिक्स्ड डिपोजिट स्कीमों पर ब्याज दर खासकर वित्त वर्ष के अंतिम महीनों (विशेषकर फरवरी से मार्च के बीच) में बढ़ाते हैं ताकि वे अपने डिपोजिट में वृद्धि कर सकें।

हालांकि कॉल मनी मार्केट द्वारा भी इन स्कीमों पर मिलने वाली ब्याज दरें वृहत स्तर पर प्रभावित होती हैं। आमतौर पर अप्रैल से जून के मध्य बैंक कॉल मनी मार्केट की दरों में वृद्धि करते हैं एवं यह 7 से 8 फीसदी के आस-पास रहता है। इसकी वजह से अधिकतर बैंक लघु अवधि की स्कीमों की दरों में भी बढ़ोतरी करते हैं। इस संबंध में भट्ट कहते हैं कि यदि आने वाले महीनों में कॉल मनी मार्केट रेट एवं कर्ज दरों में कमी होती है तो बैंक भी ऐसे डिपोजिट पर मिलने वाले दरों में कटौती करेंगे। विशेषज्ञों की राय एवं तमाम आंकड़ों पर यदि नजर डालें तो यह बात बिल्कुल स्पष्ट नजर आती है कि इन स्कीमों में बिना सोचे समझे पैसे जमा नहीं करनी चाहिए। कोई भी कदम उठाने से पहले इससे जुड़े तमाम पहलुओं पर गौर करने के बाद ही उचित निर्णय लें।

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