उलूक बनने में संकोच मत कीजिए जी


पंडित जी प्रवचन कर रहे थे – धन तो हाथ का मैल है जी। यह समस्त पापों का कारण है। यह व्यक्ति के विवेक का चीर हरण कर लेता है। और विवेकहीन मनुष्य मनुष्य कहां रहा? इसलिए भगवती लक्ष्मी का वाहन उलूक है। हे भक्तों, आप धन के लिए प्रार्थना न करें, आप धर्म के लिए प्रार्थना करें, विवेक के लिए प्रार्थना करें।  पंडित जी का प्रवचन सुनकर मेरे दिमाग का बल्ब जल उठा। यदि भगवती लक्ष्मी की कृपा हासिल करनी है तो उलूक बनना होगा। उलूक की तरह रात में भी जगने की शक्ति हासिल करनी होगी, अपनी बुद्धि को ताक पर रखकर भेड़चाल चलने की कला सीखनी होगी।

क्या आप उलूक बनने को तैयार हैं? संकोच हो रहा है? भई, भगवती लक्ष्मी ने अपना वाहन यूं ही तो नहीं चुना होगा। जरा सोचिए। धन कमाने का सुपर हाईवे कहां है? आपने सही कहा, आनन फानन में धन कमाने का एक ही रास्ता है शेयर बाजार। शेयर बाजार में पैसा कौन कमा पाता है? जो भेड़चाल चलना जानता है। जब हर कोई बिकवाली कर रहा हो, आप भी बिकवाली करने लगिए। जब हर कोई खरीद रहा हो तो आप भी खरीद लीजिए। तकनीकी विश्लेषण क्या है? तकनीकी विश्लेषण वस्तुत: भेड़चाल की दिशा जानने का तरीका है। तकनीकी विश्लेषकों को इस बात का पता चला जाता है कि अब भेड़ों के  झुंड की दिशा क्या होगी। दिशा ज्ञान जिसे जितना पहले हो जाता है, वह उतने फायदे में रहता है। अब आपने मान लिया होगा कि तकनीकी विश्लेषण के लिहाज से उलूक बनने में ही भलाई है। यदि विश्वास नहीं हो तो फायनेंसियल प्लानर्स की राय भी ले ही लीजिए। हर फायनेंसियल प्लानर आपको यही सलाह देगा कि अपने पोर्टफोलियो को लेकर चौकस रहिए, उसकी सतत निगरानी कीजिए, अपनी आंखें खुली रखिए। देखिए उलूक को। वह तो रात में भी जगा रहता है। चौकस रहता है। यदि आप लंबे समय तक सतर्क भाव से निवेश करते रहते हैं तो क्या मिलेगा? कहा जाता है कि यदि कोई उलूक चालीस दिनों तक लगातार जगा रहता है तो वह भविष्यवेत्ता हो जाता है, जो कोई उससे बात करे, उसी की भाषा में उसे सटीक जवाब देता है। मतलब यह की निरंतर अभ्यास से वह भेड़चाल की दिशा जानने में सक्षम हो जाता है और धारा का रुख चाहे कुछ भी हो, बाजार उछाल की भाषा में बात करे या उतार की भाषा में, वह त्वरित प्रतिक्रिया करता है, औरों को हतप्रभ कर देता है। जो निवेशक लंबी अवधि तक सिप के सहारे निवेश करते हैं, उनका पोर्टफोलियो भी उलूक की तरह सिद्ध हो जाता है। वह आपकी जरूरतों को, आपकी मांगों को आपके हिसाब से समय पर पूरा करता है। इसलिए मित्रों, उलूक बनने में कोई हर्ज नहीं है। जरूरत है तो इसे सही स्पिरिट में लेने की। बॉस यदि उल्लू कहे तो मिठाई बांटिए। और यदि दिन भर में बीस लोग उल्लू कहें तो समझ लीजिए कि आपकी किस्मत खुलने वाली है। इन सब को दावत दीजिए। हां, उलूक बनने और उलूक बनाए जाने में फर्क है।

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए khulasaa.in को फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए khulasaa.in को फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें

Leave a Reply