रियल एस्टेट के जरिए दें अपने प्रियजनों को वित्तीय सुरक्षा


विवाहित लोगों के लिए प्रॉपर्टी में निवेश के बड़े व्यापक मायने होते हैं। यदि आप प्रॉपर्टी में निवेश करने की योजना बना रहे हैं तो आपको कुछ व्यावहारिक बातों पर जरूर ध्यान देना चाहिए। अपने किसी संबंधी या दोस्त को देख कर उसका नकल न करें। जरूरी नहीं कि निवेश का जो तरीका वह अपना रहा है वह आपके लिए भी मुफीद हो। अपने बच्चों एवं पत्नी के भविष्य को रियल एस्टेट में निवेश के जरिए सुरक्षित बनाने की योजना काफी कारगर सिद्ध हो सकती है बशर्ते कि इसके तमाम पहलुओं पर गौर करते हुए योजनाबद्ध तरीके से निवेश किया जाए।

टैक्स है महत्वपूर्ण पहलू

रियल एस्टेट सेक्टर में अपनी पत्नी के नाम पर निवेश के फैसले का सबसे सीधा एवं महत्वपूर्ण संबंध आयकर से होता है। एक पति के रूप में आपको इस पहलू को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके अलावा फंड की उपलब्धता भी एक महत्वपूर्ण घटक है। इस बात को सुनिश्चत करें कि प्रॉपर्टी की खरीद के लिए आप अपनी पत्नी को रुपये गिफ्ट के रूप में नहीं दे रहे हैं। यदि आप अपनी पत्नी को प्रॉपर्टी की खरीद के लिए पैसे का योगदान करते हैं तो आयकर प्रावधानों के अनुसार इसे क्लबिंग ऑफ इनकम के मद्देनजर देखा जाएगा। आयकर अधिनियम,1961 की धारा 64 में इस तरह का प्रावधान किया गया है कि यदि कोई विवाहित महिला अपने  पति, ससुर या सास से कोई गिफ्ट प्राप्त करती है एवं संबंधित गिफ्ट से कोई आय अर्जित होता है तो इसे आवश्यक रूप से पति की आय के साथ क्लब (जोडऩा) किया जाएगा।

इसलिए यदि संबंधित महिला अपने पति, ससुर या सास द्वारा दिए गए फंड से प्रॉपर्टी खरीदती है तो उस पर प्राप्त होने वाले किराये संबंधी आय को उस व्यक्ति की आय से जोड़ा जाएगा जिसने गिफ्ट (धन) किया है। क्लबिंग आय की इस बाध्यता से बचने का सीधा तरीका यही है कि प्रापर्टी, पत्नी के नाम से खरीदें एवं पत्नी को पैसे कर्ज के रूप में दें। अर्थात यदि पैसे की कमी हो रही है तो वह (पत्नी) प्रापर्टी की खरीद के लिए अपने पति, ससुर, सास या किसी अन्य व्यक्ति से कर्ज ले सकती है।

पति, ससुर या सास द्वारा कर्ज लेकर महिला यदि प्रॉपर्टी खरीदती है तो उससे (प्रॉपर्टी) अर्जित होने वाली आय का संबंध सिर्फ पत्नी से होगा एवं कर्जदाता का उस आय से कोई लेना देना नहीं होगा। पर एक बात हमेशा ध्यान रखें कि कर्ज की राशि पर पत्नी को उचित ब्याज भी चुकाना होगा। हालांकि संबंधित महिला (पत्नी) को इस बात की इजाजत है कि वह बिना ब्याज का कर्ज किसी अन्य व्यक्ति से ले सकती है।

पत्नी द्वारा इस मद में किए गए निवेश से उसे हाउसिंग लोन पर लगने वाले ब्याज के एवज में प्रति वर्ष 150,000 रुपये तक की छूट (अलग से) मिल सकती है। इसके अलावा आयकर अधिनियम,1961 की धारा 80सी के तहत उसे हाउसिंग लोन के रीपेमेंट के मद्देनजर कर देयता के मामले में 1 लाख रुपये तक की छूट मिल सकती है। हालांकि, हाउसिंग लोन के रीपेमेंट के मद्देनजर कर छूट का लाभ उसी सूरत में मिलता है जब लोन बैंक एवं कंपनी (जहां ग्राहक कार्यरत है) जैसे कुछ चुनिंदा संस्थानों से लेते हैं।

संयुक्त रूप से खरीदें प्रॉपर्टी

पति-पत्नी चाहें तो कोई सिंगल प्रॉपर्टी संयुक्त रूप से भी खरीद सकते हैं। हालांकि जहां तक टैक्स प्लानिंग की बात है तो निश्चित रूप से प्रॉपर्टी को पति, पत्नी एवं परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर खरीदना चाहिए। क्योंकि हाउसिंग लोन पर लगने वाले ब्याज की रकम बहुत ज्यादा होती है। संयुक्त रूप से प्रॉपर्टी खरीदने की रणनीति का सबसे बड़ा फायदा यही होगा है कि इस पर हाउसिंग लोन एवं हाउसिंग लोन की अदायगी पर प्रत्येक (सदस्य) को अलग-अलग आयकर में छूट मिलेगा।

स्थाई खाता संख्या लेना न भूलें

हम अपने पाठकों को यह भी सलाह देंगे कि जब कभी अपनी पत्नी के नाम पर प्रॉपर्टी खरीदने की योजना बनाएं खासकर तब जब वह कोई कमाई नहीं करती हैं एवं उनकी अपनी कोई संपत्ति भी नहीं है तो यह बेहतर होगा कि उनका पैन ले लें। वैसे सभी लोग जो वित्तीय सुरक्षा के मद्देनजर अपनी पत्नी के नाम पर प्रॉपर्टी खरीदने का फैसला करते हंै एवं यदि प्रॉपर्टी पूरी तरह से पति द्वारा दिए गए पैसे से ही खरीदी जाती है  तथा  संबंधित प्रॉपर्टी से कोई आय नहीं हो रही है तो उस पर धारा 64 के तहत आय के क्लबिंग का प्रावधान लागू नहीं होगा। यह रणनीति खासकर तब ज्यादा कारगर सिद्ध होती है जब आप पहली प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं।

यदि आपने अपनी पत्नी के नाम का पैन लिया फिर उनके नाम पर प्रॉपर्टी खरीदी जबकि उनकी आय का कोई स्रोत नहीं है अर्थात वह कोई कमाई नहीं करती है, ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि क्या उन्हें इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना होगा? एक बात का हमेशा ध्यान रखें कि महज स्थाई खाता नंबर (पैन) ले लेने भर से कोई रिटर्न फाइल करने हेतु बाध्य नहीं हो जाता यदि वह कोई कमाई नहीं कर रहा है।

पत्नी को दें नियमित आय की सौगात

यदि आप अपनी पत्नी को स्थाई रूप से वित्तीय सुरक्षा देने के उद्देश्य से प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं एवं यह भी चाहते हैं कि इससे उसे एक निश्चित आय प्राप्त होती रहे तो आपको उनके नाम से व्यासायिक या आवासीय प्रॉपर्टी खरीदनी चाहिए। क्योंकि इससे उन्हें नियमित रूप से किराये के रूप में कमाई होती रहेगी। पत्नी के नाम पर खरीदी की गई संबंधित प्रॉपर्टी से हुई किराये संबंधी (रेंटल इनकम) आय को पत्नी की आय के रूप में देखा जाएगा (हालांकि इसके लिए आपको उन दिशा निर्देशों का पालन करना होगा जिसका जिक्र हमने ऊपर किया है)।

पत्नी के नाम से प्रॉपर्टी खरीद कर इसे किराये पर दे देने से पत्नी को नियमित रूप से रेंटल इनकम होती रहेगी एवं इस इनकम पर 30 फीसदी की विशेष कर छूट का भी लाभ मिलेगा अर्थात कुल मिलाकर कम टैक्स अदा करनी पड़ेगी।

वसीयत का भी लें सहारा

इसके अलावा यदि आप रियल एस्टेट के माध्यम से अपनी पत्नी के भविष्य को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो ऐसा आप उनके पक्ष में स्पष्ट रूप से वसीयत निर्माण के जरिए भी कर सकते हैं। वैसे प्रत्येक व्यक्ति को अपने उत्तराधिकार संबंधी मसलों को सुलझाने एवं उचित बंटवारे के मद्देनजर सही समय पर वसीयत निर्माण अवश्य करानी चाहिए।

बच्चों की सुरक्षा भी है अहम

रियल एस्टेट के जरिए पत्नी को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के अलावा आप अपने बच्चों के भविष्य को भी सुरक्षित बना सकते हैं। यदि बच्चे बालिग हो गए हैं तो उन्हें  अपनी वर्तमान संपत्ति (जितना आप चाहें) उनके नाम पर गिफ्ट कर सकते हैं या उनके नाम से प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं, इस पर आयकर अधिनियम का क्लबिंग प्रावधान लागू नहीं होगा। प्रत्येक व्यक्ति को अपने परिवार के किसी अन्य सदस्य के नाम पर कम से कम एक प्रॉपर्टी अवश्य खरीदनी चाहिए। हालांकि यह थोड़ा जटिल सुझाव है परंतु तर्कसंगत एवं न्यायोचित योजना के तहत इसे मूर्त रूप दिया जा सकता है।

यदि बच्चा हो नाबालिग

जहां तक नाबालिग बच्चों का सवाल है यदि आप उन्हें प्रॉपर्टी गिफ्ट करते हैं या अपने पैसे से उनके नाम पर प्रॉपर्टी खरीदते हैं तो उससे होने वाली आय को आपकी आय के तौर पर देखा जाएगा। वैसे मैं उन सभी लोगों, जो अपने नाबालिग बच्चे के नाम पर प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं, को सुझाव देना चाहता हूं कि वे अपने बच्चे के नाम पर सौ फीसदी लाभार्थी ट्रस्ट का निर्माण करें।

दिलचस्प बात यह है कि ट्रस्ट निर्माण के बाद संबंधित प्रॉपर्टी से प्राप्त हुई आय को माता या पिता की आय के साथ क्लब नहीं किया जाता है। इसलिए हमारी सलाह है कि अपने नाबालिग बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए यदि आप प्रॉपर्टी में निवेश करना चाहते हैं तो उनके नाम पर ट्रस्ट का निर्माण करें जिसका पूर्ण बेनिफिशयरी आपका बच्चा ही हो।

प्रॉपर्टी, पत्नी व टैक्स

प्रापर्टी की खरीद के लिए पत्नी को पैसे गिफ्ट न करें अन्यथा प्रॉपर्टी से हाने वाली आय आपकी आय में क्लब हो जाएगी।

प्रापर्टी की खरीद के लिए पत्नी को कर्ज दें क्योंकि उन्हें टैक्स में छूट मिलेगी और आपकी आय में केवल ब्याज ही क्लब होगा।

सिंगल प्रॉपर्टी को पति व पत्नी ज्वाइंट रूप से खरीदें। इससे एक ही प्रॉपर्टी पर दोनों को टैक्स का लाभ मिल जाएगा।

पत्नी के नाम पर प्रॉपर्टी खरीदकर उसे किराए पर दें। ऐसा करने से उन्हें नियमित रेेंटल इनकम के साथ-साथ ३० फीसदी की विशेष कर रियायत भी मिलेगी।

नाबालिग बच्चे के नाम पर ट्रस्ट बनाएं। इससे बच्चे को तो लाभ होगा ही, आपकी आय में किसी प्रकार की क्लबिंग नहीं होगी।

 

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