अर्थ जगत

बाढ़ भी नहीं फेर पाएगी खुशियों पर पानी

रमेश जैन अरुणाचल प्रदेश के एक निजी कंपनी में काम करते थे। दस वर्षों की नौकरी के बाद उन्होंने हमेशा के लिए वहीं रहने का मन बना लिया। अपनी मेहनत की कमाई से उन्होंने एक अच्छा सा घर बनवाया। अपने पसंद की हर चीज उसमें लगवाई। एक दिन उनके एक दोस्त ने बाढ़ के खतरे को ध्यान में रखते हुए उन्हें होम इंश्योरेंस पॉलिसी लेने की सलाह दी। परंतु रमेश ने अपने दोस्त की बात को अनसुना कर दिया। पिछले वर्ष उस इलाके में भारी बारिश हुई एवं बाढ़ जैसे हालात उत्पन्न हो गए। घर में पानी घुस आने की वजह से उन्हें कुछ दिनों के लिए अलग (घर छोडक़र) रहना पड़ा। जब बाढ़ का पानी कम हुआ तो रमेश अपने घर की स्थिति देखकर परेशान हो गए। बाढ़ की वजह से मकान को काफी क्षति पहुंची थी। जाहिर है रमेश के पास यदि बीमा होता तो उन्हें मरम्मत की चिंता नहीं होती।

बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा से खुद को बचाना एवं बचाव संबंधी पूर्व तैयारी करना जरूरी है। इसलिए ऐसे लोग जो बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहते हैं उनके लिए बहुत आवश्यक है कि वे इससे बचने की पूर्व तैयारी कर लें। यह तैयारी कई स्तरों पर हो सकती है। अपने घर एवं सामान की सुरक्षा के लिए इसका बीमा करा लेना सबसे समझदारीपूर्ण निर्णय हो सकता है। हालांकि, भारत में बाढ़ बीमा जैसी पॉलिसियां बहुत प्रचलित तो नहीं हैं (या यूं कहें अलग से पॉलिसी ही नहीं है) परंतु वह आपको मुश्किल के वक्त बेहद मदद करेंगी। देश में बाढ़ बीमा के बारे में एक आम धारणा बनी हुई है कि इसका संबंध फसल एवं अन्य कृषि कार्यों से होगा। परंतु यह सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। ग्राहक बाढ़ आने की सूरत में अपने घर एवं उसमें रखे सामानों के लिए बीमा पॉलिसी भी ले सकते हैं। हालांकि, भारत में बाढ़ बीमा जैसी कोई विशेष पॉलिसी तो नहीं है परंतु इससे संबंधित बीमा, होम इंश्योरेंस, फायर इंश्योरेंस एवं मोटर इंश्योरेंस के तहत ही किया जाता है।

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Title: insurance in flood risk areas in Hindi  | In Category: अर्थ जगत arth jagat

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