क्या होती है महंगाई: महंगाई से जुड़ी अहम बातें


महंगाई और महंगाई दर आखिर क्या है ?

किसी वस्तु और सेवा की कीमत में होने वाली वृद्धि को महंगाई कहा जाता है और महंगाई को महीने या साल के सापेक्ष प्रतिशत में मापा जाता हैं, जिसे महंगाई दर कहते है | मान लो कोई वस्तु साल भर पहले 50  रुपये में मिल रही थी, परन्तु अब वस्तु का भाव बाज़ार में 100 रुपये हो गया है तो वस्तु की  वार्षिक महंगाई दर पांच फीसदी मानी जाएगी |

समय के साथ मुद्रा का महत्व कम होना ही महंगाई से होने वाला सबसे बड़ा नुकसान है | महंगाई का अधिक होना किसी देश की अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह होता है, इसलिए सरकार और केंद्रीय बैंक ऐसी नीतियाँ तैयार करते है जिनके जरिये महंगाई पर control किया जा सके | विभिन्न एजेंसियों और सूचकांकों के जरिए सरकार महंगाई का मापन कर महंगाई दर निश्चित करते है | खुदरा मूल्य सूचकांक (सीपीआई) से आम जन-जीवन क्षेत्र की महंगाई मापी जाती है, तो कारोबारी क्षेत्र की महंगाई को मापने के लिए थोक महंगाई सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) होता है | किसी महीने के सीपीआई और डब्ल्यूपीआई के आंकड़ों को उससे अगले महीने की क्रमश: 12 और 14 तारीख को जारी किया             जाता है |

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खुदरा मूल्य सूचकांक का प्रकाशन केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) करता है, जो केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सांख्यिकी विभाग के तहत काम करता है | इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) भी सांख्यिकी विभाग में आता है | खुदरा महंगाई के आंकड़ों का विश्लेषण और उसका प्रकाशन भले ही सीएसओ करता है, पर आंकड़ों को इकट्ठा करने का काम एनएसएसओ करता है | अधिकारी बाजार में जाकर अलग-अलग चीजों की कीमतों का मिलान भी करते हैं ताकि आंकड़ों में किसी प्रकार की कोई गलती न रहे | हर महीने केंद्र सरकार द्वारा औद्योगिक, कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के लिए भी खुदरा महंगाई के आंकड़े जारी किये जाते है, परन्तु इन सूचकांकों का प्रकाशन केंद्रीय श्रम ब्यूरो द्वारा किया जाता है |

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दूसरी तरफ डब्ल्यूपीआई का प्रकाशन औद्योगिक नीति और संवर्द्धन विभाग (डीआईपीपी) के आर्थिक सलाहकार कार्यालय द्वारा होती है, जो केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के तहत आती है | सामान्य और खाद्य (सीएफपीआई) उपभोक्ता मूल्य सूचकांक,  सीपीआई के आंकड़ों को दो हिस्सों में बांटकर सीएसओ हर महीने इसे  प्रकाशित करता है |

विनिर्माण, प्राथमिक और ईंधन, थोक मूल्य सूचकांक में तीन समूह हैं और इसे तैयार करने के लिए कुल 697 वस्तुओं से जुड़ा आंकड़ा इक्कठा किया जाता है | डब्ल्यूपीआई में सबसे बड़ी भागीदारी विनिर्माण क्षेत्र की होती है, जो 64 फीसदी होती है | वहीं प्राथमिक वस्तुओं का भार 23 फीसदी, ईंधन का करीब 13 फीसदी, 564 उत्पादों में रसायन, धातु और खाने-पीने के सामान, प्राथमिक समूह में खाद्य, अखाद्य और खनिज उत्पादों से जुड़ी 117 चीजें, ईंधन वाले समूह में तेल, बिजली और कोयला क्षेत्र के 16 उत्पाद रखे गए हैं |

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महंगाई की मौजूदा हालत का पता सरकार को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों से चलता है | इसके पश्चात ही सरकार मूल्य स्थिरता के लिए नीतियां और कार्यक्रम बनाती है | जबकि सीपीआई के आंकड़ों से ही हर छह महीने में घोषित होने वाले महंगाई भत्ते का निर्धारण भी इसी आधार पर होता है | सरकार अपनी कारोबारी, वित्तीय और अन्य आर्थिक नीतियां तय करने से पूर्व थोक मूल्य सूचकांक के आंकड़ों का विश्लेषण कर करती है व व्यापारी इन आंकड़ों से अंदाजा लगाते हैं कि मूल्य दर में कितना अंतर आया, जिससे वो अपने व्यापारिक सौदों को अंजाम देते है |

जर्मन विद्वान लैसपीयर के सूत्र से इन दोनों सूचकांकों की गणना की जाती है | इसके लिए सूचकांक में शामिल विभिन्न मदों के मौजूदा और आधार वर्ष की कीमतों की जानकारी अलग-अलग एकत्र करने के बाद हर मद के मौजूदा मूल्य में आधार वर्ष के मूल्य से भाग देते है, जिससे पता चलता है कि किसी चीज का मौजूदा मूल्य पिछले वर्ष की तुलना में कितना गुना हो गया है | प्राप्त हुए अनुपातों को हर मद के लिए पहले से तय ‘भार’ से गुणा करने के बाद आंकड़ों को जोड़ दिया जाता है, इसके पश्चात जो राशी प्राप्त होती है, वही मौजूदा वर्ष का मूल्य सूचकांक कहलाती है |

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