संभल कर चलें वरना नाम गुम जाएगा


म्यूचुअल फंड की दुनिया में भांति-भांति के फंड हैं मसलन डायनैमिक फंड, एथिकल फंड, कॉन्ट्रा फंड, ग्लोबल फंड, अपॉच्र्युनिटी फंड आदि-आदि। क्या कभी आपने इन फंडों के अनूठे नामों पर गौर किया है एवं इसके मतलब को समझने की कोशिश की है? ये नाम वैसे तो काफी आकर्षक लगते हैं एवं आपकी सोच पूरी तरह प्रभावित भी करते हैं लेकिन इन आकर्षक नामों के पीछे छुपे खेल को जानने की कोशिश शायद ही आपने की हो? क्या डायनैमिक फंड वास्तव में डायनैमिक होता है? आखिर कौन सी बात है जो किसी फंड को एथिकल (नैतिक) बनाती है? उसी तरह कॉन्ट्रा फंड का क्या मतलब है?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि एसेट मैनेजमेंट कंपनियों द्वारा ऐसे नामों का सहारा क्या सिर्फ निवेशकों को लुभाने के लिए लिया जाता है या फिर फंड के नाम एवं इसके उद्देश्यों के बीच कोई गहरा संबंध भी होता है?

आकर्षक होता है नाम का खेल

फंड के नाम पर विस्तार से चर्चा करने से पहले हमें निवेश उद्देश्यों के अर्थ को ठीक से समझने की जरूरत है। आमतौर पर किसी भी फंड का निवेश उद्देश्य तय किया गया वह लक्ष्य होता है जिसका विवरण स्पष्ट रूप से संबंधित फंड के ऑफर डाक्युमेंट में लिखा होता है। इसमें फंड के एसेट एलोकेशन पैटर्न, जिस सेक्टर पर फोकस किया जाएगा, निवेश रणनीति एवं रिस्क-रिटर्न मैट्रिक्स आदि का जिक्र होता है। ये बातें किसी भी फंड के लिए काफी महत्वपूर्ण होती हैं। फंड के निवेश उद्देश्यों के अंतर्गत इस बात को भी रेखांकित किया जाता है कि संबंधित फंड ग्रोथ या इक्विटी स्कीम है, इनकम या डेट स्कीम है, बैलेंस्ड स्कीम या इंडेक्स फंड है।

आदर्श तरीका तो यही है कि फंड के नाम के साथ उसके निवेश उद्देश्यों का भी मेल  होना चाहिए। लेकिन बहुत सारे मामले में फंड के नाम एवं उसके निवेश उद्देश्यों का कोई मेल नहीं होता। आइए इसे कुछ उदाहरणों के जरिए समझने की कोशिश करते हैं।

रेलिगेयर एजाइल-जी: आप देख रहे हैं कि फंड का नाम कितना आकर्षक है। यह अपनी तेजी एवं स्फूर्ति को दर्शा रहा है परंतु क्या वास्तव में इसका निवेश उद्देश्य ऐसा ही है? बात जब निवेश उद्देश्य की होती है तो आप पायेंगे कि इसके नाम एवं उद्देश्य में काफी भिन्नता है। फंड के निवेश उद्देश्यों के मुताबिक फंड पैसिव पोर्टफोलियो में निवेश के जरिए पूंजी में बढ़ोतरी करने का लक्ष्य रखता है। सितंबर 30, 2012 तक इस फंड का 99.61 फीसदी एसेट इक्विटी में आवंटित किया गया था। इसलिए एक तरफ तो फंड का नाम एजाइल (स्फूर्ति, तेज) है परंतु इसका निवेश उद्देश्य बिल्कुल इसके नाम के उलट है एवं यह पैसिव स्टॉक में निवेश करता है।

दूसरी तरफ यदि आप संबंधित फंड के सेक्टर चयन की बात करेंगे तो देखेंगे कि कुल एसेट का 18.84 फीसदी कंस्ट्रक्शन में, 17.66 फीसदी एफएमसीजी में,17.21 फीसदी हेल्थकेयर,17 फीसदी तकनीकी क्षेत्र, 9.74 फीसदी ऑटो जबकि 9.62 फीसदी फायनेंसियल एवं 9.44 फीसदी डावर्सिफायड सेक्टर में निवेश किया गया है।

अब आईसीआईसीआई प्रू टार्गेट रिटर्न रिटेल-जी का उदाहरण लीजिए। देखने एवं सुनने में तो यह फंड भी काफी आकर्षक लग रहा है। नाम के अनुसार ऐसा लग रहा है कि यह फंड रिटेल कंपनियों में निवेश करता होगा। लेकिन जब आप फंड के निवेश लक्ष्यों पर नजर डालेंगे तो सच्चाई कुछ और नजर आएगी। फंड के निवेश लक्ष्य में जानकारी दी गई है कि कंपनी कैपिटल एप्रेसिएशन के लिए बीएसई 100 इंडेक्स में निवेश करती है। उसी तरह यदि आप इस फंड के सेक्टर चयन पर नजर डालेंगे तो आश्चर्य से आपकी आंखें खुली की खुली रह जाएंगी। क्योंकि अक्टूबर 31, 2012 तक फंड के कुल सेक्टर आवंटन पैटर्न में कही भी अलग से रिटेल सेक्टर को शामिल नहीं किया गया है। फंड के कुल एसेट का करीब 56-57 फीसदी फायनेंसियल, एनर्जी एवं एफएफसीजी पर ही केंद्रित (वैल्यू रिसर्च के आंकड़ो के अनुसार) किया गया है।

वही हाल मॉर्गन स्टेनली एसीई-जी फंड का है। इस फंड के यदि निवेश लक्ष्यों पर नजर डालेंगे तो आप पायेंगे कि यह इक्विटी एवं इक्विटी संबंधित सिक्युरिटीज के  डायवर्सिफाइड एवं एक्टिव पोर्टफोलियो के दम पर लंबी अवधि में नियमित कैपिटल ग्रोथ का लक्ष्य रखती है लेकिन नाम इसके निवेश लक्ष्यों के बिल्कुल उलट कहानी कहता है। एसीई का मतलब है एक्रॉस कैपिटलाइजेशन इक्विटी। जबकि 31 अक्टूबर 2012 तक फंड के कुल एसेट का 48 फीसदी फोकस फायनेंसियल, हेल्थकेयर एवं एफएमसीजी सेक्टर पर ही है।

यूटीआई ऑप्च्र्युनिटी-जी फंड इसी कड़ी में एक अगला नाम है। यह फंड मुख्य रूप से इक्विटी शेयर एवं इक्विटी संबंधित इंस्ट्रूमेंट में निवेश के जरिए कैपिटल एप्रेसिएशन के उद्देश्यों को पूरा करना चाहती है। लेकिन इस फंड का करीब 50 फीसदी एसेट मुख्य रूप से फायनेंसियल, एफएमसीजी एवं एनर्जी सेक्टर में लगा हुआ है।

इसी तरह के कई ऐसे फंड हैं जिनके नाम से उनके निवेश लक्ष्यों का कोई लेना देना नहीं है। वे नाम सिर्फ निवेशकों को लुभाने के लिए होते हैं जबकि फंड का फोकस कहीं और होता है।

कुछ नहीं होता है असाधारण

इस मसले पर विशेषज्ञों की सलाह यही है कि निवेशक आंख मूंदकर सिर्फ फंड के नाम के आधार पर ही निवेश न करें। एक निवेशक के तौर पर आपको संबंधित फंड के बारे में सारी जानकारी एकत्रित करनी चाहिए। फंड से जुड़े तमाम पहलू की जांच करनी चाहिए। हर तरह से संतुष्ट होने के बाद ही इसमें निवेश का फैसला करना चाहिए। आमतौर पर निवेशक इन लुभावने नामों के चक्कर में फंसकर बेहतर रिटर्न की चाहत में ऐसे फंड में निवेश कर देते हैं परंतु बाद में पता चलता है कि यह फंड भी तो आम फंड जैसा ही है। इसमें कुछ भी ऐसा नया नहीं है जो इसे असाधारण बनाए।

माना जाता है कि एक डायनैमिक फंड या अपॉच्र्युनिटी फंड निवेश के लिए लार्ज कैप या मिड कैप तक सीमित नहीं होता है। एथिकल फंड आमतौर पर शरिया कानूनों को मानने वालों के लिए है। वहीं कॉन्ट्रा फंड कंटे्ररियन तरीकों को अपनाता है एवं यह एक वैश्विक फंड है जो कि विदेशी सूचीबद्ध कंपनियों में निवेश का मौका देता है। उसी तरह माना जाता है कि वैल्यु फंड कम वैल्युएशन वाले शेयरों का ही चुनाव करते हंै।

लेकिन आमतौर पर देखा यह जाता है कि फंड अपने नाम के अनुसार निवेश के पैटर्न को फॉलो नहीं करते हैं।

ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स, मुंबई के सर्टिफायड फाइनेंसियल प्लानर एवं मैनेजिंग डायरेक्टर पंकज मैथपल का कहना है कि फंडों के नाम आमतौर पर उसके उद्देश्यों एवं निवेश लक्ष्यों के बिल्कुल उलट होते हैं। इसलिए एक निवेशक को किसी फंड में निवेश करने से पहले संबंधित स्कीम के ऑफर डॉक्युमेंट का अध्ययन ठीक से करना चाहिए एवं पहले ही सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि फंड का पोर्टफोलियो उसके लक्ष्यों को पूरा करने में सफल होगा या नहीं।

सेक्टर फंड भी उत्पन्न करता है भ्रम

जहां तक सेक्टर फंड की बात है तो इसके एसेट एलोकेशन पैटर्न एवं नाम में भी काफी विरोधाभास होता है। पाठकों को बताते चलें कि सेक्टर फंड ऐसा फंड होता है जो ऐसे शेयरों में निवेश करता है जो कुछ विशेष सेक्टर के अंतर्गत आते हैं। यह फंड वैसे निवेशकों के लिए बेहतर होता है जो किसी एक सेक्टर विशेष में ही निवेश करना चाहते हैं।

सेक्टर फंड के नाम एवं निवेश लक्ष्यों के बीच अंतर को समझने के लिए उदाहरणों पर गौर फरमायें- जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर फंड। नाम से तो यह आभास हो रहा है कि यह फंड सिर्फ सडक़ें, पुल, ऊर्जा आदि संबंधित अन्य संयत्रों में निवेश करता होगा लेकिन यदि फंड के ऑफर डॉक्युमेंट को देखेंगे तो पायेंगे कि यह फंड कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रहता बल्कि शेयर बाजार में बड़े पैमाने पर निवेश करता है। मसलन इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तरकश में बैंकिंग एवं फायनेंसियल सेक्टर के तीर भी हो सकते हैं। उसी तरह रिलायंस डायवर्सिफायड पावर सेक्टर फंड के पोर्टफोलियो में बैंकिंग स्टॉक भी होते हैं। कहने का मतलब है कि सेक्टर के नाम के इतर भी फंडों के पोर्टफोलियो में अलग-अलग तरह के स्टॉक होते हैं। इसलिए निवेशकों को हमारी सलाह है कि सेक्टर फंडों में आंख मूंदकर निवेश करने से पहले एसेट मैनेजमेंट कंपनी द्वारा घोषित चेतावनी एवं शर्तों को जरूर पढ़ें।

निवेशक सिर्फ फंड के नाम के आधार पर ही फंड का चुनाव न करें। आपका निवेश सिर्फ फंड के नाम के आधार पर नहीं बल्कि उसकी प्रकृति, वास्तविकता, आपके लक्ष्य एवं रणनीतियों के आधार पर होना चाहिए।

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