प्रेमचंद रायचंद ने किया था बंबई स्टॉक एक्सचेंज में सबसे पहला घोटाला


1987 में न्यूयॉर्क stock exchange पर आधारित हॉलीवुड में एक फिल्म आई थी, जिसका नाम ‘वाल स्ट्रीट’ था | माइकल डगलस इस फिल्म के प्रमुख अभिनेता थे, इस फिल्म में उनके किरदार का नाम गॉर्डोन गेक्को था, जो stock market का सबसे बड़ा खिलाड़ी होता है | माइकल डगलस ने अपने लाजवाब अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का ऑस्कर पुरुस्कार जीता था | फिल्म के एक दृश्य में गॉर्डोन गेक्को कहता है कि लालच करना अच्छा होता है और ये फिल्म का सबसे  बेहतरीन दृश्य बन जाता है |

मुंबई stock exchange, एशिया का पहला stock exchange था, जिसकी स्थापना नौ जुलाई, 1875 को हुई | उस वक़्त इसे नेटिव शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग एसोसिएशन कहा जाता था | इसके संस्थापकों में प्रेमचंद रायचंद सबसे ज्यादा प्रसिद्ध थे, जो ‘कपास किंग’ के नाम से प्रसिद्ध थे | 1792 में न्यूयॉर्क stock exchange की स्थापना हुई थी |

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इन दोनों stock एक्सचेंजों के खुलने में काफी समानताएं थी, जैसे 24 दलालों ने मिलकर एक समझौता किया, यह समझौता Butan wood नाम के एक पेड़ के नीचे बैठकर किया गया था जिस कारण इस समझौते को ‘Butan wood समझौता’ भी कहा जाता है | ठीक ऐसे ही प्रेमचंद रायचंद और अन्य 21 व्यापारियों ने एक केले के पेड़ के नीचे बैठकर इसकी शुरुवात की थी | जहाँ न्यूयॉर्क stock exchange वाल स्ट्रीट के नुक्कड़ पर स्थित है, तो भारत में मुंबई stock exchange का भी वास्ता भी स्ट्रीट से जुड़ता है, जिसे ‘दलाल स्ट्रीट’ कहते हैं |

स्टॉक मार्केट में Public Ltd. कंपनियां रजिस्टर्ड होती हैं, जो बाज़ार से आईपीओ के ज़रिये पैसा उठाती हैं या यहाँ शेयरों की खरीद-फ़रोख्त होती है | sensex को भारतीय शेयर बाजार की नाड़ी माना जा सकता है, इसकी शुरुवात 1986 में की गयी थी | sensex में भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों का प्रतिनिधिव करने वाले बड़े और सक्रिय शेयरों में से ऐसे 30 शेयर शामिल किये जाते हैं | इनके भावों के हिसाब पर ही सेंसेक्स का उतार-चढाव निर्भर करता है |

स्टॉक मार्केट को लेकर लोगों के मन में व्याप्त गलत धारणाएं

इस वक़्त देश में कम से कम 15 लाख रजिस्टर्ड कंपनियां हैं, जबकि उनमे से मुंबई stock exchange में सिर्फ पांच हज़ार ही रजिस्टर्ड हैं | मार्च 2017 में जारी आंकड़ों के अनुसार इसका बाज़ार पूंजीकरण तकरीबन 110 लाख करोड़ है जिस वजह से इस समय यह दुनिया का ग्यारहवां सबसे बड़ा stock market है | अक्टूबर 2013, stock market में उस वक़्त चमत्कार हुआ, जब यहां एक सौदा छह माइक्रो सेकंड (एक सेकंड का छठा हिस्सा ) में हुआ था और देखते ही देखते ये दुनिया का सबसे तेज़ स्टॉक मार्केट बन गया था |

सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 12 फीसदी की हिस्सेदारी मुंबई स्टॉक एक्सचेंज में होने वाले व्यापार की होती है | किसी देश की अर्थव्यवस्था का बैरोमीटर शेयर बाजार होता है | यह एक उतार-चढ़ाव का खेल है, जिसमे कई कारक शामिल होते हैं |

शेयर बाजार व्यापारिक, राजनैतिक,  मौसम और मौसम के कारण फ़सलो की होने वाले फायदे- नुकसान का खेल है | आज के दौर में कंपनियां विश्व स्तर पर कार्य कर रही है जिस वजह से दुनिया भर के शेयर बाज़ार एक-दूसरे से जुड़ गए हैं | यही कारण है कि अमेरिका के शेयर बाज़ार का असर हिंदुस्तान के शेयर बाज़ार पर भी दिखायी देता है |

शेयर बाजार को जाने और मुनाफा कमाएं

रघुराम राजन, भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर के अनुसार लगभग हर अर्थव्यवस्था में मंदी का कारण राजनैतिक होता है | पहले विश्व युद्ध के बाद अमेरिका में मंदी का दौर आया था, इसके बाद 28 अक्टूबर, 1929 को न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज बुरी तरह से गिर गया था जिसमे शेयर धारकों के तीन हज़ार करोड़ डॉलर डूब गए थे |

व्यापारिक तेज़ी और मंदी स्टॉक मार्किट के दो सबसे बड़े पहलू हैं | खरीदने वाले को बुल (बैल) तथा मंदी में बेचने वाले को बेयर (भालू) कहा जाता है | लोकल भाषा में इन्हें तेजड़िया या मंदड़िया कहा जाता है |

प्रेमचंद रायचंद ने मुंबई स्टॉक एक्सचेंज में पहला घोटाला किया था | 1861 में अमेरिका के गृह युद्ध की वजह से ब्रिटेन की मिलों को कपड़ा भारत से जाने लगा, जिसके कारण रायचंद की कंपनी बेकबे रिक्लेमेशन के शेयर दिनों-दिन महंगे होने लगे | इनकी खरीद फरोख्त वायदा व्यापार के द्वारा की जाती थी,  बैंक ऑफ बॉम्बे इसके लिए पैसे जुटाने का कार्य करता था | इसके अतिरिक्त अन्य बड़े बैंको पर भी रायचंद का नियंत्रण था | रायचंद ने अपने नाम का इस्तेमाल करके शेयरो को अधिक से अधिक मूल्य पर बिकवाया |

इन बातों को ध्यान में रखकर करें शेयर बाजार में निवेश होगा मुनाफा

जब अमेरिका में गृह युद्ध बंद हो गया और इंग्लैंड ने अमेरिका से कपास ख़रीदना शुरू कर दिया तो इसका प्रभाव हिन्दुस्तान की कंपनियों पर पड़ा, जिसके चलते शेयर्स रातों-रात शिखर से ज़मीन पर आ गए | अब इन शेयरों का भाव कौड़ी के बराबर था क्योंकि अब इन शेयरों को कोई खरीददार नहीं मिल रहा था | प्रेमचंद रायचंद की कंपनी को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ | साथ ही बैंक ऑफ़ बॉम्बे, जिसने प्रेमचंद के साथ मिलकर पैसा लगाया था उसे भी नुकसान हुआ | यह देश का सबसे पहला स्टॉक मार्केट घोटाला था जिसमें बैंक के 1.38 करोड़ रुपये डूब गए थे |

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