जोखिम कम और मुनाफा ज्यादा का वादा फोक्सड फंड


स्टॉक मार्केट में धन कमाने के लिए कुछ रणनीतिकार विभिन्न स्टॉक्स में पैसा लगाने की राय देते हैं, तो कुछ कसे हुए पोटफोलियो को तरजीह देते हैं। ऐसे में निवेशक अधिकतर बार असमजंस की स्थिति में ही रहते हैं कि वे कहां निवेश करे जिससे उनका जोखिम कम से कम हो और मुनाफा ज्यादा। वित्तीय प्लानर अधिक स्टॉक में निवेश को डाइवर्सिफाई करने की सलाह देते हैं। बहरहाल इस प्रकार के छोटे पोर्टफोलियो पर केंद्रित फंड को फोकस्ड फंड कहते हैं।

फोकस्ड फंड वैसे इक्विटी फंड हैं जिनका निवेश तुलनात्मतक रूप से कम स्टॉक में होता है। आमतौर पर किसी सामान्य इक्विटी फंड में ३० से लेकर ८० शेयरों में निवेश किया जाता है जबकि फोकस्ड फंड का निवेश २० से २५ शेयरों में ही किया जाता है। एक आम इक्विटी फंड, शेयर के बाजार पूंजीकरण की परवाह किए बगैर जहां सभी प्रकार के स्टॉक में निवेश करता है वहीं फोकस्ड फंड अधिकांशत: लार्ज कैप शेयरों में ही निवेश करते हैं। इस प्रकार के फोकस्ड एप्रोच पर काम करने वाली पांच से छह स्कीमें बाजार में मौजूद हैं।

फंड की विशेषता

फोक्सड फंड का मुख्य उद्देश्य श्रेष्ठ स्टॉक का चयन कर उनमें निवेश करना है न कि कई सारे स्टॉक में पैसा विभाजित करना। इस फंड का प्रयास उन शेयरों की खोज कर  उनमें पैसे लगाना है जिनका ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा हो, उनका प्रबंधन अच्छा हो और जिनमें विकास की क्षमताएं हो। इस प्रकार का निवेश इस सोच के साथ की जाती है कि लार्ज कैप अस्थिरता के दौरान निवेश के लिए बेहतर माने जाते हैं और जब भी आर्थिक अनिश्चितताएं हो तो इन पर दांव लगाना ही बेहतर होता है। और हां, यदि दांव सही बैठा तो मुमकिन है कि यह फंड किसी भी अन्य डाइवर्सिफाइड फंड से बेहतर प्रदर्शन कर दे।

इतिहास शायद खुद को न दोहराए

फोकस्ड फंड को लांच ही इसी मान्यता से किया जाता है कि, चाहे कितनी ही बुरी स्थिति आए अच्छी गुणवत्ता वाली कंपनियां अपने विकास चक्र को बरकरार रखेंगी। एक फंड कंपनी द्वारा इसी संबंध में किए गए अध्ययन से पता चलता है कि दिसंबर २००३ और दिसंबर २०११ के बीच बीएसई १०० सूचकांक की टॉप १० कंपनियों का प्रतिफल ३७ फीसदी (सालाना) रहा है जबकि बीएसई १०० सूचकांक का रिटर्न इसी अवधि में २६ फीसदी ही रहा। अध्ययन से यह बात भी सामने आई है कि प्रमुख १० कंपनियों के शेयर भाव इस दौरान जहां ३० फीसदी तक चढ़े हैं वहीं बीएसई १०० के निचले १० शेयरों के भाव १५.८ फीसदी तक नीचे गिरे थे। खैर यह एक इतिहास है और मुमकिन है कि इतिहास खुद को न दोहराए।

निवेश के तर्क और चिंताएं

एक फोकस्ड फंड के कुछ फायदे तो कुछ नुकसान भी हं। यह फंड यह सुनिश्चित जरूर करेगा कि फंड मैनेजर एक एक शेयर का चयन तार्किक तौर पर कर रहा है। इस प्रकार के फंड में फंड मैनेजर अपनी पूरी क्षमता को पोर्टफोलियो के अध्ययन के लिए लगा सकता है और किए जा चुके निवेश पर भी अच्छे से नजर रख सकता है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि २५ स्टॉक का प्रबंधन करना, ६० से ७० स्टॉक पर नजर रखने से अधिक आसान है। दूसरी तरफ चूंकि फंड एक फोकस्ड पोर्टफोलियो का प्रबंधन करता है तो इसमें जोखिम भी स्वाभाविक रूप से अधिक ही रहता है। यही वजह है कि इस फंड की सलाह उन्हीं निवेशकों को दी जाती है जो अधिक अस्थिरता को पचा सकें। यदि फंड मैनेजर का दांव गलत बैठता है तो यह फंड के रिटर्न को तेजी से खत्म कर सकता है।

निवेश करें या न करें

एक बात तो साफ है कि आपके पोर्टफोलियो में चाहे १० शेयर हो या १०० यह प्रतिफल की गारंटी नहीं दे सकता है। एक छोटे पोर्टफोलियो वाले फंड में अच्छा खासा जोखिम जरूर होगा लेकिन यदि पोर्टफोलियो काफी बड़ा हो तो यह फंड मैनेजर को ऊंचा रिटर्न प्राप्त करने में दिक्कत पहुंचा सकता है। यदि जेएम कोर ११ फंड का ही उदाहरण लें तो हमें पता चलेगा कि यह अपने श्रेणी में सालाना आधार पर सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला फंड है (टेबल देखें)। लेकिन यदि बीते छह महीने के दौरान इसके प्रदर्शन पर नजर डालें तो पाएंगे कि इस फंड ने शानदार २३ फीसदी का रिटर्न दिया है और बीते एक महीने में तो इसका प्रतिफल तकरीबन १२ फीसदी का ही रहा है। हम यह उल्लेख ०४/०७/२०१२ के आंकड़ों के आधार पर कर रहे हैं। अब एतिहासिक  प्रदर्शन को देखकर शायद ही कोई इस फंड में निवेश करे लेकिन समय को भांप कर जिसने इस स्कीम में निवेश किया होगा वो आज इसके प्रदर्शन से जरूर गदगद होगा।

फोकस्ड फंड श्रेणी की सभी स्कीमें नई ही है और उन्होंने बाजार में पांच साल का भी समय नहीं बिताया है। दूसरी तरफ आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल फोकस्ड ब्लूचिप को छोडक़र किसी भी फंड का प्रदर्शन आपको आकर्षित नहीं करेगा। इसलिए एक सीधी-सीधी सलाह, कि निवेश करें या नहीं, देना मुश्किल ही होगा। अब चूंकि समूचे पैसे को कम शेयरों में लगाना जोखिम भरा हो सकता है इसलिए अधिकांश निवेश सलाहकार निवेशकों को डाइवर्सिफाइड फंड में निवेश करने की सलाह देते हैं। लेकिन कुछ सलाहकार ऐसे भी हैं जो यह मानते हैं कि बहुत अधिक शेयरों में निवेश करने से अच्छा है कि चुनिंदा अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों में ही निवेश हो। वाइजइनवेस्ट एडवाइजर्स के सीईओ हेमंत रुस्तगी कहते हैं कि आप फोकस्ड फंड में निवेश कर सकते हैं पर यह आपकी रणनीति होनी चाहिए न कि मुख्य निवेश। उनके मुताबिक यदि निवेशक अपने ४० फीसदी निवेश को लार्ज कैप फंड में लगाना चाहता है तो वो ३० फीसदी निवेश सामान्य डाइवर्सिफाइड फंड में कर ले और बाकी का १० फीसदी फोकस्ड फंड में कर ले। रुस्तगी के मुताबिक हालांकि फोकस्ड फंड में जोखिम जरूर होता है पर यह डाइवर्सिफाइड फंड से बेहतर प्रदर्शन करने का भी दमखम रखता है।

फोकस्ड फंड में निवेश 

आमतौर पर किसी सामान्य इक्विटी फंड में ३० से लेकर ८० शेयरों में निवेश किया जाता है जबकि फोकस्ड फंड का निवेश २० से २५ शेयरों में ही किया जाता है।

फोक्सड फंड का प्रयास उन शेयरों की खोज कर  उनमें पैसे लगाना है जिनका ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा हो, उनका प्रबंधन अच्छा हो और जिनमें विकास की क्षमताएं हो।

एक छोटे पोर्टफोलियो वाले फंड में अच्छा खासा जोखिम जरूर होगा लेकिन यदि पोर्टफोलियो काफी बड़ा हो तो यह फंड मैनेजर को ऊंचा रिटर्न प्राप्त करने में दिक्कत पहुंचा सकता है।

कुछ सलाहकार मानते हैं कि बहुत अधिक शेयरों में निवेश करने से अच्छा है कि चुनिंदा अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों में ही निवेश हो।

हालांकि फोकस्ड फंड में जोखिम जरूर होता है पर यह डाइवर्सिफाइड फंड से बेहतर प्रदर्शन करने का भी दमखम रखता है।

फोकस्ड फंड श्रेणी की सभी स्कीमें नई ही है और उन्होंने बाजार में पांच साल का भी समय नहीं बिताया है।

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए khulasaa.in को फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *