मांग में सुस्ती के बावजूद क्यों बढ़ती जा रही है प्रॉपर्टी की कीमतें


यदि कोई आपसे ये कहता है कि भारत में रियल एस्टेट सेक्टर इन दिनों बुरे दौर से गुजर रहा है तो शायद आपको ज्यादा आश्चर्य न हो। घरों की बिक्री में गिरावट, होम लोन की ऊंची दरें, निर्माण में देरी, निर्माण लागत में बढ़ोतरी, बिल्डरों पर बढ़ता कर्ज का बोझ आदि कई ऐसे कारक हैं जो इस बात की पुष्टी करते हैं कि वर्तमान समय में रियल एस्टेट सेक्टर को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

लेकिन यदि कोई आपसे ये कहे कि रियल एस्टेट सेक्टर का आकर्षण खत्म होने वाला है एवं यह सेक्टर घाटे के दलदल में पूर्ण रूप से समाने वाला है तो शायद आप इस बात पर कभी विश्वास न करें।  हां, यह सही है कि इन दिनों स्थितियां रियल एस्टेट सेक्टर के पक्ष में नहीं है पर ऐसा नहीं है कि बिक्री एकदम थम गई एवं कीमतों में गिरावट आ गई है। आप अमेरिका  एवं कई यूरोपीय देशों के आलोक में  देखेंगे तो हमारे यहां तो कीमतों में गिरावट की बात तो दूर कोई स्थिरता भी नहीं आई है जबकि इन देशों में कीमतों में भारी कमी आई है।

प्रॉपर्टी की बिक्री में कमी, अर्थव्यवस्था की सुस्त गति एवं ऊंची मुद्रास्फीति के बावजूद आवासीय प्रॉपर्टी की कीमतों में कमी नहीं हो रही। विरोधाभासी रूप से भारत में जगह-जगह के हिसाब से कीमतों में भारी भिन्नता है परंतु इसमें तेजी अब भी बरकरार है। कुछ बड़े महानगरों मसलन मुंबई एवं दिल्ली-एनसीआर में तो कीमतें आसमान छू रही हैं।  एक तरफ बिक्री में कमी की वजह से सेक्टर के ग्रोथ पर असर पड़ रहा है परंतु दूसरी तरफ कीमतें हैं जो कम होने का नाम नहीं ले रहीं। इसलिए यह जानना बेहद जरूरी है कि वे कौन से कारक हैं जो तमाम रूकावटों एवं अवरोधों (जिनका जिक्र हमने ऊपर किया है) के बावजूद कीमतों को थाम कर रखे हुए हैं। इसके अलावा इस बात पर ध्यान देना भी जरूरी है कि आखिर भविष्य में इस सेक्टर के रुख में और किसी तरह के  परिवर्तन आने वाले हैं?

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