अर्थ जगत

क्या आपका बैंक भी बचत खाते की ब्याज दर नहीं बढ़ा रहा है?

आखिरकार रिजर्व बैंक ने बचत खाते की ब्याज दरों को बाजार के हवाले कर ही दिया। आरबीआई के दिशानिर्देश के मुताबिक बैंक अपने व्यावसायिक हितों के मद्देनजर बचत खाते की ब्याज दर दो फीसदी भी रख सकते हैं और आठ फीसदी भी। हां, एक लाख तक की रकम पर सभी ग्राहकों को एकसमान ब्याज देना होगा। मतलब यह कि जो ब्याज दर दस हजार की रकम वालों को दिया जाएगा वही नब्बे हजार वालों को। पर एक लाख रुपए से अधिक की रकम पर बैंक अलग-अलग रकम के लिए अलग-अलग ब्याज दे सकते हैं।

तात्पर्य यह कि चार लाख रुपए की जमा पर छह फीसदी का ब्याज मिल सकता है तो दस लाख की जमा पर आठ फीसदी का। हां, एक ही जमा रकम वाले सभी ग्राहकों को एक समान ब्याज मिलेगा। यदि सेठ श्यामलाल को सात लाख रुपए की जमा पर छह फीसदी का ब्याज मिल रहा है तो सुकुमार दास को भी सात लाख की जमा पर उसी दर से ब्याज मिलेगा। आप जानते हैं कि बैंकों के बचत खाते पर ब्याज की दर चार फीसदी रही है। आरबीआई की घोषणा के तुरंत बाद यस बैंक ने बचत खाते पर ब्याज की दर बढ़ाकर छह फीसदी कर दी। कोटक बैंक और इंडसइंड बैंक ने भी ऐसा ही किया। भारतीय स्टेट बैंक जैसे बड़े बैंक अभी तक शांत बैठे हुए हैं। सवाल है कि बचत खाते की ब्याज दर में बढ़त का फायदा आखिर कैसे उठाया जाए।

जी ललचाता है कि स्टेट बैंक में खाता बंद करा कर यस बैंक में खाता खोल लें। क्या यह ठीक रहेगा? मेरे विचार से ऐसा नहीं करना चाहिए। एक लाख रुपए तक की जमा रकम के ब्याज में बमुश्किल हर महीने दो-तीन सौ रुपए का ही फर्क आएगा। यदि एकाउंट में कुछ हजार भर हैं तो महज कुछ रुपए का फर्क पड़ेगा। पर यदि आपका सैलरी एकाउंट एसबीआई में है और होम लोन, क्रेडिट कार्ड, कार लोन आदि की किश्त वहां से जा रही है तो नया एकाउंट खोलने में जितना झंझट उठाएंगे उस एवज में लाभ कम ही होगा। इस बात की भी कोई गारंटी नहीं कि आरबीआई द्वारा ब्याज दरें घटाने के बाद यस बैंक बचत खाते की ब्याज दरें नहीं घटाए। इसलिए अपने बैंक के साथ बने रहने में ही भलाई है। तो घाटे की भरपाई कैसे हो?

आप अपने मौजूदा बैंकर से कहिए कि आपके बचत खाते में ऑटो-स्वीप की फैसिलिटी दे दे। इससे आपको बचत खाते में बेकार पड़ी रहने वाली रकम पर फिक्स्ड डिपोजिट की दर से ब्याज मिलने लगेगा। यदि आपके पास ज्यादा रकम है तो आप उसे किसी भी म्यूचुअल फंड के लिक्विड या लिक्विड प्लस फंड में निवेश कर दें। आजकल लिक्विड प्लस फंड नौ फीसदी तक की दर से ब्याज दे रहे हैं। इसमें न के बराबर जोखिम है और दो दिनों के नोटिस पर पैसा भी वापस मिल जाता है। इनकम टैक्स के लिहाज से भी तीस फीसदी की दर से कर अदा करने वाले आय वर्ग के लिए बचत खाते के ब्याज पर तीस फीसदी की दर से टैक्स लगेगा जबकि लिक्विड फंड में होने वाली बढ़ोतरी पर दस से लेकर बाइस फीसदी की दर से। कहने का मतलब यह कि आप अधिक ब्याज दर के लालच में न आएं बल्कि ऑटो-स्वीप और लिक्विड फंड के जरिए उससे अधिक पैसे कमाएं।

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Title: your bank savings account interest rate is increasing | In Category: अर्थ जगत  ( arth jagat )

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