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आरती

श्री भैरव की आरती

जय भैरव देवा प्रभु जय भैरव देवा। जय काली और गौरा कृतसेवा।। तुम पापी उद्धारक दुख सिन्धु तारक। भक्तों के सुखकारक भीषण वपु धारक।। वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल धारी। महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी।। तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होवे। चतुर्वतिका दीपक दर्शन दुःख खोवे।। तेल चटकी दधि मिश्रित माषवली
आरती

श्री गंगा माता की आरती

ऊँ जय गंगे माता, श्री गंगे माता । जो नर तुमको ध्यावत, मनवंछित फल पाता।। ऊँ जय गंगे माता… चन्द्र सी ज्योत तुम्हारी जल निर्मल आता। शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता ।। ऊँ जय गंगे माता… पुत्र सगर के तारे सब जग को ज्ञाता । कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता।। ऊँ […]
आरती

ओम जय जगदीश हरे : विष्णु भगवान की आरती

ओम जय जगदीश हरे आरती ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ओउम…… जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ओउम…… मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं […]
आरती

भगवान श्रीराम जी की आरती

श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन हरण भव भय दारुणं नव कंजलोचन, कंज मुख, करकंज, पद कंजारुणं।   कंदर्प अगणित अमित छबि नवनीत नीरद सुंदरं। पटपीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमि जनक सुतावरं।।   भजु दीनबंधु दिनेश दानव दैत्यवंश निकंदनं। रघुनन्द आनंदकंद कौशलचंद दशरथ नंदनं ।। सिरा मुकुट कुंडल तिलक चारू उदारु अंग विभूषणं। आजानुभुज शर […]
प्रेमचंद की कहानियां

शंखनाद - प्रेमचंद

भानु चौधरी अपने गॉँव के मुखिया थे। गॉँव में उनका बड़ा मान था। दारोगा जी उन्हें टाटा बिना जमीन पर न बैठने देते। मुखिया साहब को ऐसी धाक बँधी हुई थी कि उनकी मर्जी बिना गॉँव में एक पत्ता भी नहीं हिल सकता था। कोई घटना, चाहे, वह सास-बहु का विवाद हो, चाहे मेड़ या […]
प्रेमचंद की कहानियां

बड़े घर की बेटी - प्रेमचंद

बेनीमाधव सिंह गौरीपुर गॉँव के जमींदार और नम्बरदार थे। उनके पितामह किसी समय बड़े धन-धान्य संपन्न थे। गॉँव का पक्का तालाब और मंदिर जिनकी अब मरम्मत भी मुश्किल थी, उन्हीं के कीर्ति-स्तंभ थे। कहते हैं इस दरवाजे पर हाथी झूमता था, अब उसकी जगह एक बूढ़ी भैंस थी, जिसके शरीर में अस्थि-पंजर के सिवा और […]
प्रेमचंद की कहानियां

आत्माराम - प्रेमचंद

वेदों-ग्राम में महादेव सोनार एक सुविख्यात आदमी था। वह अपने सायबान में प्रात: से संध्या तक अँगीठी के सामने बैठा हुआ खटखट किया करता था। यह लगातार ध्वनि सुनने के लोग इतने अभ्यस्त हो गये थे कि जब किसी कारण से वह बंद हो जाती, तो जान पड़ता था, कोई चीज गायब हो गयी। वह […]
प्रेमचंद की कहानियां

जुलूस : प्रेमचंद की कहानी

पूर्ण स्वराज्य का जुलूस निकल रहा था। कुछ युवक, कुछ बूढ़ें, कुछ बालक झंडियां और झंडे लिये बंदेमातरम् गाते हुए माल के सामने से निकले। दोनों तरफ दर्शकों की दीवारें खड़ी थीं, मानो यह कोई तमाशा है और उनका काम केवल खड़े-खड़े देखना है। शंभुनाथ ने दूकान की पटरी पर खड़े होकर अपने पड़ोसी दीनदयाल […]
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प्रेमचंद की हिंदी कहानी 'आधार'

सारे गॉँव मे मथुरा का सा गठीला जवान न था। कोई बीस बरस की उमर थी । मसें भीग रही थी। गउएं चराता, दूध पीता, कसरत करता, कुश्ती लडता था और सारे दिन बांसुरी बजाता हाट मे विचरता था। ब्याह हो गया था, पर अभी कोई बाल-बच्चा न था। घर में कई हल की खेती […]
प्रेमचंद की कहानियां

प्रेमचंद की हिंदी कहानी 'घमण्ड का पुतला'

शाम हो गयी थी। मैं सरयू नदी के किनारे अपने कैम्प में बैठा हुआ नदी के मजे ले रहा था कि मेरे फुटबाल ने दबे पांव पास आकर मुझे सलाम किया कि जैसे वह मुझसे कुछ कहना चाहता है। फुटबाल के नाम से जिस प्राणी का जिक्र किया गया वह मेरा अर्दली था। उसे सिर्फ […]