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धर्म कर्म

नवरात्रि 2018: नौ दिनों में होती है मां के अलग अलग रूपों की पूजा

Navratri puja सनातन धर्म में नवरात्र माता भगवती की पूजा अर्चना करने का श्रेष्ठ समय होता है। पूरे भारत में नवरात्रि विशेष हर्षोल्लास से मनाया जाता है। पुराणों में भी नवरात्र की महिमा का बखान किया गया है। यूं तो वर्ष भर में चार नवरात्रें चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ महीने की शुक्ल प्रतिपदा से […]
धर्म कर्म

दस महाविद्या: जीवन में आने वाली सभी परेशानियों का एक मात्र उपाय है

मनुष्य जन्म से लेकर मृत्यु तक अनेक तरह की उलझनों में उलझा रहता है, कभी परिवार की दिक्कतें, तो कभी गृहस्थ का सुख, कभी मान सम्मान और कभी धनसम्पदा, न जाने कितनी अभिलाषाएं हैं, न जाने कितनी आकांक्षाएं हैं जो जीवन भर आदमी का पीछा करती हैं। आदमी की सारी आकांक्षाएं वो जीवन की हों […]
आरती

शनिदेव की आरती

जय जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी। जय जय जय शनि देव… श्याम अंक वक्र-दृष्टि चतुर्भुजाधारी। नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी।। जय जय जय शनि देव… किरीट मुकुट शीश सहज दीपत है लिलारी। मुक्तन की माल गले शोभित बलिहारी।। जय जय जय शनि देव… मोदक और मिष्ठान […]
आरती

भगवान शिव की आरती

ॐ जय शिव ओंकारा, भज जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्ध्दांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा…… एकानन चतुरानन पंचानन राजे। हंसासन, गरुड़ासन, वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा…… दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे। तीनों रुप निरखता त्रिभुवन जन मोहें॥ ॐ जय शिव ओंकारा…… अक्षमाला, बनमाला, मुण्ड़मालाधारी। चंदन, मृदमग सोहें, भोले शशिधारी॥ […]
प्रेमचंद की कहानियां

नाग-पूजा - प्रेमचंद

प्रात:काल था। आषढ़ का पहला दौंगड़ा निकल गया था। कीट-पतंग चारों तरफ रेंगते दिखायी देते थे। तिलोत्तमा ने वाटिका की ओर देखा तो वृक्ष और पौधे ऐसे निखर गये थे जैसे साबुन से मैने कपड़े निखर जाते हैं। उन पर एक विचित्र आध्यात्मिक शोभा छायी हुई थी मानों योगीवर आनंद में मग्न पड़े हों। चिड़ियों […]
प्रेमचंद की कहानियां

दुर्गा का मन्दिर : प्रेमचंद की कहानी

बाबू ब्रजनाथ कानून पढ़ने में मग्न थे, और उनके दोनों बच्चे लड़ाई करने में। श्यामा चिल्लाती, कि मुन्नू मेरी गुड़िया नहीं देता। मुन्नु रोता था कि श्यामा ने मेरी मिठाई खा ली। ब्रजनाथ ने क्रुद्घ हो कर भामा से कहा—तुम इन दुष्टों को यहॉँ से हटाती हो कि नहीं? नहीं तो मैं एक-एक की खबर […]
प्रेमचंद की कहानियां

बैंक का दिवाला - प्रेमचंद

लखनऊ नेशनल बैंक के दफ्तर में लाला साईंदास आराम कुर्सी पर लेटे हुए शेयरो का भाव देख रहे थे और सोच रहे थे कि इस बार हिस्सेदारों को मुनाफ़ा कहॉं से दिया जायग। चाय, कोयला या जुट के हिस्से खरीदने, चॉदी, सोने या रूई का सट्टा करने का इरादा करते; लेकिन नुकसान के भय से […]
प्रेमचंद की कहानियां

बांका जमींदार: प्रेमचंद की कहानी

ठाकुर प्रद्युम्न सिंह एक प्रतिष्ठित वकील थे और अपने हौसले और हिम्मत के लिए सारे शहर में मश्हूर। उनके दोस्त अकसर कहा करते कि अदालत की इजलास में उनके मर्दाना कमाल ज्यादा साफ तरीके पर जाहिर हुआ करते हैं। इसी की बरकत थी कि बाबजूद इसके कि उन्हें शायद ही कभी किसी मामले में सुर्खरूई […]
प्रेमचंद की कहानियां

मनावना: प्रेमचंद की कहानी

बाबू दयाशंकर उन लोगों में थे जिन्हें उस वक्त तक सोहबत का मजा नहीं मिलता जब तक कि वह प्रेमिका की जबान की तेजी का मजा न उठायें। रूठे हुए को मनाने में उन्हें बड़ा आनन्द मिलता फिरी हुई निगाहें कभी-कभी मुहब्बत के नशे की मतवाली ऑंखें से भी ज्यादा मोहक जान पड़तीं। आकर्षक लगती। […]
प्रेमचंद की कहानियां

कथाकार मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी 'अमृत'

मेरी उठती जवानी थी जब मेरा दिल दर्द के मजे से परिचित हुआ। कुछ    दिनों तक शायरी का अभ्यास करता रहा और धीर-धीरे इस शौक ने तल्लीनता का रुप ले लिया। सांसारिक संबंधो से मुंह मोड़कर अपनी शायरी की दुनिया में आ बैठा और तीन ही साल की मश्क़ ने मेरी कल्पना के जौहर खोल […]