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प्रेमचंद की कहानियां

'गैरत की कटार' प्रेमचंद की हिंदी कहानी

कितनी अफ़सोसनाक, कितनी दर्दभरी बात है कि वही औरत जो कभी हमारे पहलू में बसती थी उसी के पहलू में चुभने के लिए हमारा तेज खंजर बेचैन हो रहा है। जिसकी आंखें हमारे लिए अमृत के छलकते हुए प्याले थीं वही आंखें हमारे दिल में आग और तूफान पैदा करें! रूप उसी वक्त तक राहत […]
प्रेमचंद की कहानियां

मुंशी प्रेम चंद की कहानियां 'शुद्र'

मां और बेटी एक झोंपड़ी में गांव के उसे सिरे पर रहती थीं। बेटी बाग से पत्तियां बटोर लाती, मां भाड़-झोंकती। यही उनकी जीविका थी। सेर-दो सेर अनाज मिल जाता था, खाकर पड़ रहती थीं। माता विधवा था, बेटी क्वांरी, घर में और कोई आदमी न था। मां का नाम गंगा था, बेटी का गौरा! […]
प्रेमचंद की कहानियां

मुंशी प्रेम चंद की कहानी 'अपनी करनी'

आह, अभागा मैं! मेरे कर्मो के फल ने आज यह दिन दिखाये कि अपमान भी मेरे ऊपर हंसता है। और यह सब मैंने अपने हाथों किया। शैतान के सिर इलजाम क्यों दूं, किस्मत को खरी-खोटी क्यों सुनाऊँ, होनी का क्यों रोऊं? जों कुछ किया मैंने जानते और बूझते हुए किया। अभी एक साल गुजरा जब […]
प्रेमचंद की कहानियां

मुंशी प्रेम चंद की हिंदी कहानी शादी की वजह

यह सवाल टेढ़ा है कि लोग शादी क्यो करते है? औरत और मर्द को प्रकृत्या एक-दूसरे की जरूरत होती है लेकिन मौजूदा हालत मे आम तौर पर शादी की यह सच्ची वजह नही होती बल्कि शादी सभ्य जीवन की एक रस्म-सी हो गई है। बहरलहाल, मैने अक्सर शादीशुदा लोगो से इस बारे मे पूछा तो […]
प्रेमचंद की कहानियां

वफ़ा का खंजर - प्रेमचंद

जयगढ़ और विजयगढ़ दो बहुत ही हरे-भ्ररे, सुसंस्कृत, दूर-दूर तक फैले हुए, मजबूत राज्य थे। दोनों ही में विद्या और कलाद खूब उन्न्त थी। दोनों का धर्म एक, रस्म-रिवाज एक, दर्शन एक, तरक्की का उसूल एक, जीवन मानदण्ड एक, और जबान में भी नाम मात्र का  ही अन्तर था। जयगढ़ के कवियों की कविताओं पर […]
प्रेमचंद की कहानियां

नमक का दारोगा - प्रेमचंद

जब नमक का नया विभाग बना और ईश्वरप्रदत्त वस्तु के व्यवहार करने का निषेध हो गया तो लोग चोरी-छिपे इसका व्यापार करने लगे। अनेक प्रकार के छल-प्रपंचों का सूत्रपात हुआ, कोई घूस से काम निकालता था, कोई चालाकी से। अधिकारियों के पौ-बारह थे। पटवारीगिरी का सर्वसम्मानित पद छोड-छोडकर लोग इस विभाग की बरकंदाजी करते थे। […]
प्रेमचंद की कहानियां

मुंशी प्रेमचंद की कहानी: कातिल

जाड़ों की रात थी। दस बजे ही सड़कें बन्द हो गयी थीं और गालियों में सन्नाटा था। बूढ़ी बेवा मां ने अपने नौजवान बेटे धर्मवीर के सामने थाली परोसते हुए कहा-तुम इतनी रात तक कहां रहते हो बेटा? रखे-रखे खाना ठंडा हो जाता है। चारों तरफ सोता पड़ गया। आग भी तो इतनी नहीं रहती […]
ज्योतिष

कर्ज लेने व देने से पूर्व रखें इन बातो का ध्यान, नहीं होगी परेशानी

कर्ज उतारने के अचूक उपाय चर लग्न मेष, कर्क, तुला व मकर में कर्ज लेने पर शीघ्र उतर जाता है, जबकि चर लग्न में कर्जा देंना नहीं चाहिए । चर लग्न में पांचवें व नवें स्थान में यदि कोई  शुभ ग्रह या आठवें स्थान में कोई भी ग्रह नहीं हो, वरना ऋण पर ऋण बढ़ता […]
धर्म कर्म

रुद्राक्ष धारण करना बदल सकता है किसी का भी जीवन

मान्यता है कि ओंकारेश्वर मंदिर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के साथ साथ रूद्राक्ष के वृक्ष का दर्शन करने का बहुत महत्व है । माना जाता है कि रूद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शंकर के आंसुओं से हुआ है यही कारण है कि भगवान शिव की पूजा में रूद्राक्ष की माला का प्रयोग किया जाता है। […]
धर्म कर्म

दस गुना ज्यादा लाभ मिलता है सावन माह में महामृत्युंजय मंत्र के जप से

महामृत्युंजय मंत्र : ॐ ह्रौं जूं सः। ॐ भूः भुवः स्वः। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌। स्वः भुवः भूः ॐ। सः जूं ह्रौं ॐ॥   महामृत्युंजय मंत्र जपने से अकाल मृत्यु को टाला जा सकता है, परन्तु श्रावण मास में महामृत्युंजय मंत्र का जाप 10 गुना अधिक फलदायी हो जाता है । […]