कीट पतंगे खाने वाले पौधों का संसार


जीवन के लिए पेड़-पौधों की उपस्थिति बहुत जरूरी है। इसी कारण चारों तरफ हरियाली छाई रहती है। कीट पतंगें तो हर जगह पाए ही जाते हैं। चाहे बर्फ से ढ़के पहाड़ हो या सूखे रेगिस्‍तान चाहे बड़ी-बड़ी झीलें हो या हरियाली भरे मैदान। आओ अब जानते हैं कि कीट पतंगों को खाने वाले पेड़-पौधों के बारे में। पेड़-पौधे इन को रिझाने के लिए क्‍या-क्‍या रूप धरते हैं यह जानना बड़ा रोचक है। दरअसल दलदली जमीन या पानी के समीप उगने वाले कुछ पौधों को आवश्‍यक मात्रा में नाइट्रोजन नहीं मिल पाता है जिस कारण ये कीट-पतंगे खाकर इस कमी को पूरी करते हैं।
कीट पतंगे खाने-वाले पेड़-पौधों की पत्तियां बहुत विचित्र होती हैं। कुछ पेड़-पौधों की पत्तियां कीट-पतंगों को पकड़ने के लिए सुराही जैसी तो कुछ की तुरही की तरह होती हैं।
नेपिन्थिस
यह हमारे देश में असम की खसिया और गारो पहाडि़यों पर मिलता है। इसकी पत्तियों के सिरे पर एक सुराही जैसा आकार होता है। यही इसका फंदा है जिसमें यह कीट-पतंगों को फंसाता है। यह चमत्‍कारी सुराही डेढ़ से आठ इंच तक लंबी होती है। देखने में बहुत लगने वाली इस सुराही के मुंह पर सब और किनारे-किनारे शहद की थैलियां एक कतार में होती है। कीट पतंगे सुराही के रंग से आकर्षित होकर शहद के लालच में अपनी जान गंवा बैठते हैं। चिकनी दीवार के कारण ये रेंगकर बाहर भी निकल नहीं पाते। इसके तल में रस रहता है जो इन्‍हें जल्‍दी ही पचा जाता है और पचे हुए भाग को इसकी दीवारें सोख लेती हैं।

सेरोसेनिया
इस पौधे में तुरही की शक्‍ल की थैली नुमा पत्तियां जमीन पर एक झुंड में सजी रहती हैं। आकर्षक रंग की ये पत्तियां अपने मुंह पर कुछ ग्रंथियां लिए रहती हैं जिनमें शहद होता है। कीट पतंगे बस इसके रंग और शहद के चक्‍कर में पड़कर थैली के भीतर चले जाते हैं और फिर तुरही के मुंह के भीतर लगे कांटों के कारण बाहर नहीं निकल पाते।
ड्रोसैरा
यह एक बहुत सुंदर कीट-भक्षी पौधा है जो कि शिमला, मसूरी और नैनीताल में उगता है। इसकी गोल-गोल पत्तियां के किनारे लाल रंग की घुण्‍डी वाले आलपिन सरीखे बाल होते हैं जिनसे एक चिपचिपा रस निकलता रहता है। ड्रोसैरा पौधे से निकला यह रस धूप की रोशनी में ओस की तरह चमकता है। नन्‍हें कीट पतंगों को यही रस चिपका लेता है और फिर घुण्डियां मुड़कर चारों ओर से उसे घेर लेती है।
डायोनिया
इसमें कीट पतंगों को पकड़ने वाला फंदा जमीन पर सजी पत्तियां होती हैं। यह भी ड्रोसैरा की तरह ही शिकार करता है। यह अमेरिका में पाया जाता है। इसके अपने शिकार को पचाने में एक हफ्ते से अधिक का समय लग जाता है।

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