कुटुर कुटर राग अलापे कुटर्रू


छोटी गर्दन, बड़े सिर और लाल रंग की बड़ी भारी चोंच वाला हरा बंसता घने जंगलों और बाग बगीचों में अक्सर दिखाई देता है। चूंकि पक्षी के पंख हरे होते हैं इसलिए इसे हरा बंसल भी कहा जाता है। यह सफाई पंसद पक्षी है। यह परिंदा निचले हिमाचल से लेकर गोदावरी तक मिलता है। यह पक्षी छोटे-छोटे समूहों में रहता है। इसका कद मैना से थोड़ा बड़ा होता है। नर और मादा लगभग एक समान होते हैं। उड़ान में यह कमजोर होता है। चोंच के पास उगे बालों की प्रारंभ में दाढ़ी समझ कर इसे बाश्बेट नाम दिया गया था। इनकी 72 जातियों में 16 भारतीय है। अमेरिका में 12, अफ्रीका में 37 जातियां पायी जाती हैं। हरे बसंता का मुख्‍य भोजन पीपल, बरगद जैसे वृक्षों के फल, सेमल के फूलों का मकरंद, कचनार के फूल और कीड़े-मकोड़े आदि हैं। यह गरमी की नीरव दोपहरी में भी बोलना बंद नहीं करता है।
गर्मी की तपती दोपहरी में भी कुटुरू-कुटुरू राग अलापने के कारण इसे कुटर्रू भी कहा जाता है।
नर और मादा मिलकर विशेषकर पुराने सड़ रहे वृक्षों या नरम लकड़ी के पेड़ों में कोटर बनाकर रहता है घरौंदा बनाते समय जो बुरादा कोटर से गिरता है। सामान्यतया मादा एक खेप में दो से चार अंडे देती है। अंडों को सेने और लालन-पालन का काम नर-मादा मिलकर करते हैं।

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