कैसे बनता है कोहरा


सर्दी के मौसम में अक्सर सुबह धरती के ऊपर एक धुंए जैसा आवरण छा जाता है, जिसे कोहरा कहा जाता है कोहरा बादल का ही एक प्रकार है, जो पृथ्वी की सतह छुता हुआ भी लगता है। कोहरा कैसे बनता है ? हमारे चारों ओर उपस्थित हवा में जल वाष्प होती है, जिसे हम नमी कहते हैं। सर्दी के मौसम में पृथ्वी की सतह के पास की गर्म वायु में मौजूद जलवाष्प ऊपर मौजूद ठण्डी हवा की परतों से मिलकर जम जाती है। इस प्रक्रिया को संघनन कहा जाता है। जब हवा में जलवाष्प संघनन की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है तो यह भारी होकर जल की नन्हीं नन्हीं बूंदों में बदलने लगती है। फिर आसपास को अधिक ठंडी हवा के संपर्क में आने पर इसका स्वरूप ठंडे धुंए के बादल जैसा हो जाता है। इसी को मौसम वैज्ञानिक ‘कोहरा’ बनना कहते हैं।
कोहरा मुख्यतः दो प्रकार का होता है। प्रथम एडवेंक्शन फाॅग, दूसरा रेडिऐशन फाॅग। एडवेंक्शन फाॅग, हवा की दो विपरीत धाराओं के मिलने से बनता है, इनमें एक ठंडी होती है और दूसरी गर्म। रेडियेशन फाॅग, साफ और शांत रातों में बनता है। जब धरती की सतह से गर्मी से क्रिया करके ‘कोहरा’ बना देती है। कोहरे में उपस्थित जल के कणों के कारण आर पार देखना कठिन हो जाता है। जिसके कारण कई बार रेलगाड़ियों के चलने और हवाई जहाजों के उड़ान भरने में भी बाधा आ जाती है।

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