मैग्‍लेव ट्रेन


बच्‍चों तुमने पटरियों पर दौड़ती रेलगाड़ी तो देखी ही होगी पर क्या कभी तुमने पटरियों पर रेल को उड़ते हुए देखा है? नहीं न पर यह सच है। मैग्‍लेव ट्रेन ऐसी ही एक ट्रेन है जो विद्युतचुंबकीय बल के सहारे पटरी पर उड़ती हुई प्रतीत होती है। इस ट्रेन की रफ्तार बहुत तीव्र होती है किसी जेट विमान से बस थोड़ा कम यानी लगभग 580 किमी प्रति घंटा यह मुख्‍यत: दो प्रकार की तकनीक पर काम करती है। एक ईएमएस और दूसरी ईडीएस। ईएमएस यानि इलैक्ट्रोमैग्‍नेटिक सस्पेंशन तकनीक। इस तकनीक में ट्रेन को पटरियों से थोड़ा ऊपर उठा कर दौड़ाने के लिए ट्रेन के निचले भाग में इलैक्ट्रोमैग्‍नेट्स लगे होते हैं। दूसरी तकनीक यानी ईडीएस में पटरी और ट्रेन दोनों चुंबकीय प्रवाह के कारण विपरीत दिशा में विद्युत चुंबकीय बल छोड़ते हैं और इस तरह ट्रेन पटरी से ऊपर उठकर गति प्राप्‍त करती है। मैग्‍लेव ट्रेन फिलहाल जापान, इंग्‍लैंड, चीन व जर्मनी में देखने को मिल रही है पर जल्द ही हमारे देश में भी दिल्ली से मुंबई के बीच ऐसी एक ट्रेन दौड़ाने की योजना है। यह ट्रेन सबसे पहले इंग्‍लैंड में 1984 में सफलता पूर्वक चलाई गई थी। वैसे ऐसी ट्रेनों के निर्माण पर शोध कार्य 1960 में ही शुरू हो चुका था। जर्मनी और जापान ने भी 1990 में इससे होने वाले फायदों का ध्यान में रखकर इस पर काम शुरू कर दिया था।

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