रंग बदलती जहरीली चिडि़या


न्यू गिनी के जंगलों में एक जहरीली चिडि़या पाई जाती है जिसका नाम पिटोहुई है। इसका जहर मध्य अमेरिका में पाये जाने वाले डार्ट मेंढकों से मिलता-जुलता है। सन्ï 1971 में जॉन डंबचर नामक खोचकर्ता ने इस चिडि़या को सबसे पहले ढूंढा। जब वे जंगलों में चिडि़यों के घोंसलों की खोज कर रहे थे उसी दौरान उन्होंने एक नन्हीं चिडि़या को पकड़ा और अपने बचाव में चिडि़या ने डंबचर के हाथ पर चोंच मार दी जिससे उनके हाथ से खून निकलने लगा। जब डंबचर ने हाथ के खून को अपने मुंह से पोंछा तो उनके मुंह में झुंझनी होने लगी और उनका मुंह सुन्न पड़ गया। पिटोहुई चमकीले रंगों की चिडि़या है लेकिन खतरा भांपते ही यह रंग बदलती है पिटोहुई का मुख्‍य भोजन छोटे कीड़े मकोड़े और बीटल्स होते हैं। यह एक बार में दो बच्‍चों को जन्म देती है। पिटोहुई का प्रमुख दुश्मन सांप और चील ही होते हैं जो हमेशा उनके शिकार की ताक में रहते हैं।
सेन फ्रासिंस्कों के कैलिफोर्निया अकादमी आफ साइसेंस के वैज्ञानिकों ने ढूंढ ही लिया कि ये नन्हीं सी चिडि़या कैसे जहरीली हो जाती है। पिटोहुई जन्म से जहरीली नहीं होती।
यह अपने आहार मे टॉक्‍िसक डिफेंसिव रसायन लेती है। पिटोहुई एक तिलचट्ïटे को खाती है और विषाक्त हो जाती है। यह तिलचट्टा कीट परिवार से संबंधित है और इसका नाम क्रेसाइन हैं।
ब्लैक पिटोहुई, हुडेड पिटोहुई और वेरीएबल पिटोहुई में ही खतरनाक जहर पाया जाता हैं जो इसकी त्वचा और पंखों में विद्यमान होता है।

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