सबके लि‍ए उपयोगी कि‍ताब : रोशनी देवी

हमारे चारों की दुनि‍या बड़ी अनोखी है। आसमान में चमकता सूरज, चाँदनी बिखेरता चाँद और जगमगाते तारे, ऊँचे पहाड़, गहरी घाटियां, नदि‍यां और समंदर, हरे-भरे पेड़-पौधों, रंग-बिरंगी तितलियों, लाखों प्रकार के जीव-जंतुओं, कलरव करते पंछी, ये सभी हमें अपनी और खींचते हैं। सूरज की दूरी कि‍तनी होगी, चाँद कैसे चमकता होगा, दि‍न में चमकने वाला सूरज रात को कहां चला जाता है, क्यों घिरते हैं बादल, क्यों तपती है धरती, क्यों आते हैं दूर देश के पंछी, समंदर के अंदर की रहस्‍यमयी दुनि‍या कैसी है जैसे कई सवाल अक्‍सर हमारे मन में उठते रहते हैं।

इस तरह के कई सवालों का जवाब देती है- लेखक मंच प्रकाशन से प्रकाशि‍त वरिष्ठ विज्ञान लेखक देवेंद्र मेवाड़ी की पुस्‍तक ‘वि‍ज्ञान और हम’।

7 मार्च 1944 को उत्तराखण्ड के नैनीताल जिले में एक ऊँचे पहाड़ पर कालाआगर गाँव में जन्‍में देवेन्द्र मेवाड़ी की अब तक करीब 25 किताबें प्रकाशि‍त हो चुकी हैं। इसके अलावा इन्होंने विज्ञान की कई पुस्तकों का सम्पादन और अनुवाद भी किया है। आकाशवाणी और टेलीविजन के लिए भी इन्होंने कई विज्ञान नाटक लिखे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि‍ ये दूर-दराज स्कूल-कॉलेजों में जाकर विद्यार्थियों को विज्ञान की कहानियाँ सुनाते हैं।

किस्से-कहानी सी रोचक शैली में लिखी उनकी यह पुस्तक हमें बताती है कि विज्ञान कितना रोचक है। इस पुस्‍तक में मेवाड़ी जी ने अपनी बात कहने के लि‍ए कोई एक वि‍धा नहीं चुनी। उन्‍होंने संवाद, नाटक, लेख, पत्र, यात्रावृत्‍तांत, जीवनवृत्‍त आदि‍ साहि‍त्‍य की वि‍भि‍न्‍न वि‍धाओं में वि‍ज्ञान से जुडी बातें लि‍खी हैं। इससे यह पुस्‍तक और भी रोचक और सहज हो गई है। उन्‍होंने अपनी बात को कहने के लि‍ए अमीर खुसरो, सोहन लाल द्वि‍वेदी, द्वारि‍का प्रसाद महेश्‍वरी, अज्ञेय, मीराबाई आदि‍ कवि‍यों की पंक्‍ति‍यों का प्रयोग कि‍या है। इससे बात और भी सरलता और प्रभावी ढंग से समझ में आती है। उदाहरण के लि‍ए ‘अनोखा सौरमंडल’ की शुरुआत वह इस तरह करते है-

’दोस्तो, अंधेरी रात में कभी तारों भरा आसमान देखा तुमने? कितना सुन्दर लगता है, जगमगाते हुए तारों से भरा आसमान! कभी आसमान के उन तारों को गिनने की कोशिश की तुमने? एक, दो, तीन, चार…सैकड़ों, लाखों तारे! चलो, पहले प्रसिद्ध कवि अमीर खुसरो की यह पहेली सुनो-

एक थाल मोती भरा

सबके सिर पर औंधा धरा,

थाल वह चारों ओर फिरे

मोती फिर भी एक न गिरे!

बूझो इस पहेली को। इसका मतलब है, आसमान।’

इतनी रोचक शुरुआत के बाद कोई भी बि‍ना पूरा लेख ही नहीं, बल्‍कि‍ पूरी कि‍ताब पढे़ बि‍ना नहीं रह सकता। बातों-बातों में पाठक को वि‍ज्ञान के तमाम आंकडें और जानकारी मि‍ल जाती है। उसे कहीं बोरि‍यत नहीं होती, बल्‍कि‍ कहानी, कवि‍ता पढ़ने जैसा ही आनंद आता है।

यह कि‍ताब बच्‍चों-बड़ों सबके लि‍ए बेहद उपयोगी कि‍ताब है। अपने आसपास की दुनि‍या को जानने-समझने के लि‍ए जि‍ज्ञासु हर व्‍यक्‍ति‍ को यह कि‍ताब पढ़नी चाहि‍ए और अन्‍य दोस्‍तों को भी पढ़ानी चाहि‍ए।

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पुस्‍तक- वि‍ज्ञान और हम

लेखक- देवेंद्र मेवाड़ी

मूल्य-(अजि‍ल्द) : 140 रुपये

(सजि‍ल्द) : 260 रुपये

प्रकाशक- लेखक मंच प्रकाशन

433, नीति‍खंड-3

इंदि‍रापुरम-201014

गाजि‍याबाद, उत्‍तर प्रदेश

मोबाइल-9871344533

ईमेल- anuraglekhak@gmail.com

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