अगर चाहते हैं लोगों को भोजन संबंधित सलाह देना तो चुनें डाइटीशियन का पेशा


आहार में सुधार कर क्या किसी के रोगों पर काबू पाया जा सकता है? भोजन में कौन से पोषक तत्व कितनी मात्रा में जरूरी है? भोजन किसी के मूड को किस तरह प्रभावित करता है? क्या कुछ भोज्य पदार्थ हानिकारक होते हैं? क्या कुछ खास पदार्थ हानिकारक होते हैं? क्या कुछ खास दवाओं के साथ कुछ खास भोज्य पदार्थ गलत रूप से रिएक्ट कर सकते हैं? लो-सोडियम डाइट में नमक की कितनी मात्रा दी जा सकती है? क्या कुछ पोषक तत्वों का सेवन कर बढ़ती उम्र के प्रभाव को रोका जा सकता है? रेनल डिस्फंक्शन (गुर्दे की निष्क्रियता) से प्रभावित व्यक्ति को कौन-कौन से भोज्य पदार्थ नहीं लेने चाहिए ?
अगर इन सवालों में आपकी रुचि है तो फिर आप पोषण और भोजन विज्ञान (न्यूट्रीशियन एंड डाइटेटिक्स) को अपना व्यावसाय बनाने के बारे में सोच सकती है।

उपयोगिता कहां है?
एक डाइटीशियन के रूप में आप नवजात शिशुओं से लेकर वृद्ध और बीमार लोगों, माताओं, खिलाड़ियों, अस्पतालों और होटलों तक को अपनी सेवाएं दी सकती हैं। हालांकि हमारे देश में अभी भी ज्यादातर लोग डाइटीशियन और न्यूट्रीशियन (भोजन और पोषण विज्ञानियों) के बीच फर्क को नहीं समझते। वे दोनों को एक ही समझ बैठते हैं। पर इन दोनों में फर्क है। डाइटीशियन लोगों को यह सलाह देते हैं कि स्वस्थ रहने के लिए किस तरह का भोजन करना चाहिए। दूसरी तरफ न्यूट्रीशनिस्ट का कार्य रोगियों के ठीक हो जाने के बाद स्वस्थ रहने के लिए किस तरह का भोजन करना है इसकी सलाह देना होता है।

संभावनाओं का आकाश
अगर आप लोगों के साथ काम करना पंसद है तो अस्पताल, नर्सिंग होम ओर विशेष क्लीनिकों में कार्य कर सकते हैं जहां आपको प्रत्येक रोगियों के आहार की लिस्ट बनानी होगी। यह आसान काम नहीं है। क्योंकि तमाम चिकित्सीय निर्देशों के अलावा आपको रोगी की जीवन शैली, खाने की आदतों, सामाजिक स्तर, आयु और पाचन तंत्र आदि का भी पूरा ध्यान रखना होता है।
इसके अलावा रक्षा प्रतिष्ठानों, शिक्षा संस्थानों, आवासीय विद्यालयों, फैक्ट्रियों और वृद्ध गृहों में चलने वाली बड़ी संस्थागत कैटीनों में भी कार्य किया जा सकता है। वहां एक निश्चित बजट के अंदर स्वादिष्ट विविधतापूर्ण और पोषक तत्वों से युक्त संतुलित भोजन की योजना बनाने में स्टाफ की मदद करनी होती है।

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