सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व है मकर सक्रांति


भारतवासियों के हिंदू ध्र्म का प्रमुख त्यौहार है मकर संक्रान्ति। यह पर्व पूरे भारत में किसी न किसी रूप में मनाया जाता है। यह कहा जाता है कि पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तब इस संक्रांति को मनाया जाता है।
यह त्यौहार जनवरी माह की चैदह तारीख को मनाया जाता है। जब सूर्य ध्नु राशि छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है उसी दिन से सूर्य की उत्तरायण गति आरम्भ होने के कारण इसे उत्तरायणी भी कहा जाता है।
मकर संक्रंांति के पीछे जुड़ा इतिहास यह भी है कि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्रा सूर्य से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं। चूंकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, अतः इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा उनसे मिली थी। महाभारत काल में इसी दिन पितामह भीष्म ने अपनी देह त्यागने का निर्णय लिया था।
इस त्यौहार को अलग अलग प्रांतों में अलग-अलग रूप में मनाया जाता है।
इस पर्व पर खास तौर पर तिल गुड का कह महत्व होता है। इस दिन तिल, गुड़ का दान करना, दाल-चावल की खिचड़ी का दान करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। साथ ही यह भी कहा जाता है कि इस दिन तिल, खिचड़ी और गुड़ दान करने से आपके अशुभ परिणामों में कमी आती है। इस दिन तिल-गुड़ से बने लडडू और व्यंजन बनाए जाते हैं।
मकर संक्रांति के दिन आकाश में उड़ती पतंगों को देखकर हमारे मन के अंतर एक बहुत ही अच्छी और स्वतंत्रता की खिलखिलाती हंसी का अनुभव होता है, आसमान में उड़ती पतंगों को देखकर मन स्वतंत्रता से सराबोर हो जाता है।

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