जहां अपने आप प्रज्जवलित हो जाती है जोत, सिर्फ 5 घंटे के लिए खुलता है ये मंदिर


यूं तो भारत में 51 शक्तिपीठ हैं, लेकिन इनके अलावा भी बहुत से ऐसे मंदिर हैं जो विश्व प्रसिद्ध हैं, जहां जाकर लोगों को अपनी मनवांछित इच्छाओं की प्राप्ति होती है। ऐसा ही एक मंदिर छत्तीसगढ़ में स्थित है निराई माता का मंदिर, Nirai Mata Temple Chhattisgarh आश्चर्य की बात यह है कि यह मंदिर साल में सिर्फ एक दिन पांच घंटे के लिए खुलता है और हर साल हजारों लोग माता के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।

प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण सोंढूल और पैरी नदी के संगम के मुहाने पर पहाड़ी पर स्थित मां निरई देवी के मंदिर के बारे में एक रोचक बात यह है भी है कि यहां हर साल चैत्र नवरात्रों में अपने आप ही जोत प्रज्जवलित हो जाती है, यह जोत हर साल अपने आप कैसे प्रज्जवलित होती है यह एक रहस्य ही है, पहाड़ी पर न तो नराई मां की कोई मूर्ति ही है और न कोई मंदिर, फिर भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु हर साल इस पहाड़ी पर आकर जोत जलाते हैं और निराई मां की अराधना करते हैं।

Nirai-Mata-Temple-1462186654

मान्यता है कि निराई माता के मंदिर में जो भी मन्नतें मांगी जाती हैं, मां उन्हें पूरा करती है, इसी श्रद्धावश अपनी मन्नतें पूरी होने के बाद हर वर्ष यहां हजारों की संख्या में बकरों की बलि दी जाती है। इस मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है, और महिलाओं को मंदिर का प्रसाद तक ग्रहण करने की मनाही है। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से कुछ न कुछ अनहोनी घटित हो जाती है। निरई माता में सिंदूर, सुहाग, श्रृंगार, कुमकुम, गुलाल, बंदन नहीं चढ़ाया जाता। नारियल, अगरबत्ती, से माता को मनाया जाता हैं। देश के अन्य मंदिरों में जहां दिन भर मातारानी के दर्शन होते हैं वहीं यहां सुबह 4 बजे से सुबह 9 बजे तक यानि केवल 5 घंटे ही माता के दर्शन किए जा सकते हैं।

8_1460107102ग्राम मोहेरा के पहाड़ी में माता निरई की ग्रामीण श्रद्धा-भक्ति से पूजा-अर्चना करते हैं। इसके पीछे 200 साल पुरानी मान्यता है। आज से दो सौ वर्ष पूर्व मोहेरा ग्राम के मालगुजार जयराम गिरी गोस्वामी ने निरई माता की पूजा करने बहुरसिंग ध्रुव के पूर्वजों को छ: एकड़ जमीन दान में दिए थे। जमीन में कृषि कर आमदनी से माता की पूजा पाठ जातरा संपन्न हो रहा है। यहां रायपुर, धमतरी, दुर्ग, भिलाई, मगरलोड, राजिम, छुरा, मैनपुर, देवभोग, गरियाबंद सहित अनेक जगहों से बड़ी संख्या में श्रद्वालु मन्नत मांगने पहुंचते हैं। प्राकृतिक छटा के बीच चारों ओर फैली पर्वत श्रृंखलाओं व पर्वत की चोटी पर स्थित निरई माता भक्तों को भय एवं दुखों से दूर रखती है।

40निरई माता की उंची पहाड़ी में जातरा के एक सप्ताह पूर्व प्रकाश पुंज ज्योति के समान चमकता हैं। चैत नवरात्रि के प्रथम सप्ताह रविवार को जातरा मनाया जाता हैं। जातरा के दिन गरियाबंद, महासमुंद, रायपुर, धमतरी, कुरूद, मगरलोड, सिहावा, नयापारा, राजिम क्षेत्र के हजारों माता भक्तजन श्रध्दा पूर्वक दर्शन करने आते हैं। निरई माता का दर्शन पवित्र मन से किया जाता हैं। माता की बुराई या शराब सेवन किया हुआ व्यक्ति को मधुमक्खियों का कोप भाजन बनना पड़ता है।

क्षेत्र के प्रसिद्ध मां निरई माता मंदिर ग्राम मोहेरा में प्रति वर्ष चैत्र नवरात्र के प्रथम रविवार को जात्रा कार्यक्रम में श्रद्धालु जुटते है। वर्ष में एक दिन ही माता निरई के दरवाजे आम लोगों के लिए खोले जाते हैं। बाकी दिनों में यहां आना प्रतिबंधित होता है।

इस मंदिर में महिलाओं को प्रवेश और पूजा-पाठ की इजाजत नहीं हैं, यहां केवल पुरुष पूजा-पाठ की रीतियों को निभाते हैं। महिलाओं के लिए इस मंदिर का प्रसाद खाना भी वर्जित है, खा लेने पर कुछ न कुछ अनहोनी हो जाती है।

आम जनता अपनी समस्या के निदान एवं मनवांछित वरदान प्राप्त करने दूर दराज से आते हैं। ग्राम पंचायत मोहेरा के पदाधिकारी सहित समस्त ग्रामवासी निरई माता के जातरा पर व्यवस्था में जुटे रहते हैं।

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए khulasaa.in को फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *