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अष्टभुजा धाम, जहाँ होती है खण्डित मूर्तियों की पूजा

हिन्दू धर्म में जहाँ एक ओर खण्डित मूर्तियां यानि कि ऐसी मूर्तियाँ जो कहीं से टूटी हुयी हों, की पूजा करना वर्जित है तो दूसरी तरफ भारत में एक ऐसा मंदिर भी है जहाँ मौजूद लगभग सभी मूर्तियाँ खण्डित हैं और इनकी पूजा भी की जाती है | जी है, आपको जानकार हैरानी होगी कि यह मंदिर भारत में ही मौजूद है, जिससे आज भी कई लोग अनजान हैं | आपको बता दे कि यह मंदिर उत्तरप्रदेश में स्थित है तथा यहाँ मौजूद अधिकांश भगवान व देवियों की मूर्तियों के सिर नहीं है। जहाँ हिन्दू धर्म में खण्डित मूर्तियों की पूजा वर्जित है, वही तक़रीबन 900 सालों से यहाँ इन खण्डित मूर्तियों को संरक्षित कर इनकी पूजा की जा रही है।

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लखनऊ से  170 किमी की दूरी पर स्थित प्रतापगढ़ के गोंडे गांव में यह मंदिर है, जो कि लगभग 900 साल पुराना है तथा इसका नाम अष्टभुजा धाम मंदिर है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर की मूर्तियों के सिर औरंगजेब के आदेश पर काट दिए गये थे, जो कि आज भी बिना सर के यहाँ मौजूद हैं ।

ASI के अनुसार 1699 ई. में औरंगजेब ने इस मंदिर को ध्वस्त करने के आदेश दिए और मंदिर की रक्षा हेतु इस मंदिर के पुजारियों ने मंदिर का मुख्य द्वार मस्जिद के आकार का तैयार करवाया, जिसके फलस्वरूप औरंगजेब के सैनिक भ्रमित हो गये और इस मंदिर की रक्षा हो सकी| कहा जाता है कि तक़रीबन सम्पूर्ण मुगल सेना मंदिर के सामने से गुज़र चुकी थी, परन्तु इनमे से किसी एक की नज़र मंदिर के घंटे पर पड़ गयी, जिसके बाद सैनिको ने मंदिर की सभी मूर्तियों के सिर काट दिए, जो कि उस वक़्त से अब तक वैसी की वैसी है |

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हालाँकि इतिहासकारों और पुरातत्वविद विभाग का मानना है कि इस मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में हुआ था तथा इसका अनुमान इस मंदिर की मंदिर दीवारों,  नक्काशियां और विभिन्न प्रकार की आकृतियों से लगाया जा सकता है | गजेटियर के अनुसार  सोमवंशी क्षत्रिय घराने के राजा द्वारा इस मंदिर का निर्माण करवाये जाने का अनुमान लगाया जाता है । जबकि मंदिर के गेट पर बनीं आकृतियां खजुराहो मंदिर से काफी हद तक मिलती-जुलती हैं।

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चूँकि यहाँ आठ हाथों वाली देवी की मूर्ति मौजूद है अत: इस मंदिर को अष्टभुजा देवी मंदिर के नाम से जाना जाता है । यहाँ के स्थानीय लोगो के अनुसार यहाँ मौजूद अष्टधातु की प्राचीन मूर्ति को 15 साल पहले किसी ने चुरा लिया था, जिसके बाद यहाँ लोगो ने सामूहिक सहयोग से इस मंदिर में अष्टभुजा देवी की पत्थर की मूर्ति की स्थापना की ।

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आपको बता दें कि इस मंदिर के मुख्य द्वार पर कुछ लिखा हुआ है, जिसे किस भाषा में लिखा गया है या क्या लिखा हुआ है, इसका अभी तक कुछ पता नहीं लग पाया है । बड़े बड़े पुरातत्वविद विभाग और इतिहासकार भी इस भाषा को समझने में विफल हो चुके हैं । हालाँकि अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि यह ब्राह्मी लिपि हो सकती है, मगर मुख्य द्वार पर क्या लिखा है, ये अभी तक कोई नहीं जान सका ।

वीडियो में देखिए अष्टभुजा धाम जहां होती है खंडित मूर्तियों की पूजा

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Title: ashtbuja temple jahna hoti hai kahndit murtiyo ki puja in Hindi  | In Category: धर्म कर्म dharm karam

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