बगलामुखी जयंती 2018: ऐसे करें माँ ‘पीताम्बरा’ की उपासना, शत्रु और विरोधियों का होगा सर्वनाश


पौराणिक मान्यताओं के अनुसार बैशाख माह की शुक्ल पक्ष अष्टमी को मां बगुलामुखी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस वर्ष यह शुभ दिन 23 अप्रैल को पड़ रहा है, इस दिन माँ के नाम से ‘बगुलामुखी जयन्ती’ मनायी जाती है । दस महाविद्याओ में इनका आठवां स्थान है। जो भक्त माँ के इस अवतार से अनजान हैं, आज उन्हें भगवती के इस अवतार के बारे में विस्तार से बताते हैं।

शत्रुओ को नष्ट करने वाली तथा परमात्मा की संहार शक्ति का नाम ही माँ बगुलामुखी है, जो कि पीताम्बरा विद्या के नाम से भी विख्यात है। इसके अतिरिक्त इन्हें पीताम्बरा या ब्रह्मास्त्र रूपणी के नाम से भी जाना जाता है। शत्रुभय से मुक्ति, वाक्सिद्धि और वाद-विवाद में विजय के उद्देश्य से ही माँ की उपासना की जाती है, जिसके लिए हल्दी की माला, पीले फूल और पीले वस्त्रों का ही प्रयोग होता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार सतयुग में एक बार इतना भयंकर तूफान आया कि लगने लगा था आज सम्पूर्ण जगत का अंतिम दिन है । सभी प्राणी त्राहिमाम त्राहिमाम कर रहे थे। प्राणियों की ऐसी हालत देख भगवान विष्णु व्यथित हो गए और इस समस्या के समाधान के लिए वो भगवान शंकर के समक्ष उपस्थित हुए । भगवान शिव ने विष्णु जी को बताया कि यदि वो सौराष्ट्र में हरिद्रा सरोवर के निकट माँ भगवती की तपस्या कर उन्हें प्रसन्न कर देते हैं तो ही इस समस्या का निवारण हो सकता है ।

विष्णु जी ने भगवान शंकर द्वारा बताये स्थान पर पहुंचकर माँ की तपस्या करना शुरू कर दिया। माँ भगवती ने विष्णु जी की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें बगलामुखी रूप में दर्शन दिए, साथ ही साथ उन्होने विध्वंसकारी तूफान का तुरंत स्तम्भन कर दिया। मंगलयुक्त चतुर्दशी की अर्धरात्रि में बगलामुखी का प्रादुर्भाव हुआ था।

‘बगुलामुखी जयन्ती’ के अवसर पर प्रातःकाल नियत कर्मों से निवृत होकर पीले रंग का वस्त्र धारण कर व्यक्ति को अकेले या किसी सिद्ध पुरूष के साथ बैठ माता बगलामुखी का पूजन व जप करना चाहिए। याद रहे कि गंगाजल से पूजा स्थल को पवित्र कर लें, उसी के बाद पूजा करना शुरू करें । इसके बाद वहां एक चौकी रख माता बगलामुखी की प्रतिमूर्ति को स्थापित कर हाथ में पीले चावल, हरिद्रा, एवं पीले फूल, दक्षिणा लेकर माँ के व्रत का संकल्प करें। धूप, दीप एवं पीले फल, पीले फूल व पीले मीठे का भोग माँ को लगायें तथा व्रत के दिन व्रती को निराहार रहना होता है, इस बात का विशेष ध्यान रहे । हालाँकि पूजन के बाद रात्रि के समय फलाहार किया जा सकता है।

 

क्यों माना जाना जाता है शनिदेव को सभी ग्रहों में सर्वश्रेष्ठ

कहां है मां कैलादेवी का मंदिर, कौन है मां कैलादेवी

सर्वारिष्ट निवारण स्तोत्र करता है सभी बाधाओं का निवारण

अघोरियों के रहस्यमय संसार की अद्भुत बातें जिनसे होंगे आप आज तक अनजान

भारत के रहस्यमयी मन्दिर, जिनके बारे में जानकर हैरान रह जाएंगे आप

 

 

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए khulasaa.in को फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें

Leave a Reply