धर्म कर्म

मां सरस्वती की वंदना का पर्व है वसंत पंचमी

भारतीय संस्कृति में ऋतुओं का अपना विशेष महत्व है। अलग-अलग ऋतुओं को हमारे जन-जीवन, पर्वों व धर्मिक मान्यताओं से जोड़ा जाता है। वसंत ऋतु का भी अपना महत्व है। वसंत ऋतु में पंचमी तिथि का अपना ही पौराणिक व साहित्यिक महत्व है। सरस्वती देवी को विद्या, ज्ञान, वाणी, संगीत व बुद्धि की देवी माना जाता है। सुरों की देवी की वसंत पंचमी पर देशभर में वंदना की जाती है।

वसंत  पंचमी पर श्रद्धालु जहां देश भर में श्रद्धा तथा उमंग से इस पर्व को मनाते हैं वहीं पौराणिक नगर पिहोवा ;कुरुक्षेत्रा में सरस्वती की विशेष पूजा-अर्चना होती है। पिहोवा को सरस्वती का नगर भी कहा जाता है। क्योंकि यहां प्राचीन समय से ही सरस्वती सरिता प्रवाहित होती रही है। सरस्वती सरिता के तट पर इस क्षेत्रा में अनेक प्राचीन तीर्थ हैं। यहां सरस्वती सरिता के तट पर विश्वामित्र जी ने गायत्री छंद की रचना की थी। पिहोवा का सबसे मुख्य तीर्थ सरस्वती घाट है जहां सरस्वती सरिता बहती है। वहां मां सरस्वती का अति प्राचीन मंदिर है। शताब्दियों प्राचीन इन मंदिरों में देशभर के श्रद्धालु आकर पूजा-अर्चना करते हैं तथा सरस्वती घाट पर स्नान करते हैं। भव्य शोभायात्रा निकलती है।

वसंत  पंचमी का दिन अनेक साहित्यकारों तथा महापुरुषों से भी जुड़ा है। वसंत  पंचमी वाले दिन वीर हकीकत राय जी का वध् इसलिए कर दिया गया था क्योंकि इस वीर बालक ने अपना धर्म त्यागने से इनकार कर दिया था। हिंदी के महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी का जन्मदिवस भी वसंत पंचमी वाले दिन ही मनाया जाता है।

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Title: festival of spring vasant panchami

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