आरती - बड़ी खबरें

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श्री भैरव की आरती

जय भैरव देवा प्रभु जय भैरव देवा। जय काली और गौरा कृतसेवा।। तुम पापी उद्धारक दुख सिन्धु तारक। भक्तों के सुखकारक भीषण वपु धारक।। वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल धारी। महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी।। तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होवे। चतुर्वतिका दीपक दर्शन दुःख खोवे।। तेल चटकी दधि मिश्रित माषवली
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श्रीमद्भागवत पुराण की आरती

आरती अतिपावन पुराण की। धर्म भक्ति विज्ञान खान की।। महापुराण भागवत निर्मल, शुक मुख विगलित निगम कल्ह फल। परमानन्द-सुधा रसमय फल, लीला रति रस रसिनधान की।। आरती श्री मद्भागवत पुराण की… कलिमल मथनि त्रिताप निवारिणी, जन्म मृत्युमय भव भयहारिणी। सेवत सतत सकल सुखकारिणी, सुमहैषधि हरि चरित गान की।। आरती श्री मद्भागवत पुराण की… विषय विलास […]
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श्री गंगा माता की आरती

ऊँ जय गंगे माता, श्री गंगे माता । जो नर तुमको ध्यावत, मनवंछित फल पाता।। ऊँ जय गंगे माता… चन्द्र सी ज्योत तुम्हारी जल निर्मल आता। शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता ।। ऊँ जय गंगे माता… पुत्र सगर के तारे सब जग को ज्ञाता । कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता।। ऊँ […]
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ओम जय जगदीश हरे : विष्णु भगवान की आरती

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ओउम…… जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ओउम…… मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी॥ ओउम…… तुम पूरण परमात्मा, […]
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शनिदेव की आरती

जय जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी। जय जय जय शनि देव… श्याम अंक वक्र-दृष्टि चतुर्भुजाधारी। नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी।। जय जय जय शनि देव… किरीट मुकुट शीश सहज दीपत है लिलारी। मुक्तन की माल गले शोभित बलिहारी।। जय जय जय शनि देव… मोदक और मिष्ठान […]
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भगवान श्रीराम जी की आरती

श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन हरण भव भय दारुणं नव कंजलोचन, कंज मुख, करकंज, पद कंजारुणं।   कंदर्प अगणित अमित छबि नवनीत नीरद सुंदरं। पटपीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमि जनक सुतावरं।।   भजु दीनबंधु दिनेश दानव दैत्यवंश निकंदनं। रघुनन्द आनंदकंद कौशलचंद दशरथ नंदनं ।। सिरा मुकुट कुंडल तिलक चारू उदारु अंग विभूषणं। आजानुभुज शर […]
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भगवान शिव की आरती

ॐ जय शिव ओंकारा, भज जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्ध्दांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा…… एकानन चतुरानन पंचानन राजे। हंसासन, गरुड़ासन, वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा…… दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे। तीनों रुप निरखता त्रिभुवन जन मोहें॥ ॐ जय शिव ओंकारा…… अक्षमाला, बनमाला, मुण्ड़मालाधारी। चंदन, मृदमग सोहें, भोले शशिधारी॥ […]
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श्री कुंजबिहारी की आरती

आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की। गले में बैजन्ती माला, बजावै मुरली मधुर बाला। श्रवन में कुंडल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला। नैनन बीच, बसहि उरबीच, सुरतिया रूप उजारी की ।। श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की। आरती कुंज बिहारी की… गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली। लतन में ठाढ़ै […]