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चैत्र नवरात्र का महत्व व कन्या पूजन की विधि, जानिए

पुराणों के अनुसार एक साल में चार नवरात्रि होते हैं, जिनमे से चैत्र व आश्विन मास में आने वाली नवरात्री को श्रद्धालु बड़े उल्लास के साथ मनाते हैं, जबकि माघ और आषाढ़ में आने वाले नवरात्र गुप्त नवरात्र होते हैं । आपको बता दे कि हिंदू नववर्ष की शुरूआत चैत्र नवरात्र से ही मानी जाती है। वर्ष 2018 में 18 मार्च से 25 मार्च तक नवरात्रें रहने वाले हैं, तथा इसका पारण 26 मार्च को होगा। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के साथ ही देवी पूजन शुरू हो जाता है तथा इसके बाद 9 दिन तक मां के लिए उनके श्रद्धालु व्रत उनकी पूजा करते हैं तथा 9वें दिन कन्या पूजन करने के पश्चात व्रत खोलते है।

चैत्र नवरात्र का महत्व व कन्या पूजन की विधि, जानिए  Importance of Chaitra Navaratri and method of worship of Kanya pujan in hindi

क्यों करते हैं घटस्थापना

अब आप सोच रहे होंगे यह घटस्थापना क्या इसका क्या महत्व है, तो आपको बता दें कि पुराणों के अनुसार  सुख-समृद्धि, वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक के रूप में कलश की स्थापना की जाती है जिसमें कलश के मुख में विष्णुजी, कंठ में रुद्र और मूल में ब्रह्मा का निवास माना जाता है, जबकि कलश के मध्य में दैवीय मातृशक्तियों का निवास माना जाता है इसलिए नवरात्र के विशेष अवसर पर घटस्थापना का महत्व अधिक बढ़ जाता है।

व्रत से मिलता है उत्तम स्वास्थ्य

चूँकि नवरात्रों का आयोजन ऐसे वक़्त पर किया जाता है जब मौसम बदल रहा होता है यानि कि गर्मी की शुरुआत में चैत्र नवरात्रे तो सर्दी की शुरुआत में शारदीय नवरात्रे मनाये जाते हैं। यह ऐसा वक़्त होता है जब मौसम के बदलाव का असर सीधा हमारे शरीर और मन पर पड़ता है, जो हमारे स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। ऐसे में व्रत रखने के कारण हम हल्का भोजन करते है,  जिसके चलते आहार आसानी से पच जाता है और पाचन तंत्र को आराम मिलता है ।

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ज्वार बोने का महत्व

क्या आपने कभी सोचा है कि हम अपने घर में नवरात्रि  के समय ज्वारे या जौ को क्यों बोते हैं तो चलिए आज आपको इसका महत्व भी बता देते हैं, मान्यताओं के अनुसार सृष्टि के सर्जन के बाद पहली फसल जौ ही थी और तब से ही इसे पूर्ण फसल माना गया है और वसंत ऋतू की पहली फसल जौ ही होती है अत; हवन आदि में इसका इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण हो जाता है। इसके अतिरिक्त एक मान्यता यह भी है कि जौ इन्सान के भविष्य से संबंधित बातों की ओर संकेत करते है ऐसे में जौ के तेजी से बढ़ने को घर में सुख-समृद्धि तथा जौ के मुरझाने को अशुभ संकेत माना जाता है।

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कन्या पूजन का विशेष महत्व

इसके अतिरिक्त नवरात्रों में कन्या पूजन का भी विशेष महत्व है, जिसके चलते नवरात्रे की अष्टमी या नवमी के दिन 9 कुंवारी कन्याओं को घर बुलाकर उनकी सेवा की जाती है तथा उन्हें भोजन करा के दक्षिणा और भेंट भी दी जाती है।

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मां के नौ रूप

मार्कण्डेय-पुराण के अनुसार माँ दुर्गा के नौ रूप बताये गए हैं जिसे एक श्लोक के रूप में लिखा गया है जो कि है -

प्रथमं   शैलपुत्री   च द्वितया    ब्रह्मचारिणी |

तृतीयं   चन्द्रघण्टेति,   कुष्मंडेति चतुर्थकम  ||

पंचमं  स्कन्दमातेति  षष्ठं   कात्यायनीति च  |

सप्तं  कालरात्रीति   महागौरीति   चाष्टकम्  ||

नवं    सिद्दिदात्री   च  नव   दुर्गा प्रकीर्तिता:  ||

अर्थात नवरात्रों का पहला दिन शैलपुत्री माँ का, जबकि  दूसरा दिन ब्रह्मचारिणी का होता है । जबकि  तीसरा दिन चन्द्रघंटा माँ का होता है तथा क्रमशः चौथे व पांचवे दिन कुष्मांडा और  स्कंदमाता की पूजा की जाती है।  छठे दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि , आठवें दिन , महागौरी और अंतिम व  नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है और यही माँ के नौ रूप है, जिनकी इसी क्रम में विधि-विधानपूर्वक पूजा की जाती है ।

 

 

 

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Title: importance of chaitra navaratri and method of worship of kanya pujan in hindi in Hindi  | In Category: धर्म कर्म dharm karam

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