श्रावण मास में श्री गणेश पूजन से भी होता है विशेष लाभ


श्रावण माह मूल रूप से भगवान शिव का माना जाता है परन्तु पुराणों के अनुसार इसी माह में श्री गणेश, माता पार्वती और श्री कृष्ण की पूजा भी शुभ फलदायक होती है। माना जाता है कि इस माह में भगवान श्री गणेश के कुछ विशेष मन्त्र है जिनका जाप फलदायी होता है |

सबसे सरल और फलदायी मन्त्र है  –

गजाननं भूतगणदिसेवितं कपिस्थ जम्बू फल चारुन भक्षणम्।

उमासुतं शोक विनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम्।।    

अर्थात जिनका मुख हाथी जैसा है, भूत-गण जिनकी सेवा करते है, कैथ एवं जामुन जिन्हें पसंद है, दुखो का नाश करने वाले, उमा-पुत्र को मैं नमस्कार करता हूं | विघ्नों का नाश करने वाले श्री गणेश के चरण-कमलों को मैं प्रणाम करता हूँ ।

वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ:।

निर्विध्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

अर्थात  हे गणेश जी! आप महाकाय हैं व आपकी सूंड वक्र के आकर की है। करोडो सूर्य समान आपका तेज़ है । मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप मेरे सारे कार्य निर्विध्न पूरा करें।

रक्ष-रक्ष गणाध्यक्ष रक्ष त्रैलोक्य रक्षक।

भक्तानामभयं कर्त्ता त्राताभव भवार्णवात्।। 

अर्थात हे गणाध्यक्ष ! मेरी रक्षा कीजिए, प्रभु रक्षा कीजिये । तीनो लोक के रक्षक मेरी रक्षा कीजिए; आप भक्तों को अभय प्रदान करने वाले हैं,  इस भवसागर से मेरी रक्षा कीजिये ।

 विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय,

लम्बोदराय सकलाय जगद्विताय

नागाननाय श्रुतियज्ञ विभूषिताय

गौरी सुताय नमस्तुभ्यं सततं मोदक प्रिय।

लम्बोदरं नमस्तुभ्यं सततं मोदक प्रिय।

निर्विघ्नं कुरुमेदेव, सर्व कार्येषु सर्वदा।

अर्थात विघ्नों को हरने वाले, वर देने वाले, जो देवताओं को भी प्रिय है , जो लम्बोदर है, सम्पूर्ण कलाओं से परिपूर्ण, संसार का हित करने वाले, हाथी के समान मुख वाले और वेद तथा यज्ञ से विभूषित पार्वती-पुत्र को मेरा नमस्कार है;  हे गणनाथ ! आपको नमस्कार है ।

 

 

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