जानिए कुंडली के किस भाव का शनि देता है कैसा फल


यह बात तो हम सभी जानते है कि हमारी कुंडली नौ ग्रहों से प्रभावित होती है और इन नौ ग्रहो में सबसे ज्यादा प्रभावशाली ग्रह शनि है । इसके अलावा हमारे ग्रंथो में शनि को न्यायाधीश भी माना गया है, यानी कि कर्मों के हिसाब से ही यह ग्रह फल देता है। हमारी कुंडली में ग्रहों की दशा और भाव ही हमारे जीवन में सुख-दुःख का निर्णय करते हैं | ऐसे में शनि किस भाव में हमे कैसा फल देता है, ये जानना बेहद आवश्यक है | तो चलिए आज जानते हैं कि कुंडली में शनि की स्थिति का हमारे जीवन पर क्या फर्क पड़ता है

यदि शनि प्रथम भाव में है तो ऐसा व्यक्ति किसी राजा की तरह जीवन व्यतीत करता है, जबकि यदि प्रथम भाव में रहते हुए शनि अशुभ फल देने वाला है तो ऐसा व्यक्ति रोगी, गरीब और गलत कार्य करने वाला होता है, जबकि दूसरे भाव में शनि का होना मनुष्य को लालची प्रवृति का बना देता है, देखा गया है कि इस प्रकार के लोग विदेश में जाकर धनोपार्जन करते हैं।

शनि यदि तीसरे भाव में है तो व्यक्ति संस्कारी, सुंदर शरीर वाला होगा, मगर याद रहे कि वो थोड़ा आलसी सवभाव का भी होगा, जबकि चतुर्थ भाव में शनि की उपस्थिति मनुष्य को अधिकांशत: बीमार और दुखी रखती है।

व्यक्ति का दुखी रहना व दिमाग से संबंधित कामों में परेशानियों झेलना शनि के पंचम भाव में उपस्थिति दर्ज कराती है । हालाँकि षष्ठ भाव में मौजूद शनि मनुष्य को सुंदर, साहसी और खाने का शौकीन बनाता है।

शनि जिसकी कुंडली में सप्तम भाव में स्थित होता है वो व्यक्ति अधिकांशत: बीमार और  गरीब रहता है, इनका वैवाहिक जीवन भी अशांति से भरा होता है, जबकि जिन कुंडलियों में शनि अष्टम भाव स्थित होता है उन जातको को अपने कार्यों में जल्दी से सफलता नहीं मिलती और कभी कभी जीवन में भयंकर परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है।

ऐसे जातक जिनकी कुंडली के नवम भाव में शनि उपस्थित होता है, वो धर्म-कर्म में विश्वास नहीं करते, हालाँकि जीवन के अधिकांशत: इनके पास पैसे की कमी रहती है, ठीक इसके विपरीत दशम भाव में शनि की उपस्थिति वाले जातक होती है, ऐसे व्यक्ति धार्मिक होने के साथ साथ धनवान भी होते है तथा नौकरी में इन्हें उच्चे पद की प्राप्ति होगी |

ग्याहरवें भाव का शनि जातक को लंबी आयु, धन, कल्पनाशील और स्वस्थ रखता है, जिसके चलते इन्हें दुनिया के सभी सुखो की प्राप्ति होती हैं, जबकि द्वादश भाव में शनि की उपस्थिति मनुष्य को अशांत स्वभाव का बनाता है।

तो आपको पता चल ही गया होगा कि किस भाव में शनि की उपस्थिति कैसा प्रभाव दिखाती है, यदि आप भी शनि के कारण कष्ट झेल रहे है तो आप कुछ सरल उपाय कर के शनि दोष को कम या खत्म कर सकते है | ऐसे जातको को हर शनिवार तेल का दान करना चाहिए तथा हर शनिवार पीपल की पूजा कर उसकी सात बार परिक्रमा करनी चाहिए ।

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