ज्योतिष

जन्मकुंडली के किस भाव में देता है शनि कैसा फल

यह बात तो हम सभी जानते है कि हमारी कुंडली नौ ग्रहों से प्रभावित होती है और इन नौ ग्रहो में सबसे ज्यादा प्रभावशाली ग्रह शनि है । इसके अलावा हमारे ग्रंथो में शनि को न्यायाधीश भी माना गया है, यानी कि कर्मों के हिसाब से ही यह ग्रह फल देता है हमारी कुंडली में ग्रहों की दशा और भाव ही हमारे जीवन में सुख-दुःख का निर्णय करते हैं । ऐसे में शनि किस भाव में हमे कैसा फल देता है, ये जानना बेहद आवश्यक है ।

वैदिक ज्योतिष में माना जाता है कि शनि कुंडली के बारह भावों पर अपना अलग अलग प्रभाव डालता है। चूंकि शनि को एक क्रूर ग्रह की संज्ञा दी गई है इसीलिए जन्मकुंडली में शनि मजबूत होने पर जहां जातक को अच्छे परिणाम देता है वहीं कमजोर होने पर अशुभ फलों की भी प्राप्ति हो सकती है। आइए खुलासा डॉट इन में विस्तार से जानते हैं शनि ग्रह के कुंडली के विभिन्न भावों में होने पर जातक पर कैसा प्रभाव पड़ता है।

कुंडली के प्रथम भाव में शनि का फल

यदि शनि प्रथम भाव में है तो ऐसा व्यक्ति किसी राजा की तरह जीवन व्यतीत करता है, जबकि यदि प्रथम भाव में रहते हुए शनि अशुभ फल देने वाला है तो ऐसा व्यक्ति रोगी, गरीब और गलत कार्य करने वाला होता है। विस्तार से जानने के लिए पढ़े हमारी पोस्ट जन्मकुंडली के प्रथम भाव में शनि का फल (shani in 1st house in kundli (Vedic Astrology))

कुंडली के दूसरे भाव में शनि का फल

दूसरे भाव में शनि का होना मनुष्य को लालची प्रवृति का बना देता है, देखा गया है कि इस प्रकार के लोग विदेश में जाकर धनोपार्जन करते हैं। ऐसे लोग मीठी मीठी बातें करने में भी माहिर होते हैं और अपना काम निकाल लेते हैं। विस्तार से जानने के लिए पढ़े जन्मकुंडली के द्वितीय भाव में शनि का फल (Shani in 2nd house in Kundli(Vedic Astrology))

कुंडली के तीसरे भाव में शनि का फल

शनि यदि तीसरे भाव में है तो व्यक्ति संस्कारी, सुंदर शरीर वाला होगा, मगर याद रहे कि वो थोड़ा आलसी सवभाव का भी होगा, विस्तार से जानने के लिए पढ़ें जन्मकुंडली के तृतीय भाव में शनि का फल (Shani in 3rd House in Kundli (Vedic Astrology))

कुंडली के चौथे भाव में शनि का फल

चतुर्थ भाव में शनि की उपस्थिति मनुष्य को अधिकांशत: बीमार और दुखी रखती है। ऐसा जातक घर से दूर विदेश में बहुत तरक्की करता है। विस्तार से जानने के लिए पढ़ें जन्मकुंडली के चतुर्थ भाव में शनि का फल (Shani in 4th House in Kundli (Vedic Astrology))

कुंडली के पंचम भाव में शनि का फल

व्यक्ति का दुखी रहना व दिमाग से संबंधित कामों में परेशानियों झेलना शनि के पंचम भाव में उपस्थिति दर्ज कराती है । यहां स्थित शनि जातक को मनमौजी और चंचल बनाता है। यद्यपि जातक काफी धार्मिक होता है। विस्तार से जानने के लिए पढ़ें जन्मकुंडली के पंचम भाव में शनि का फल (Shani in 5th House in Kundli (Vedic Astrology))

कुंडली के षष्ठ भाव में शनि का फल

षष्ठ भाव में मौजूद शनि मनुष्य को सुंदर, साहसी और खाने का शौकीन बनाता है। ऐसे जातक बाते बनाने में बहुत कुशल होते हैं और ऐसे जातकों के पास खूब नौकर चाकर और धन संपदा होती है। जन्मकुंडली के षष्ठ भाव में शनि का फल (Shani in 6th House in Kundli (Vedic Astrology))

कुंडली के सप्तम भाव में शनि का फल

शनि जिसकी कुंडली में सप्तम भाव में स्थित होता है वो व्यक्ति अधिकांशत: बीमार और  गरीब रहता है, इनका वैवाहिक जीवन भी अशांति से भरा होता है। ऐसे जातकों को बचपन में कष्ट का सामना करना पड़ता है। विस्तार से जानने के लिए पढ़ें जन्मकुंडली के सप्तम भाव में शनि का फल (Shani in 7th House in Kundli (Vedic Astrology))

कुंडली के अष्टम भाव में शनि का फल

कुंडलियों में शनि अष्टम भाव स्थित होता है उन जातको को अपने कार्यों में जल्दी से सफलता नहीं मिलती और कभी कभी जीवन में भयंकर परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है। विस्तार से जानने के लिए पढ़े जन्मकुंडली के अष्टम भाव में शनि का फल (Shani in 8th House in Kundli (Vedic Astrology))

 कुंडली के नवम भाव में शनि का फल

ऐसे जातक जिनकी कुंडली के नवम भाव में शनि उपस्थित होता है, वो धर्म-कर्म में विश्वास नहीं करते, हालाँकि जीवन के अधिकांशत: इनके पास पैसे की कमी रहती है, विस्तार से जानने के लिए पढ़ें जन्मकुंडली के नवम भाव में शनि का फल (Shani in 9th House in Kundli (Vedic Astrology))

कुंडली के दशम भाव में शनि का फल

दशम भाव में शनि की उपस्थिति वाले जातक होती है, ऐसे व्यक्ति धार्मिक होने के साथ साथ धनवान भी होते है तथा नौकरी में इन्हें उच्चे पद की प्राप्ति होगी । ऐसे जातक पुण्यात्मा होते हैं और धर्मकर्म के कामों में रुचि लेते हैं। विस्तार से जानने के लिए पढ़ें जन्मकुंडली के दशम भाव में शनि का फल (Shani in 10th House in Kundli (Vedic Astrology))

कुंडली के एकादश भाव में शनि का फल

ग्याहरवें भाव का शनि जातक को लंबी आयु, धन, कल्पनाशील और स्वस्थ रखता है, जिसके चलते इन्हें दुनिया के सभी सुखों की प्राप्ति होती हैं, विस्तार से जानने के लिए पढ़ें जन्मकुंडली के एकादश भाव में शनि का फल (Shani in 11th House in Kundli (Vedic Astrology))

कुंडली के द्वादश भाव में शनि का फल

द्वादश भाव में शनि की उपस्थिति मनुष्य को अशांत स्वभाव का बनाता है। शनि जातक का बहुत सा धन यज्ञ और धार्मिक कार्यों में खर्च करवाता है। विस्तार से जानने के लिए पढ़ें जन्मकुंडली के द्वादश भाव में शनि का फल (Shani in 12th House in Kundli (Vedic Astrology))

आपको पता चल ही गया होगा कि किस भाव में शनि की उपस्थिति कैसा प्रभाव दिखाती है, यदि आप भी शनि के कारण कष्ट झेल रहे है तो आप कुछ सरल उपाय कर के शनि दोष को कम या खत्म कर सकते है। ऐसे जातको को हर शनिवार तेल का दान करना चाहिए तथा हर शनिवार पीपल की पूजा कर उसकी सात बार परिक्रमा करनी चाहिए ।

 

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Title: saturn shani and its effects on different houses of astrology in hindi

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