ज्योतिष

जन्मकुंडली के छ्टें भाव में स्थित शनि का फल (Saturn in Sixth House In Birth chart)

किसी भी जातक की कुंडली में छठा भाव उसके जीवन में उसके शत्रुओं और उसके प्रतिद्वंदियों को दर्शाता है। छठा भाव जातक को शुत्रओं से होने वाले नुकसान, विवादों, झगड़ें मुकदमें का भी कारक है। यदि किसी जातक की कुंडली में छठे भाव में शुभ ग्रह हैं तो ऐसा जातक जीवन पर्यन्त अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है और सभी प्रकार के विवादों और मुकदमों में भी उसे जीत हासिल होती है।

कुंडली के छठे भाव से जातक को होने वाली बीमारियां और उन पर होने वाले खर्चे के बारे में भी ज्ञात होता है। कुंडली का छठा घर जातक के शरीर के निचले अंगों, जैसे पेट, आंतों तथा गुर्दे का कारक है। इस घर पर क्रूर ग्रहों की दृष्टि जातक को कब्ज, दस्त, कमजोर पाचन शक्ति तथा पेटजनित कई प्रकार के रोग देती है। आइए जानते हैं खुलासा डॉट इन में छठे भाव में बैठै शनि जातक को कैसा फल प्रदान करते हैं।

जन्मकुंडली के छठें भाव में स्थित शनि के फल

छठें भाव में स्थित शनि जातक को अधिकर अच्छे फल ही देते हैं। माना जाता है कि ऐसा जातक जिसकी जन्मकुंडली के छठे भाव में शनि विराजमान हो उसकी पाचनशक्ति बहुत अधिक अच्छी होती है और उसे खूब भूख लगती है, जातक की खाने पीने में अत्याधिक रुचि होती है, जिससे जातक अत्याधिक बलिष्ठ और शक्तिशाली होता है।

जन्मकुंडली के छ्टें भाव में स्थित शनि का फल (Saturn in Sixth House In Birth chart) Shani (Saturn) Sixth House In Birthchart In Hindi

जन्मकुंडली के छ्टें भाव में स्थित शनि का फल

जन्मकुंडली में शनि की यह स्थिति व्यक्ति को वाकपटुता में कुशल और अच्छा वक्ता भी बनाती है। ऐसे व्यक्तियों को तर्क और किसी भी विषय पर शास्त्रार्थ करने में कुशलता प्राप्त होती है। शनि की यह स्थिति जातक को तो शक्तिशाली बनाती ही है, उसके शत्रुओं को भी कमजोर करती है जिससे जातक के सामने उसका कोई शत्रु ज्यादा देर तक ठहर नहीं पाता।

वैदिक ज्योतिष में माना जाता है कि ऐसे जातक जिनकी कुंडली के छठे भाव में शनि स्थित हों ऐसे लोग जीवन में बहुत सारे लोगों को आश्रय प्रदान करते हैं, और सभी का पालन पोषण करते हैं। यहां स्थित शनि जातक को खूब धन संपदा और नौकर चौकर देते हैं। शनि की यह अवस्था जातक को हर तरह से निर्भीकता भी प्रदान करती है और जातक जीवन में किसी भी प्रकार का भय नहीं सताता।

छठे भाव में स्थित शनि यदि खराब प्रभाव में हो तो जातक निरर्थक अभिमान करता है और अपने आगे किसी की नहीं चलने देता। ऐसे जातकों को जहां तक संभव हो विषयवासनाओं से दूर रहना चाहिए और अपना चरित्र उत्तम रखना चाहिए, इससे शनि देव इन्हें सम्पत्ति, मान सम्मान और यश देंगे।

 

कुंडली के अन्य भावों में शनि का फल देखें

जन्मकुंडली के प्रथम भाव में शनि का फल (shani in 1st house in kundli (Vedic Astrology))
जन्मकुंडली के द्वितीय भाव में शनि का फल (Shani in 2nd house in Kundli(Vedic Astrology))
जन्मकुंडली के तृतीय भाव में शनि का फल (Shani in 3rd House in Kundli (Vedic Astrology))
जन्मकुंडली के चतुर्थ भाव में शनि का फल (Shani in 4th House in Kundli (Vedic Astrology))
जन्मकुंडली के पंचम भाव में शनि का फल (Shani in 5th House in Kundli (Vedic Astrology))
जन्मकुंडली के सप्तम भाव में शनि का फल (Shani in 7th House in Kundli (Vedic Astrology))
जन्मकुंडली के अष्टम भाव में शनि का फल (Shani in 8th House in Kundli (Vedic Astrology))
जन्मकुंडली के नवम भाव में शनि का फल (Shani in 9th House in Kundli (Vedic Astrology))
जन्मकुंडली के दशम भाव में शनि का फल (Shani in 10th House in Kundli (Vedic Astrology))
जन्मकुंडली के एकादश भाव में शनि का फल (Shani in 11th House in Kundli (Vedic Astrology))
जन्मकुंडली के द्वादश भाव में शनि का फल (Shani in 12th House in Kundli (Vedic Astrology))
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Title: shani saturn sixth house in birthchart in hindi in Hindi  | In Category: ज्योतिष jyotish

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