नवरात्रों में कैसे की जाती है कलश की स्थापना


आत्‍मशुद्ध‍ि और मुक्‍त‍ि के आधार माने जाने वाले चैत्र नवरात्रे इस वर्ष 18 मार्च से प्रारम्भ हो रहे है । मान्यता है कि चैत्र नवरात्रों में माँ शक्ति की उपासना व ध्यान लगाने से घर में साकारत्मकता बढ़ती है और नाकारात्मकता को उस घर से दूर जाना पड़ता है ।

इस वर्ष चैत्र नवरात्रे 18 मार्च से 25 मार्च तक है, जिनमे माँ आदि शक्ति के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है, जिससे माँ प्रसन्न हो अपने भक्तो पर अपनी कृपा बरसाती है ।

ज्‍योतिष शास्त्र के अनुसार इस समय सूर्य का राशि परिवर्तन होता है, जिसके प्रभाव से चैत्र नवरात्रे विशेष महत्व रखते हैं। चूँकि 12 राशियों का चक्कर लगाने के बाद सूर्य दुबारा से मेष राशि में प्रवेश कर नये चक्र की बुनियाद रखते हैं अत: इस दिन को हिन्दू नव वर्ष की शुरुआत भी माना जाता है । गौर कीजिये तो आप पाएंगे कि फाइनेंशियल ईयर भी इसी माह में शुरू होते  हैं।

चूँकि चैत्र माह में मौसम में परिवर्तन होने लगता है, और मौसम सर्द से गरम होने लगता है, जिसका प्रभाव मनुष्य के शरीर और मन दोनों पर पड़ता है । कई बार ऐसे मौसम में बीमारी भी इन्सान को जकड लेती है ऐसे में चैत्र माह के नवरात्रों में रखे जाने वाले व्रत शरीर व मन के लिए हितकारी साबित होते हैं।

कलश स्थापना कैसे की जाए ?

आपको बता दें कि नवरात्रि की शुरुआत अन्य त्यौहारों की ही तरह घर में साफ सफाई से होती है, परन्तु उस स्थान को विशेष महत्व दिया जाता है जहाँ पर कलश की स्थापना करनी हो । जिनके घर मिट्टी के बने होते है वो गाय के गोबर से लीपकर पवित्र कर लेते हैं । यदि आप पक्के मकान में रहते हैं तो आप चयनित स्थान पर सफाई करने के बाद वहां गंगाजल छिड़कने के बाद वहां कलश की स्‍थापना करें । एक बात का विशेष ध्यान रहे कि कलश स्थापना व पूजा के लिए साफ़ बर्तनों का ही प्रयोग करे । इसके बाद उस स्‍थान पर लकड़ी का पटरा रख उस पर नया लाल कपड़ा बिछा लेना चाहिए तथा मिट्टी के बर्तन में जौ बो ले और इसी बर्तन के बीच में जल से भरा हुआ कलश भी रखें।

एक बात का ध्यान रखे कि कलश का कभी मुंह खुला ना छोड़ें और कलश पर रखे ढक्कन पर चावल या गेंहूं से भर दें तथा इसके ऊपर नारियल रखें और कलश के पास दीपक जला लें ।

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