धर्म कर्म

सावन में महामृत्युंजय मंत्र का पुरश्चरण करने से मिलता है विशेष लाभ

श्रावण मास महामृत्युंजय मंत्र का पुरश्चरण सुख-समृद्धि, पद-प्रतिष्ठा, धन व आरोग्य प्रदान करता है इसीलिए श्रावण मास में महामृत्युंजय मंत्र का पुरश्चरण कराना श्रेयस्कर होता है। परन्तु मंत्र जप करना जितना सामान्य व सरल विधि है, मंत्र का पुरश्चरण उतना ही कठिन कार्य है।

जप, हवन, तर्पण, मार्जन व ब्राह्मण भोज पुरश्चरण के प्रमुख अंग है | महामृत्युंजय मंत्र में सवा लाख जाप से ही पुरश्चरण होता है और इनमे ॐ और नम: को छोड़कर जप संख्या निर्धारित मंत्र के अक्षरों की संख्या पर निर्भर होती है | जप संख्या निश्चित होने के बाद जप का दशांश हवन, हवन का दशांश तर्पण, तर्पण का दशांश मार्जन, मार्जन का दशांश ब्राह्मण भोज कराने के बाद ही पुरश्चरण पूर्ण होता है |

महामृत्युञ्जय की तरह ही लघु मृत्युंजय मन्त्र होता है, दोनों में मात्र जप संख्या का अंतर है, जहाँ महा मृत्युंजय पुरश्चरण सवा लाख जप का होता है, वही लघु मृत्युंजय में 11 लाख जप होते  है। दोनों का फल समान है।

पुरश्चरण करते वक्त हवन में बोले गए हर मंत्र के अंत में ‘स्वाहा’ का उच्चारण जरुर करे तथा तर्पण करते समय मंत्र के अंत  में ‘तर्पयामी’ जरुर बोले व मार्जन करते समय मंत्र के अंत  में ‘मार्जयामि’ बोलना अतिआवश्यक होता है |

 

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Title: purification of mahamrityunjaya mantra give good result in savan in Hindi  | In Category: धर्म कर्म dharm karam

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