धर्म कर्म

सोलह सोमवार के व्रत में भोजन का भी होता  विशेष महत्व

सोलह सोमवार के व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है अत: इस व्रत में अविवाहित कन्याएं मनवांछित वर की कामना, तो विवाहित महिलाएं जीवन में सुख, शांति व समृद्धि की कामना के साथ इस व्रत को रखती है । भगवान शिव की आराधना के लिए किये जाने वाला यह उपवास यदि सावन माह के बीच में पड़ जाएं तो इसका महत्व और बढ़ जाता है।

सोलह सोमवार के व्रत का भोजन

सोलह सोमवार के व्रत में भोजन का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए, जो कि भगवान शिव के  प्रसाद का ही रूप माना जाता है। अत: इस लेख में हम आपको बताएँगे कि आपको सोलह सोमवार के व्रत में किस प्रकार का भोजन लेना चाहिए, विस्तार से जानने के लिए स्लाइड दर स्लाइड इस आलेख को पढ़े

कैसा हो व्रत का भोजन

आमतौर पर सोलह सोमवार के व्रत का भोजन सोमवार के व्रत से भिन्न होता है। इस व्रत को रखने वाली महिला या पुरुष को पहले ही तय करना होता है कि उसे किस आहार का व्रत रखना है। यदि किसी विशेष कार्य की पूर्ति की कामना के साथ आप व्रत कर रहे हैं तो पहले ही यह तय करना होगा कि उसे व्रत के दौरान प्रसाद रूप में किस आहार को ग्रहण करना है।

व्रत के भोजन के तीन हिस्से

सोलह सोमवार के व्रत को रखने वाले मनुष्य को व्रत में तैयार किये गए प्रसाद की एक निश्चित मात्रा रखनी होती है तथा तैयार प्रसाद को तीन हिस्सों में बाँट लेना चाहिए, जिसमें से पहला हिस्सा भगवान भोले शंकर का तथा दूसरा हिस्सा नंदी का होता है। वहीं तीसरे हिस्से को व्रती प्रसाद के रुप मे वितरित करने के पश्चात स्वंय ग्रहण करता है। यहीं व्रती का सोलह सोमवार के व्रत का भोजन होता है।

सोलह सोमवार में भोजन के विकल्प

कोई भी मनुष्य, चाहे वो पुरुष हो या स्त्री, उसे सोलह सोमवार के व्रत संकल्प लेते समय ही इस बात को भी निश्चित करना होता है कि इस व्रत के दौरान प्रसाद रूप में किस भोजन को ग्रहण करेगा। जैसे उत्तर भारत में इस व्रत के दौरान चूरमे के लड्डुओं का संकल्प अत्याधिक लिया जाता है । तो कहीं कहीं पर व्रती किसी फल जैसे केले या सेब का संकल्प लेकर व्रत रखते हैं। वहीँ कुछ लोग बर्फी का संकल्प ले व्रत रखते हुए पाए जाते है।

निश्चित मात्रा में भोजन ग्रहण करते हैं

इस व्रत में कौन सा आहार ग्रहण करना है इस बात को निश्चित करने के साथ साथ यह भी निश्चित करना होता है कि कितनी मात्रा में आहार ग्रहण करना है । मान लीजिये आपने चूरमे के लड्डुओं का उपवास रखा है तो आपको व्रत वाले दिन 750 ग्राम आटे के परांठे बनाने होंगे। इन परांठो के छोटे-छोटे टुकड़े करके इनमें चीनी या गुड़ से बनी चाश्नी को मिला लें।

दिन का आहार

सोलह सोमवार के व्रत के समय सूर्यास्त के बाद प्रसाद ग्रहण करने से पूर्व आप दिन में एक बार मूंगफली या मखाने का हल्का सेवन कर सकते हैं, इसके अतिरिक्त दिन भर में पानी बार बार जरूर पीते रहे ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। साथ ही साथ आप दिन भर भगवान शिव का स्मरण कर ‘ऊं नम: शिवाय’ का जाप करते रहना चाहिए ।

व्रत सूर्योदय से शुरू होकर तीसरे पहर तक रखा जाता है

सोलह सोमवार के व्रत में सूर्यास्त के बाद यानी कि शाम के समय में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करनी चाहिए तथा इसके बाद ही प्रसाद ग्रहण करना चाहिए । सोलह सोमवार का व्रत हमेशा सूर्योदय से शुरू होकर तीसरे पहर तक रखा जाता है ।

व्रत का तरीका

व्रती को शाम के समय भगवान शिव की पूजा कर लेने के बाद व्रत की कथा का पाठ करना चाहिए या इसे सुनना चाहिए, ऐसा करना बेहद जरूरी है। इतना ही नहीं व्रती को दिन में एक ही बार शाम के समय सुबह में तैयार किया गया भोजन करना चाहिए व भोजन का समय सूर्यास्त के बाद का ही होना चाहिए।

मन को रखे प्रसन्न

यदि आप सोलह सोमवार के व्रत रख रहे है तो यह जरुरी है कि आप अपने मन को प्रसन्न रखे । व्रत वाले दिन व्रती को सुबह भोर फटने के साथ ही स्नान कर सफेद या हरे वस्त्र धारण कर लेने चाहिए। साथ ही साथ इस बात का ध्यान भी रखे कि आप इस दिन खुद को क्रोध, ईष्र्या व चुगली आदि से खुद को दूर रखे । स्वयं को शिवमय (कल्याणकारी) मान दिन भर शिव के पंचाक्षरी मंत्र का मन ही मन जाप करते रहें।

 

 

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Title: solah somvar vrat food in hindi | In Category: धर्म कर्म  ( dharm karam )

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