26 साल बाद सावन में बन रहे हैं विशेष योग, शिव पूजन से होगा विशेष लाभ


वैसे तो वर्ष में कभी भी शिव की पूजा की जा सकती है, लेकिन सावन माह में शिव पूजन महत्वपूर्ण बताया जाता है। पुराणों में इस मास की बहुत अधिक महिमा बतायी गई है। पौराणिक धर्मग्रंथों में बैसाख मास, श्रावण मास, कार्तिक मास एवं माघ मास को विशेष बताया गया है। सावन का महीना भगवान शिव को अतिप्रिय है तथा शिव भक्तों को भी सावन का बेसब्री से इन्तजार रहता है। 26 वर्षो के बाद इस साल सावन में शिव महाजयंती योग बन रहा है। क्योंकि इस वर्ष सावन का प्रारंभ और अंत सोमवार को हो रहा है। इस वर्ष सावन में पांच सोमवार हैं जिसके कारण ये सावन विशेष रूप से फलदायी है।

ज्योतिषाचार्य एवं अग्नि अखाड़े के साधक पंडित श्री चंद्रशेखर शास्त्री बताते हैं कि यह सावन भक्तों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं इस माह कुछ ऐसे विशेष योग हैं जिनमें शिव का पूजन करने से मनवांछित फलों की प्राप्ति सुलभ ही हो जाएगी। उन्होंने बताया कि श्रावण माह के दो सोमवार का योग नंदा तिथि में हैं जो विशेष रूप से फलदायी हैं। इन दिनों में रूद्राभिषेक से भक्तों को बहुत लाभ होगा। उन्होंने बताया कि 11 जुलाई को अपरान्ह 03 बजे मंगल जलतत्व राशि कर्क में प्रवेश करेगा जिससे वर्षा की अधिकता एवं उथल-पथल आदि की संभावना है।

इस महीने में व्यक्ति जितना अधिक महामृत्युंजय मन्त्र का जाप, शिवसहस्त्रनाम, रूद्राभिषेक, शिवमहिम्न स्त्रोत, महामृत्युंजय सहस्त्रनाम आदि मंत्रों का जाप कर सके उतना श्रेष्ठ रहता है । स्कन्द पुराण के अनुसार प्रत्येक दिन एक अध्याय का पाठ करना चाहिए। यह माह मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला है। शिव पर बिल्ब पत्र प्रतिदिन निश्चित संख्या में (5, 11, 21, 51, 108) तथा अर्क पुष्प नियमपूर्वक चढ़ाने चाहिए । इस माह में मंत्रों षड्अक्षर शिव मंत्र “ऊँ नमः शिवाय” का पुनःश्चरण भी अति उत्तम है, इस माह में बिल्बवृक्ष तथा कल्पवृक्ष का भी पूजन करना उत्तम होता है।

श्रावण मास के सोमवारों में शिव जी के व्रतों एवं पूजा का विशेष विधान एवं महत्व होते है तथा व्रत शुभ फलदायी होते हैं। इस व्रत में शिव-पार्वती का ध्यान करते हुए शिव जी का पंचाक्षर मंत्र का जाप करना चाहिए तथा एक समय का भोजन ही करना चाहिए । श्री गणेश जी, शिव जी, पार्वती जी तथा नंदी की पूजा सावन के प्रत्येक सोमवार को विधि विधान पूर्वक करना चाहिए। शिव जी की पूजा में जल, दूध, दही, चीनी, घी, शहद, पंचामृत, कलावा, वस्त्र, यज्ञोपवि, चन्दन, रोली, चावल, फूल, बिल्ब पत्र, दूर्वा, आक, धतूरा, कमलकट्टा, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, पंचमेवा, धूप, दीप, दक्षिणा सहित पूजा करना फलदायी होता है  व कपूर से आरती करके भजन कीर्तन और रात्रि जागरण भी करना चाहिए। पूजन के बाद शिव जी का रूद्राभिषेक भी करना चाहिए, ये सबसे आसान तरीका है भोले भगवान शिव को शीघ्र ही प्रसन्न कर के मनोकामनायें करवाने का हैं। सोमवार का व्रत करने से पुत्र, धन, विद्या आदि मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।


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