ये नहीं देखा, तो कुछ नही देखा रूस में


रूस, जो कि विश्व का सबसे बड़ा देश है, को ऐतिहासिक इमारतों, निर्जन प्राकृतिक दृश्यों और आधुनिक शहरों की अपूर्व छटा का अद्भुत आनन्द के लिए पुरे विश्व में जाना जाता है | रूस हमेशा से विदेशी पर्यटकों की पसंद रहा है। भारत से भी अधिकांश पर्यटक सिर्फ़ मास्को और सेण्ट पीटर्सबर्ग घूमने के लिए आते है | विभिन्न विविधताओं से भरे होने के कारण रूस भारतीय पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करता है |

 

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ख़बारव्स्क मास्को से 8 हज़ार 3 सौ 25 किलोमीटर दूर पूर्व दिशा में ख़बारव्स्क शहर स्थित है, जिसे ’एशिया का सबसे अधिक यूरोपीय शहर’ कहा जाता है। इस शहर की स्थापना 1858 में की गई थी | यह शहर अमूर नदी के किनारे बसा हुआ है | 19वीं सदी की वास्तुकला, मनोहर संग्रहालयों और नदी के किनारे-किनारे बने सुन्दर चक्रमण पथ को बड़े मनोहारी ढंग से फिर पुनर्जीवित किया गया है | ख़बारव्स्क के नज़दीक स्थित घने जंगलों में अमूर बाघ और अमूर हिम तेन्दुए भी पाए जाते हैं | हवाई यात्रा द्वारा मास्को से ख़बारव्स्क का सफ़र मात्र नौ घण्टे का हैं जबकि ट्राँस साइबेरियाई रेलवे की ट्रेन से मास्को से ख़बारव्स्क का सफ़र सात दिन का हो जाता हैं | रेलवे द्वारा यात्रा करने पर रूस के विस्तृत भूभाग को देखने का अवसर मिल जाता है। जब इस यात्रा पर निकले तो दो-चार दिन के लिए व्लदीवस्तोक शहर में रुक कर इस ऐतिहासिक बन्दरगाह को देखना चाहिए, इस शहर को पूर्वी एशिया की तरफ़ से रूस का प्रवेश-द्वारा माना जाता है।

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यरास्लाव्ल सुनहरी अँगूठी के नाम से प्रसिद्ध शहरों की एक श्रंखला है, जो वोल्गा नदी और मध्य रूस के स्थित है, यदि रूस की यात्रा का भरपूर मज्जे लेने हो तो इन शहरों में से किसी एक शहर की यात्रा जरुर करे | सुनहरी अँगूठी की राजधानी यरास्लाव्ल शहर कहलाता है। यरास्लाव्ल के गिरजों में अनेक सदियों से होते आये वास्तुकला शैलियों के बदलावों को आसानी से देखा जा सकता है, इसलिए इस शहर को जीवन्त सँग्रहालय भी माना जाता है | यरास्लाव्ल का केन्द्र यूनेस्को की विश्व विरासत स्मारकों की सूची में भी शामिल है। उत्तम वास्तुकला के उत्कृष्ट नमूने इस शहर में मौजूद हैं। यदि रूस के ग्रामीण क्षेत्रों को देखने का आप लुफ्त उठाना चाहते है तो विशाल वोल्गा नदी में क्रूज की सवारी इसका सरल और आनंदमयी तरीका है । मास्को से यरास्लाव्ल रेल यात्रा द्वारा तीन घण्टे में पंहुचा जा सकता हैं। यहाँ की सुन्दरता का भरपूर आनंद उठाने के लिए एक दिन कम पड़ जाता है |

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करेलिया फ़िनलैण्ड और रूस की सीमा पर स्थित करेलिया एक अनूठा स्थान है जो जीवन की दौड़-भाग से कुछ समय के लिए आपको मुक्ति दिला देती है | चारो तरफ घने जंगल, हज़ारों झीले, मनोहर द्वीपों और बहुत कम आबादी वाला एक अत्यधिक निर्जन प्रदेश है, जहा प्रकृति मन को शांति प्रदान करती है |

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किझ़ी पगोस्त यहाँ किझ़ी पगोस्त जैसे कुछ अद्भुत ऐतिहासिक स्थल भी हैं। लकड़ी के बने दो गिरजे, 18वीं सदी का एक अष्टकोणीय घण्टाघर, 1714 में बना 22 गुम्बदों वाला व 37 मीटर ऊँचा कायान्तरण गिरजा रूस के स्थापत्य आश्चर्यों में से एक है, जो यहाँ स्थित है । यहाँ विश्व सबसे ऊँची इमारतों है, जो कि लकड़ी की बनी है जिसमे कीलों का उपयोग नहीं किया गया है।

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आस्त्राख़न आज से कई सदियों पूर्व रूस की पहली आबाद भारतीय बस्ती आस्त्राख़न शहर में ही थी। जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमन्त्री थे, उस समय उन्होंने आस्त्राख़न की यात्रा की थी। आस्त्राख़न शहर पर विभिन्न देशों का प्रभाव साफ़ नज़र आता है क्योंकि यह शहर रूस, पश्चिमी एशिया और मध्य एशिया के बीच में स्थित है। इसे रूस के सबसे गरम स्थानों में से एक के तौर पर जाना जाता है। गर्मी से छुटकारे के लिए लोग वोल्गा नदी या कैस्पियन सागर में क्रूज की सवारी का आनन्द उठाते है | यहाँ 16वीं सदी के अन्त में रूसी शैली में बना एक प्राचीन किला है तो दूसरी तरफ मध्य एशियाई स्थापत्य कला में बनी इमारते है अत: आस्त्राख़न को स्थापत्य कला की विभिन्न शैलियों का रोचक संगम वाला क्षेत्र भी कहा जाता है | हवाई यात्रा द्वारा मास्को से आस्त्राख़न जाने में ढाई घण्टे लगते हैं और यदि रेलवे से जाना हो तो रात की गाड़ी पकड़ें | सुबह के समय जब रेल वोल्गा डेल्टा से दक्षिण की जाती है तो दोनों तरफ सुरम्य दृश्यों मन मोह लेते है |

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उलान-उदे रूस के बुर्यातिया प्रदेश की राजधानी उलान-उदे है जो मास्को से 5 हजार 6 सौ 70 किलोमीटर पूर्व में स्थित है तथा बिल्कुल अलग, अनजाने और अनूठे दृश्य के लिए जाना जाता है । यह शहर मंगोलिया के नज़दीक स्थित है | 1945 में निर्मित इवलगिन्स्की दत्सान बौद्ध मठ यहाँ का दर्शनीय स्थान है जहाँ अनेक बौद्ध मन्दिर, एक पुस्तकालय, एक विद्यालय और ध्यान करने के लिए एक हॉल मौजूद हैं। इसके निर्माण में रूसी, मंगोलियाई, तिब्बती और चीनी स्थापत्य शैलियों का इस्तमाल किया गया है । 19वीं सदी की लकड़ी और पत्थर की बनीं दुकानें और बाज़ार उलान-उदे के ऐतिहासिक केन्द्र के रूप में संरक्षित किया गया है। यह शहर बैकाल क्षेत्र के विभिन्न आदिवासी जनजातियों की संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व भी करता है। नृजातीय समूहों को समर्पित यहाँ 10 से अधिक संग्रहालय हैं। 37-हेक्टेयर के इलाके में फैला बैकाल-पार क्षेत्र का नृजातीय संग्रहालय भी इस सूची में शामिल है । मास्को से उलान-उदे तक जाने के लिए रेलवे से चार दिन तो हवाई जहाज़ से साढ़े छह घण्टे का समय लगता है।

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