खुद को बचाइए धूप की तेज धार से


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जीवन के लिए जरूरी है प्रकृति की देन-धरती, जल, वायु, प्रकाश और आकाश। नए-नए आविष्कारों से धीरे-धीरे हमने अपने इन पर्यावरण के सहयोगियों को अनजाने ही दूषित कर डाला। धूप, सूर्य, प्रकाश जो पहले स्वास्थ्य के लिए जरूरी थे अब नुकसानदेह होते जा रहे हैं। पृथ्वी चारों ओर से ओजोन गैस की परत से ढंकी हुई है। अंटार्काटिक के दोनों पोलों पर सीएफसी यानी क्लोरों फ्लोरो जमा होता जा रहा है। सीएफसी के इकट्ठे होने से अंटार्कटिक में छेद हो गया है। इस छेद से ओजोन परत रिस कर दिन पर दिन पतली होती जा रही है। पृथ्वी और सूरज के बीच ओजोन परत फिल्टर छलनी का काम करती है। यह सूर्य की हानिकारक किरणों को पृथ्वी पर आने से रोकती है। ओजोन परत के कम होते जाने के कारण उसकी फिल्टर करने की क्षमता दिन पर दिन कम होती जा रही है। इससे हानिकारक यू.बी. किरणों का दुष्प्रभाव बढ़ता जा रहा है।

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सूर्य की किरणें तीन प्रकार की होती हैं-अल्ट्रा वॉयलट ए, बी, और सी. अल्ट्रा वॉयलट ‘सी’ किरणें सबसे ज्यादा हानिकारक हैं। ये पृथ्वी पर नहीं पहुंच पाती। अल्ट्रा वॉयलट ‘बी’ किरणों का कुछ हिस्सा धरती तक पहुंचता है और कुछ ओजोन परत द्वारा सोख लिया जाता है। ये किरणें शरीर के डीएनए पर असर डालती हैं। डीएनए त्वचा के लचीलेपन को बनाए रखने में मदद करता है। यूवीबी किरणें डीएनए को प्रभावित कर त्वचा का लचीलापन कम करती है। इस कारण त्वचा में झूर्रियां पड़ जाती हैं। रुखी, झुर्रियोंदार त्वचा में संक्रमण होने की आशंका बढ़ जाती है। त्वचा में मैलनिन पिगमेंट पाया जाता है। यह पिगमेंट शरीर से यू.बी. किरणों का सोखता है। ज्यादा धूप में रहने से ज्यादा मैलनिन त्वचा पर जमा होकर यूवी किरणों के हानिकारक प्रभाव को कम करता है। यही कारण है कि ज्यादा धूप में रहने से त्वचा काली पड़ जाती है। ज्यादा धूप तो बचाव के लिए ज्यादा मैलनिन। सांवले लोगों में मैलनिन जयादा होता है और गौर वर्ण में कम। अल्ट्रा वॉयलट ‘ए’ नुकसानदायक न होने के कारण ओजोन परत इन्हें बिना फिल्टर किए पृथ्वी पर आने देती है। यूवी ए किरणें तवचा की अंदरूनी परत पर ही थोड़ा असर करती हैं। धूप जरूरी है विटामिन डी बनाने के लिए। कैलशियम विटामिन ‘डी’ की मदद से हड्डियों को मजबूत बनाता है। धूप जरूरी है प्रकाश के लिए। धूप का तापक्रम हानिकारक विषाणु, जीवाणु को नष्ट कर कई रोगों से बचाता है। सूर्य प्रकाश को बहुत अच्छा एंटीसेप्टिक माना जाता है।

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अमेरिका में प्रतिवर्ष लगभग दस लाख लोग त्वचा कैंसर के शिकार होते हैं। यूवी किरणें कम उम्र में ही त्वचा पर झुर्रियों और कालेपन का कारण है। यूवी किरणों का असर आंखों पर भी होता है जिसके कारण उम्र में मोतियाबिंदु हो जाता है। यूवी किरणें शरीर की प्रतिरोधक शक्ति को भी कम करती हैं।

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कुछ आसान और छोटी बातों का ध्यान रखकर आप धूप का लाभ बिना नुकसान के उठा सकते हैं।दोपहर की धूप से बचें-ग्यारह बजे से तीन बजे की धूप में यूवी किरणों का असर ज्यादा होता है। बाजार, बैंक, स्कूल के काम या तो ग्यारह के पहले या फिर तीन बजे के बाद करने का प्रयत्न करें।कपड़ों का चुनाव-सूती, गसी बुनाई का कपड़ा यूवी किरणों से बचाता है। पतला सूती कपड़ा त्वचा को अधिक सुरक्षा नहीं दे पाता। गहरे रंग के कपड़े यूवी किरणें ज्यादा सोख कर त्वचा को ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं। ज्यादा धूप में सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहनें। शरीर का ज्यादा से ज्यादा भाग कपड़ों से ढंक कर रखें। लंबे, छोटे गले, लंबी बाहों के कपड़े पहनें। सिर, टोपी, स्कॉर्फ से ढंक कर रखें। आंखों के बचाव के लिए टोपी का हुड कम से कम तीन इंच तक का होना चाहिए।पानी ज्यादा पिएं-दिन भर में दो से तीन लीटर पानी पीना चाहिए। पानी से त्वचा की नमी बनी रहती है। यह नमी यूवी किरणों के प्रभाव को कम करती है।

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धूप के चश्मे-सन ग्लास धूप के चश्मे जो पहले सिर्फ शौक फैशन से जुड़े थे अब आंखों के बचाव के लिए जरूरी है। इन चश्मों के कांच अच्छे होने चाहिए। इन बातों का ध्यान में रख धूप का मजा लें, लाभ उठायें पर सावधानी से।

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सन स्क्रीन लोश का इस्तेमाल करें-सन स्क्रीन लोशन में सन प्रोटेक्शन फैक्टर होता है। यह यूवी किरणों से त्वचा की रक्षा करता है। लोशन में कम से कम 155 पीएफ यानी सन प्रोटेक्शन फैक्टर होना चाहिए। 3 मिनट में त्वचा पर किरणों का जो असर होता है। 155 पीएफ लोशन लगाने से वह असर 45 मिनट बाद शुरू होगा। खिलाड़ी तैराक जिन्हें लगातार धूप में रहना पड़ता है। 605 पीएफ तक के लोशनों का प्रयोग करते हैं या हर घंटे बाद लोशन लगाते हैं।

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