घुटने की सर्जरी और मिथक


मिथक-कम उम्र में घुटना रिप्लेसमेंट करवाना सही नहीं
सच-ज्वाइंट रिप्लेसमेंट इस बात पर निर्भर करता है कि आपको कितना दर्द है और आप कितना असहाय महसूस कर रही हैं। अगर दवाओं और आपकी लाइफस्टाइल मंे बदलाव के बाद भी आराम नहीं मिलता तो आपको ज्वाइंट रिप्लेसमेंट करवाना ही पड़ेगा। अगर रिप्लेसमेंट सही प्रकार से किया गया हो तो 15 से 20 साल तक के लिए पूरी तरह से आराम मिल जाता है।

मिथक-अधिक उम्र में ज्वाइंट रिप्लेस करवाना खतरनाक हो सकता है।
सच-ज्वाइंट रिप्लेसमेंट किसी भी उम्र में पूरी तरह से सुरक्षित और कामयाब है। आधुनिक तकनीक, दर्द निवारक दवाइयों और दक्ष चिकित्सकों की वजह से यह और भी सुरक्षित और दर्दरहित प्रक्रिया बन गई है। कुछ लोग इससे डरते हैं और इसे टालते रहते हैं, लेकिन ये सभी मरीज जिन्होंने यह करवा लिया है, वह इस बात को कहते हैं कि काश हमने ये पहले करवा लिया होता।

मिथक-घुटनों का दर्द जब असहनीय हो जाए तक सर्जरी के बारे में सोचना चाहिए

सच- कई मरीजों की यह सोच होती है कि जब तक दर्द असहनीय न हो जाए, सर्जरी से बचना चाहिए। परंतु यह सही नहीं है, क्योंकि ऐसा करके मरीज अपनी जिंदगी को दर्द के साथ जीने पर मजबूर हो जाता है और सर्जरी में देरी से उसे पुनः अच्छी स्थिति में आने में देर लगती है।

मिथक-सर्जरी के बाद पूरी तरह से ठीक होने में लंबा समय लगेगा
सच-चिकित्सीय सलाह से सर्जरी के बाद ज्यादातर मरीजों को दूसरे दिन ही चलने की अनुमति दे दी जाती है। सर्जरी के बाद पूरी तरह से सामान्य होने में मात्र तीन महीने का समय लगता है। लेकिन इलाज में देरी होने से स्थिति बिगड़ भी सकती है।

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