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चेतन आनंद : मेरी परवाज़ जब-जब भी कभी अम्बर में होती है Chetan anand Hindi Gazal: Meri parwaaj jab jab bhi kabhi ambar mai hoti hai
गजल

चेतन आनंद : मेरी परवाज़ जब-जब भी कभी अम्बर में होती है

मेरी परवाज़ जब-जब भी कभी अम्बर में होती है कोई उलझी हुई क़ैंची भी मेरे पर में होती है।   भले कुछ भी करो लेकिन हमेशा याद ये रखना पड़ोसी भांप लेते हैं जो

चेतन आनंद : राहों से पूछ लेना] पत्थर से पूछ लेना Chetan anand Hindi Gazal: Raho se pooch lena, pathar se pooch lena
गजल

चेतन आनंद : राहों से पूछ लेना, पत्थर से पूछ लेना 

राहों से पूछ लेना, पत्थर से पूछ लेना, मेरा पता किसी भी ठोकर से पूछ लेना।   महलों से, महफिलों से, मत पूछना गगन से, मैं हूं नदी, मुझे तुम सागर से पूछ

चेतन आनंद : कभी रहे हम भीड़ में भइया, कभी रहे तन्हाई में, Chetan anand Hindi Gazal: kabhi rahe ham bheed mai bhaiya kabhi rahe tanhai mai
गजल

चेतन आनंद : कभी रहे हम भीड़ में भइया, कभी रहे तन्हाई में,

कभी रहे हम भीड़ में भइया, कभी रहे तन्हाई में, सारी उम्र गुज़ारी हमने रिश्तों की तुरपाई में।   कभी बांसुरी को समझाया, ढपली के रोके आंसू, कभी संभाला तबले

चेतन आनंद : वक्त की सियासत के क्या अजब झमेले हैं Chetan anand Hindi Gazal: Waqt ki siyasat ke kya ajab jhamele hai
गजल

चेतन आनंद : वक्त की सियासत के क्या अजब झमेले हैं

वक़्त की सियासत के, क्या अजब झमेले हैं। आइने तो ग़ायब हैं, चेहरे अकेले हैं।।   अब बतायें क्या तुमकोa दोस्तों की साजिश ने उस तरफ के ग़म सारे इस तरफ धकेले

चेतन आनंद : पहले तो होते थे केवल काले] नीले] पीले दिन] Chetan anand Hindi Gazal: Pahle to hote the kaval kale neele peele din
गजल

चेतन आनंद : पहले तो होते थे केवल काले, नीले, पीले दिन

पहले तो होते थे केवल काले, नीले, पीले दिन, हमने ही तो कर डाले हैं अब सारे ज़हरीले दिन।   मां देती थी दूध-कटोरी, पिता डांट के सँग टाॅफी, बड़े हुए तो दूर

चेतन आनंद : इन सियासतदानों के घर में भी ठोकर मारकर Chetan anand Hindi Gazal: In siyasatdano ke ghar mai bhi thokar markar
गजल

चेतन आनंद : इन सियासतदानों के घर में भी ठोकर मारकर

इन सियासतदानों के घर में भी ठोकर मारकर, क्या मिलेगा बेवजह कीचड़ में पत्थर मारकर।   तोड़ लो जितना इन्हें, ये सच ही बोलेंगे सदा, खुद ख़ता खा लोगे, आईने

चेतन आनंद : मुश्क़िल है, मुश्क़िलात की तह तक नहीं जाती Chetan anand Hindi Gazal: Mushqil hai mushqilaat kit ah taq nahi jaati
गजल

चेतन आनंद : मुश्क़िल है, मुश्क़िलात की तह तक नहीं जाती

मुश्क़िल है, मुश्क़िलात की तह तक नहीं जाती कोई भी बात, बात की तह तक नहीं जाती।   जलता है ख़ूब आग में, वो जानती है, पर- सूरज की बात, रात की तह तक नहीं

चेतन आनंद : गुमनाम हर बशर की पहचान बनके जी Chetan anand Hindi Gazal: Gumnaam har bashar ki pahachaan banke ji
गजल

चेतन आनंद : गुमनाम हर बशर की पहचान बनके जी

गुमनाम हर बशर की पहचान बनके जी जो हैं उदास उनकी मुस्कान बनके जी।   गूंगी हुई है सरगम, घायल हैं साज़ सब, हर हाल में तू इनका सम्मान बनके जी।   जो मन

चेतन आनंद : ऐसा भी कोई तौर तरीका निकालिये Chetan anand Hindi Gazal: Esa bhi koi taur tarqaa nikalye
गजल

चेतन आनंद : ऐसा भी कोई तौर तरीका निकालिये

ऐसा भी कोई तौर तरीका निकालिये। अहसास को अल्फाज़ के सांचे में ढालिये।।   जलता रहे जो रोज़ ही नफ़रत की आग में, ऐसा दिलो दिमाग़ में रिश्ता न पालिये।।  

चेतन आनंद : याद आते हैं हमें जब चंद चेहरे देरतक Chetan anand Hindi Gazal: Yaad aate hai hame jab chand chehre der taq
गजल

चेतन आनंद : याद आते हैं हमें जब चंद चेहरे देरतक

याद आते हैं हमें जब चंद चेहरे देरतक हम उतर जाते हैं गहरे और गहरे देरतक।   चांदनी आंगन में टहली भी तो दो पल के लिये धूप के साये अगर आये तो ठहरे देरतक।