इंजीनियरिंग और डॉक्टर से कम नहीं है फैशन डिजाइनर : सुनील सेठी


फैशन डिजाइन काउंसिल आॅफ इंडिया के अध्यक्ष सुनील सेठी से शरद दत्त की बातचीत

सबसे पहले यह बताइए कि यह फैशन डिजाइन काउंसिल आॅफ इंडिया है क्या?
यह डिजाइनरों के लिए डिजाइनरों द्वारा चलाई जा रही डिजाइनरों की संस्था है। यह एक गैर लाभकारी संस्था है। इसकी पूरी व्यवस्था डिजाइनरों के हाथ में हाती है। इसे सरकार का सहयोग जरूर प्राप्त होता है पर बुनियादी तौर पर यह एक प्राइवेट संस्था है।

आपको ऐसी संस्था बनाने का आइडिया कहां से आया?
मैं इस संस्थान से केवल साढ़े तीन साल से जुड़ा हूं जबकि यह सन 2000 से चल रही है। इसकी स्थापना उस वक्त हुई, जब 11 साल पहले कुछ डिजाइनरों को लगा कि एक ऐसा प्लेटफाॅर्म होना चाहिए, जहां से एक साथ अपनी क्रिएटिविटी प्रदर्शित की जा सके।ऐसा इससे पहले कहीं हो नहीं रहा था। कुछ फैशन सप्ताह जरूर होते थे पर उससे देश की कोई काउंसिल दिखती नहीं थी।

आपने खुद बताया कि आप फैशन के चार बड़े कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इसके पीछे की प्लानिंग के बारे में कुछ बताइए

इतने सालों से हम साल में केवल एक ब्रेथ वीक कर रहे थे फिर सर्दियों और गर्मियों के सीजन के हिसाब से दो होने लगे। ये अंतर्राष्ट्रीय कैलेंडर के हिसाब से हमने किए, पर हमने देखा कि यहां के डिजाइनरों की कमाई मुख्य रूप से कुत्योर से हैं, जिसके लिए हमें पर्ल्स ग्रुप ने बहुत सपोर्ट किया। मुंबई में भी हमने कुत्योर वीक किया, जिसका तीन साल हो चुके हैं और साथ ही पर्ल्स ग्रुप के साथ भी हम तीन साल हो गए है। इस हिसाब से जो कपड़े बनते हैं उससे डिजाइनरों को सबसे ज्यादा कमाई होती है। तो हमें लगा कि यह बहुत जरूरी है। इसके अलावा हमने देखा कि ‘मेंस फैशन वीक’ नहीं हो है। हमें लगा कि इसमें काफी गुंजाइश है। तो यह भी हमने किया। हमारे ‘ब्रेथ वीक’ में इस बार 130 डिजाइनर हिस्सा ले रहे हैं, जिसमें कम से कम 40 शो होते हैं और इसमें 200 खरीददार आएंगे। हमारी संस्था काफी मजबूत है, जो इतने सारे डिजायनरों को मंच देती है।

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शरददत्त

शरददत्त

शरद दत्त जाने-माने फि‍ल्म-निर्माता/लेखक है। वह चार दशक से अधिक समय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ संबद्ध हैं। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट व्यक्तियों पर 100 से अधिक वृत्तचित्रों का निर्माण कि‍या है। स्वाधीनता दिवस और गणतंत्र दिवस समारोहों का 33 वर्षों तक सीधा प्रसारण प्रस्तुत किया। इनके अलावा महान संगीतकार अनिल विश्वास की ‘ऋतु आए ऋतु जाए’ शीर्षक से जीवनी। ‘कुंदन’ शीर्षक से कुंदललाल सहगल की जीवनी। और भी कई महत्वसपूर्ण पुस्तकों का लेखन-संपादन। स्वर्ण कमल पुरस्कार, सर्वोत्तम क्रिएटिव प्रोड्यूसर एवार्ड, दूरदर्शन एवार्ड, गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार, शमशेर सम्मान आदि‍ कई पुरस्कारों से सम्मा्नि‍त।

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