साक्षात्कार

देश प्रेम के साथ अब पैसा भी महत्वपूर्ण हो गया है: जफर इकबाल

भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और कोच जफर इकबाल एक जाना पहचाना नाम है। जफर ने 1984 के लॉस एंजेलिस ओलम्पिक में भारतीय टीम की कप्तानी की थी और 1980 में मास्को ओलम्पिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे हैं। जफर ने मोहम्मद असलम के साथ मिलकर अपने जमाने में फारवर्ड पंक्ति की जोरदार अगुआई की थी। अलीगढ़ निवासी जफर एअर इंडिया में कार्यरत हैं। उन्हें देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक अलंकरण पदमश्री से भी नवाजा गया। पेश है भारतीय हॉकी टीम में इस मील के पत्थर से शरद दत्त की खास बातचीत।

आपके घर में पढ़ाई-लिखाई का माहौल था। आपके वालिद अलीगढ़-मुस्लिम यूनिवर्सिटी में रसायन विभाग के अध्यक्ष थे। आपके भाई भी रिसर्चर थे। आपकी बहन डाॅक्टर थी। आपने खुद सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। फिर आप हाॅकी की तरफ कैसे चले गए?

यूनिवर्सिटी में तो पढ़ने-लिखने का माहौल होना स्वाभाविक है, लेकिन उस वक्त यानी 70 के दशक में हाॅकी का भी बड़ा नाम था। युवा पीढ़ी में हाॅकी का बड़ा क्रेज था। हमने भी सोचा कि हाॅकी खेली जाए। उस वक्त मेरे लिए खेल के साथ पढ़ना भी काफी जरूरी था। पढ़ाई के मामले में हमारे वालिद साहब काफी सख्त थे। कुछ भी हो, पढ़ो जरूर! उस वक्त अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की हाॅकी टीम का भी बड़ा नाम था। उसने देश को कई मशहूर हाॅकी खिलाड़ी दिए थे। मसलन शकूरजी, सईद अली, गोविंदा, इनामुर्ररहमान जैसे कई लोग, जिन्होंने ओलपिंक भी खेला है।

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Title: interview of indian hockey team captioan zafar iqbal by sharad dutt in Hindi  | In Category: साक्षात्कार interview
शरददत्त

शरद दत्त

शरद दत्त जाने-माने फि‍ल्म-निर्माता/लेखक है। वह चार दशक से अधिक समय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ संबद्ध हैं। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट व्यक्तियों पर 100 से अधिक वृत्तचित्रों का निर्माण कि‍या है। स्वाधीनता दिवस और गणतंत्र दिवस समारोहों का 33 वर्षों तक सीधा प्रसारण प्रस्तुत किया। इनके अलावा महान संगीतकार अनिल विश्वास की ‘ऋतु आए ऋतु जाए’ शीर्षक से जीवनी। ‘कुंदन’ शीर्षक से कुंदललाल सहगल की जीवनी। और भी कई महत्वसपूर्ण पुस्तकों का लेखन-संपादन। स्वर्ण कमल पुरस्कार, सर्वोत्तम क्रिएटिव प्रोड्यूसर एवार्ड, दूरदर्शन एवार्ड, गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार, शमशेर सम्मान आदि‍ कई पुरस्कारों से सम्मा्नि‍त।

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