साक्षात्कार

देश प्रेम के साथ अब पैसा भी महत्वपूर्ण हो गया है: जफर इकबाल

आपने कब फैसला किया कि आप हाॅकी को ही अपना कैरियर बनाएंगे?

हमारे वालिद साहब के साथ एक और प्रोफेसर थे-रहमान साहब। यह हाॅकी के प्रेसीडेंट भी थे और भौतिकशास्त्र के प्रोफेसर भी थे। उन्हें हाॅकी से काफी लगाव था। वे भारत के पूर्व राष्ट्रपति डाॅ. जाकिर हुसैन के दामाद थे। उन्होंने मुझे स्कूल में खेलते हुए देखा तो उन्होंने मुझे प्रोत्साहित किया कि मैं यूनिवर्सिटी ग्राउंड में प्रैक्टिस करूं। तो इस तरह हाॅकी की तरह मेरा रुझान बढ़ना शुरू हुआ।

आप लेफ्ट आउट में खेलते थे...

मैं लेफ्ट आउट तो बाद में बना। पहले तो मैं लेफ्ट इन था। लेफ्ट इन के तौर पर ही मेरा हिंदुस्तान की टीम में सेलेक्शन हुआ, क्योंकि वहां लेफ्ट आउट के लिए कोई नहीं था। शुरू में स्टेप्स की काफी समस्या सामने आई, लेकिन हम उसको हल करके आगे बढ़े।

आपका जब पहली बार सेलेक्शन हुआ तब भारत की हाॅकी टीम के लिए वह समय कैसा था?

हिंदुस्तान के लिए जब कोई युवा लड़का खेलता है तो उसके लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि होती है। मैं पहली बार ही गया था और पहली बार में ही मेरा चयन हो गया। पहली सीरिज में हम लोगों से हाॅलैंड से कुछ टेस्ट मैच खेले थे और वह सीरिज़ भी हमने जीती थी। जीत का यह सिलसिला 1977 से 1986 तक चला।

1928 से 1956 तक का 28 साल का समय हमारी हाॅकी के लिए ‘गोल्डन पीरियड’ था। इस दौर में ध्यानचंद जैसे महान खिलाड़ी भी हुए। किस खिलाड़ी ने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया ?

जाहिर है ध्यानचंद जी ने। उन्हें हम दादा साहब भी कहते हैं। उनसे मुलाकात तो हुई, लेकिन हम उनको खेलते नहीं देख सके, क्योंकि तब वे 50 साल के हो गए थे और उन्होंने खेलना छोड़ दिया था। ध्यानचंदजी के बाद जो नाम आता है वह बलवीर सीनियर का। उन्होंने तीन ओलंपिक खेले। 1982 के एशियन गेम्स में वे हमारे कोच भी रहे। लेकिन मैं सबसे ज्यादा जिनसे प्रभावित हुआ, वे थे हमारे यूनीवर्सिटी के हाॅकी कोच स्वामी जगन्नाथ साहब। अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी में वे काफी साल तक रहे। 1932 में वे इंडियन हाॅकी टीम के मैनेजर बने। उनसे मैंने काफी कुछ सीखा। वे कहते थे कि जब तुम बाॅल रोक लोगे तो तुम सबसे बड़े खिलाड़ी बन जाओगे, क्योंकि जिस खिलाड़ी का ‘स्टापेज’ सही है तो उसने समझो 50 प्रतिशत खेल, खेल लिया।

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Title: interview of indian hockey team captioan zafar iqbal by sharad dutt in Hindi  | In Category: साक्षात्कार interview
शरददत्त

शरद दत्त

शरद दत्त जाने-माने फि‍ल्म-निर्माता/लेखक है। वह चार दशक से अधिक समय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ संबद्ध हैं। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट व्यक्तियों पर 100 से अधिक वृत्तचित्रों का निर्माण कि‍या है। स्वाधीनता दिवस और गणतंत्र दिवस समारोहों का 33 वर्षों तक सीधा प्रसारण प्रस्तुत किया। इनके अलावा महान संगीतकार अनिल विश्वास की ‘ऋतु आए ऋतु जाए’ शीर्षक से जीवनी। ‘कुंदन’ शीर्षक से कुंदललाल सहगल की जीवनी। और भी कई महत्वसपूर्ण पुस्तकों का लेखन-संपादन। स्वर्ण कमल पुरस्कार, सर्वोत्तम क्रिएटिव प्रोड्यूसर एवार्ड, दूरदर्शन एवार्ड, गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार, शमशेर सम्मान आदि‍ कई पुरस्कारों से सम्मा्नि‍त।

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